वर्तमान महामारी का दौर और राजनीतिक व्यवस्था पर चंद्रशेखर की प्रासंगिकता, भूतपूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा व वैचारिक गोष्ठी का हुआ आयोजन

भिलाई(खबर वारियर)भूतपूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 13वीं पुण्यतिथि पर बुधवार को श्रद्धांजलि सभा व वैचारिक गोष्ठी का आयोजन भारतरत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण स्मारक प्रतिष्ठान,आचार्य नरेंद्र देव स्मृति जन अधिकार अभियान समिति एवं चंद्रशेखर फाउंडेशन की ओर से संयुक्त रूप से एचएससीएल कालोनी, रूआबांधा में किया गया।

आयोजन की शुरूआत में उपस्थित लोगों ने दिवंगत चंद्रशेखर के चित्र पर माल्यार्पण कर अपनी श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने दिवंगत चंद्रशेखर के राष्ट्र के प्रति योगदान को  नमन किया।

वैचारिक गोष्ठी में ‘वर्तमान महामारी का दौर और राजनीति व्यवस्था पर श्रद्धेय चंद्रशेखरजी की प्रासंगिकता‘ विषय पर अपनी बात रखते हुए कार्यक्रम के संयोजक आर पी शर्मा ने कहा कि कोरोना संक्रमण की आड़ में लोकतंत्र को दरकिनार कर अधिनायकवादी सत्ता चलाई जा रही है और आम जनता को हर स्तर पर कमजोर किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति की भविष्यवाणी स्व. चंद्रशेखर ने संसद में की थी। उन्होंने स्व. चंद्रशेखर के कथन को उद्धृत करते हुए कहा कि-‘देश की धरोहर बेच कर राष्ट्र का निर्माण नहीं हो सकता’ लेकिन मौजूदा सरकार सार्वजनिक उपक्रमों को कौडिय़ों के मोल बेच रही है।

रेल सेवा जैसी देश की जीवन रेखा का स्वरूप खत्म करने में केंद्र सरकार तुली हुई है। इसका हर स्तर पर विरोध होना चाहिए। त्रिलोक मिश्रा ने कहा कि दो दशक पहले अटल बिहारी बाजपेयी के नेतृत्व वाली 13 दिन की सरकार के खिलाफ अविश्वास मत प्रस्ताव पर संसद में अपने ऐतिहासिक भाषण में भूतपूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने दक्षिणपंथी तत्वों के उभार पर चिंता जताते हुए कहा था कि जिस दिन इनकी पूर्ण बहुमत की सरकार आ जाएगी, उस दिन लोकतंत्र उपेक्षित कर दिया जाएगा और देश की एकता-अखंडता पर संकट की स्थिति आ जाएगी। आज यह बात सच साबित हो रही है।

नंदकिशोर साहू ने कहा कि चंद्रशेखर देश की एकता के लिए आपस में विश्वास को सबसे अनिवार्य तत्व मानते थे। मोतीचंद सिंह ने कहा कि जब तक दलित, अल्पसंख्यक और वंचित वर्ग की बेहतरी के लिए गंभीरता से काम नहीं किया जाएगा, तब तक देश में समाजवाद नहीं आ सकता।
एमआर रजक ने स्व. चंद्रशेखर का 26 फरवरी 1991 को अविश्वास प्रस्ताव के दौरान का भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें इस देश में अपनी उस धार्मिक विरासत पर गर्व होना चाहिए जिसने हमें अपने देश की विविधता से भरी संस्कृति का सम्मान करना सिखाया है। गोष्ठी में कपिल देव प्रसाद, नागेंद्र प्रसाद, एलके वर्मा और आरपी सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।