युवाओं के नाम पैगाम,-“हम शासक हैं”

आलेख-राजेश बिस्सा🖍️

प्रिय युवाओं,
सादर वंदे,

मौन धरे यूं न बैठ, आवाज कर,
वजूद इसी में है, प्रश्न खड़ा कर,

मां भारती के लाल, भय कैसा,
उठ खड़ा हो, बेखौफ सवाल कर,

“युवा यानी सूर्य” अर्थात युवा का काम है प्रकाश फैलाना ना कि अंधेरी गुफाओं में मातम मनाना।

मां भारती के लाल में नकारात्मकता, डर, भय, अज्ञानता का कोई स्थान नहीं हो सकता।

क्या आप सोचते हैं कि हमारी कौन सुनेगा?

क्या आप को लगता है कि आप कमजोर हैं?

क्या आप को शासन से सीधा संवाद करने में संकोच होता है?

क्या आप दूसरे के पहलू में अपने को सुरक्षित या बलवान समझते हैं?

क्या आप भीड़ तंत्र का हिस्सा बने रहने में अपनी भलाई समझते है?

अगर इन सब बातों का उत्तर आपका मन “हां” में दे रहा है तो जान लीजिये कि आप युवा होने का अहसास खोते जा रहे हैं। आप शासक होने का अधिकार छोड़ रहे हैं।

आप सोच रहे होंगे की हम शासक कैसे हो सकते हैं। तो अच्छे से समझ जाइए कि शासक और शासन क्या होता है।

शासक के लिए काम करने वाली मशीनरी को शासन कहा जाता हैं। हमें यह बहुत गहराई से समझना होगा कि *लोकतंत्र में असली शासक आम जन मानस और युवा है।* वह तय करता है कि शासन करने वाली मशीनरी कौन हो। अर्थात जिसे हम आज शासक समझते हैं वो सेवक है और आप युवा शासक।

हम शासक हैं, यह जज्बा हमेशा अपने में जागृत रखें

जब हम शासक हैं तो कोई कारण नहीं बनता कि हम अपने आप को असहाय महसूस करें। अपने को कमजोर महसूस करें। दूसरे की बातों को अपने जीवन की राह माने।

हमारी कमजोरी या कह लीजिए समझ व अध्ययन की कमी ने हमसे शासक होने का भाव छीन लिया है।

जिन्हें हमने सेवा करने के लिए चुना उन्हे हमने ही शासक मान लिया है

अगर आप जागृत हो गए तो यह भ्रम टूटने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। जब हम सत्ता की चाबी किसी को सौंपते हैं तो हम उसे काम करने वाला अपना प्रतिनिधि मान कर देते हैं ना की हमारे ऊपर राज करने वाला शासक बना कर।

जिस दिन युवा अपनी स्वतंत्र सोच को विराम देते हैं उस दिन हम अपने ऊपर किसी और को शासन करने का अधिकार दे देते हैं। हमारा प्रश्न पूछने का अधिकार खत्म हो जाता है। हमारी बेबसी का दौर शुरू हो जाता है।

शासन कोई भी करे शासक होने का अपना अधिकार हमें नहीं खोना है। शासन हमारे द्वारा बैठाया हुआ हमारे लिये कार्य करने वाला तंत्र है। उससे निःसंकोच संवाद कीजिये। प्रश्न कीजिये। स्व-विवेकी बनिये। भीड़ तंत्र का हिस्सा बनकर अपनी शक्ति मत खत्म करिये।

इतिहास भी गवाह है किजब जब युवा जागा है – अंधकार भागा है।”

राजेश बिस्सा
9753743000

(लेखक राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत स्वतंत्र विचारक हैं। युवाओं के बारे लगातार लिखते रहते हैं। यह विचार निजी है)

Leave a Reply

Your email address will not be published.