“युवा अर्थात स्वतंत्र सोच”-युवाओं के नाम खुला खत

युवाओं के नाम खुला खत

“युवा अर्थात स्वतंत्र सोच”

                    (राजेश बिस्सा🖋️ )

प्रिय युवाओं,
सादर वंदे…

       तुम हो युवा ताकत बनो,
       तिमिर मार्ग से निकलना है।
       राह गढ़ो सुपथ बनाओ,
       तुझे कंटक मार्ग हरना हैं।
       आयेंगी मुश्किलें अनेक,
       पर क्या फर्क पड़ता है।
       युवा जब ठान ले तो,
       पर्वत भी डोलता है।

जो लोग दूसरे के ज्ञान से दुनिया बदलने की सोचते हैं वह वास्तव में उस व्यक्ति के हाथों का हथियार होते हैं जो स्वयं स्वार्थ लाभ के लिये दूसरों के कंधों का इस्तेमाल करने में माहिर होते हैं।

स्वामी विवेकानंद जी ने युवाओं को कहा की ‘’अपने आप को शिक्षित करो”

“युवा अर्थात स्वतंत्र सोच” लेकिन यह सूत्र कुछ खोया खोया सा लगता है। युवाओं की लाचारी मन को क्लांत कर देती है। जिन युवा कांधों पर भविष्य की अनेको जवाबदारियों डोल रही हों उनका बल बुद्धी विवेक अगर मन में प्रश्न खड़ा करे तो तकलीफ होती है।

अज्ञानता उस वक्त बहुत घातक हो जाती है जब वो ज्ञान का चोला ओढ़कर समाज परिवर्तन को निकल पड़ती है। आज भारत में कुछ ऐसा ही हो रहा है। मुर्गा बांग देकर जाता है और उसकी बांग से जागृत हुए तत्व उस बांग के पीछे के भावार्थ को समझाने के लिये निकल पड़ते हैं। जिसका इल्म स्वयं उस मुर्गे तक को नहीं होता।

”मुर्गे की बांग से जागृत” लोगों को देखता हूं तो “महान कवी कालीदास जी” का स्मरण ताजा हो जाता है। कालीदास जी पहले भारी अज्ञानी व आला दर्जे के मूर्ख थे उनके बारे में यह वाकया बहुत प्रचलित है कि वो उसी डाल को काट रहे थे जिस पर बैठे हुए थे। उन्हे इस बात का भी इल्म नहीं था कि वे अगर डाल काट देंगे तो उस डाल के साथ ही साथ नीचे गिर कर स्वयं भी चोटिल हो जायेंगे। लेकिन बाद में ठोकर खाने के बाद जब वो अध्ययन करते हैं, चिंतन मनन करते हैं, तो वो संस्कृत के महान ज्ञाता व साहित्यकार बनते हैं। जिसे आज हम सब हजारों साल बाद भी पढ़ रहे हैं।

“कालीदास जी” की “मुर्गे की बांग से जागृत” लोगों की तुलना इसलिये कर रहा हूं क्योंकि मैं उन्हे दूषित मानसिकता का नहीं मानता बल्की मैं मानता हूं कि कालीदास जी की भांती वे अभी अज्ञानता के सागर में गोते लगा रहे हैं।

मेरा मानना है कि जिस तरह कालीदास जी ठोकर खाकर ज्ञान प्राप्ति कि दिशा को अग्रसर हुए थे एक दिन मुर्गे की बांग से जागृत लोग भी सोशल मीडिया के शरारती ज्ञान से विमुक्त होकर सत्य ज्ञान के प्रकाश को प्राप्त करेंगे। स्वयं का सार्थक चिंतन मनन अध्ययन करके समाज परिवर्तन के योद्धा साबित होंगे। जगत को रौशन करेंगे।

किसी ने भड़काया हम भड़क गये। किसी ने समझाया हम समझ गये। किसी ने दौड़ाया हम दौड़ गये। किसी ने रोका हम रुक गये। अगर आप इन चार बातों में से किसी भी एक के करीब अपने को पाते हैं तो समझ जाईये आप जीवन के शुरुवाती दौर के वो कालीदास हैं जो अज्ञानता के भंवर में फंसे हुए हैं। अब आप का लक्ष्य उससे बाहर निकलने का होना चाहिये

प्रिय युवा साथियों, हां में हां मिलाकर वृंदगान करना जवानी का उद्घोष नहीं। जो ज्ञान का प्रकाश लिये बांटता चले वो युवा है। जो निडरता से व्यवस्था पर प्रश्न करे वो युवा है। जो व्यवस्था को सुझाव दे वो युवा है।

जय हिंद …

राजेश बिस्सा
9753743000
(लेखक राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत स्वतंत्र विचारक हैं। युवाओं के बारे लगातार लिखते रहते हैं।और यह विचार इनके निजी हैंं)

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