रेलवे मंत्रालय ने 151 यात्री रेलगाडि़यों के परिचालन के लिए निजी क्षेत्र से मांगे आवेदन

परियोजना में निजी क्षेत्र से लगभग 30,000 करोड़ रुपये का निवेश आएगा। यह भारतीय रेल नेटवर्क में यात्री ट्रेनें चलाने के लिए निजी निवेश की पहली पहल है।अधिकांश ट्रेनों को भारत (मेक इन इंडिया) में ही बनाया गया है। इन ट्रेनों के वित्तपोषण, खरीद, परिचालन और रखरखाव के लिए निजी इकाई जिम्मेदार होगी।

इन ट्रेनों को अधिकतम 160 किमी प्रति घंटा गति के लिए डिजाइन किया जाएगा। इससे यात्रा में लगने वाले समय में खासी कमी आएगी। एक ट्रेन द्वारा यात्रा में लगने वाला समय तुलनात्मक रूप से घट जाएगा या संबंधित रूट पर परिचालित भारतीय रेल की सबसे तेज चलने वाली ट्रेन से भी ज्यादा गति हो जाएगी।

इस पहल का उद्देश्य कम रखरखाव, कम पारगमन समय, ज्यादा रोजगार सृजन, यात्रियों को ज्यादा सुरक्षा, विश्व स्तरीय यात्रा अनुभव देनने वाली आधुनिक तकनीक से युक्त रेल इंजन और डिब्बों की पेशकश करना तथा यात्री परिवहन क्षेत्र में मांग व आपूर्ति के अंतर में कमी लाना भी है।

इस परियोजना के लिए रियायत अवधि (कन्सेशन पीरियड) 35 वर्ष होगी। निजी इकाई को भारतीय रेल को निश्चित ढुलाई शुल्क, वास्तविक खपत के आधार पर ऊर्जा शुल्क का भुगतान करना होगा और पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित सकल राजस्व साझा करना होगा।

इन ट्रेनों को भारतीय रेल के चालक और गार्ड द्वारा परिचालित किया जाएगा। निजी इकाई द्वारा ट्रेनों के परिचालन में समय-पालन, विश्वसनीयता, ट्रेनों के रखरखाव आदि प्रदर्शन के प्रमुख संकेतकों का ध्यान रखना होगा।

यात्री ट्रेनों का परिचालन और रखरखाव में भारतीय रेल द्वारा उल्लिखित मानकों एवं विनिर्देशों और आवश्यकताओं का ध्यान रखना होगा।