महुआ से बनाये गुणकारी व स्वादिष्ट उत्पाद, राजनांदगांव वनविभाग की बड़ी सफलता

रायपुर(खबर वारियर)- राजनांदगांव जिले के सघन वन जैवविधिता से परिपूर्ण व समृद्ध है, जहां लघुवनोपज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। अंचल में लघुवनोपज महुआ बहुतायत होता है। यही कारण है कि दो वर्ष पहले जहां महुआ प्रसंस्करण केंद्र बनाया गया। अब यहां विभिन्न श्रृंखला में महुआ से बने स्वादिष्ट उत्पाद स्क्वैश (शरबत), महुआ आरटीएस (जूस), महुआ चटनी, महुआ चिक्की, महुआ लड्डू व सूखा महुआ भी उपलब्ध है।
विभाग का दावा है कि प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, आयरन और कैल्शियम से भरपूर महुआ स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। प्रोसेसिंग यूनिट में जामुन के चिप्स भी बनाया जा रहे हैं, जो प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, विटामिन ए एवं सी से भरपूर हैं और डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है।
राजनांदगांव का महुआ प्रसंस्करण केंद्र मध्य भारत की पहली महुआ उत्पादों से संबंधित यूनिट है, जहां गुणवत्तायुक्त उत्पाद बनाए जा रहे हैं। जिन गांवों में अच्छा महुआ होता है, उन्हें चिह्नांकित कर ग्रीन नेट लगाकर अच्छे किस्म का महुआ संग्रहित करते हैं। मानपुर, मोहला व बागनदी क्षेत्रों में महुआ अधिक मात्रा में होता है।
पुरूषों के स्वसहायता समूह द्वारा महुआ प्रसंस्करण केंद्र में कार्य किया जा रहा है। इन उत्पादों के लिए उन्हें प्रशिक्षित किया गया है। तैयार उत्पाद को टेस्टिंग के लिए भेजा गया था। रिपोर्ट आने के बाद बड़े पैमाने पर महुआ के उत्पाद बनाने का काम समूह द्वारा किया गया है। नवंबर में चार लाख 50 हजार राशि के उत्पादों की बिक्री की गई है।
रेंजर मएल बंजारे ने बताया कि यहां दक्ष लोगों की टीम काम कर रही है जिसके प्रमुख दीपक सोनी हैं। महुआ प्रसंस्करण केंद्र में पल्प निकालने की मशीन, महुआ को उबालने के लिए दो केटल, जूसर मशीन एवं बायलर मशीन है। कच्ची वस्तुओं को रखने की व्यवस्था के साथ ही स्टरलाईजेशन टैंक और लैब हैं। महुआ के उत्पाद बाजार में एवं दुर्ग मार्ट संजीवनी विक्रय केंद्र में भी उपलब्ध हैं।



