समोदा-चंदखुरी को अभी नगर पंचायत नही बनाया जा सकता- मारकण्डेय

रायपुर(खबर वारियर)- भाजपा के पूर्व विधायक व उच्च न्यायलय में अधिवक्ता नवीन मारकण्डेय ने वर्तमान में ग्राम पंचायत समोदा व चंदखुरी के नगर पंचायत के रूप में उन्नयन के उद्देश्य से राज्य शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना को अवैधानिक बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने यह आरोप लगाया है कि काँग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के मंत्री अपनी विफलताओं से आरंग क्षेत्र की जनता व किसानों का ध्यान भटकाने के लिए जानबूझकर इस प्रकार के छलपूर्ण व भ्रामक अधिसूचना को जारी करवाते हैं।
नगर पंचायत के रूप में उन्नयन की इस अधिसूचना की वैधानिकता पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए अधिवक्ता नवीन मारकण्डेय ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की अधिसूचना दिनांक- 31 दिसंबर 1990 जिसे जनगणना अधिनियम 1990 के नाम से भी जाना जाता है की धारा 8 की उपधारा 4 का हवाला देते हुए राज्य शासन द्वारा जारी अधिसूचना को नियम विरुद्ध बताया है। इसकी व्याख्या करते हुए मारकण्डेय ने बताया कि धारा 8 (4) में स्पष्ट उल्लेखित किया गया है कि एक बार जनगणना की अधिसूचना जारी होने के पश्चात जिला, तहसील, नगर अथवा ग्रामों की सीमा अथवा स्वरूप में तब तक कोई परिवर्तन नही किया जाएगा.
जब तक जनगणना का कार्य पूर्ण ना कर लिया जाए। जनगणना 2021 की अधिसूचना 7 जनवरी 2020 को ही जारी कर दी गयी थी जिसके अनुसार सितंबर माह तक प्रथम चरण की जनगणना पूर्ण किये जाने का लक्ष्य था किंतु कोविड-19 के लॉकडाउन के कारण यह लक्ष्य आगे बढ़ गया है तथा जनगणना का कार्य अभी तक पूर्ण नही हुआ है।
नगर पालिका अधिनियम 1961 के अध्याय 2 की जिस धारा 5 के तहत नगर पंचायत का गठन किया जा रहा है उसके निर्देश (2) में यह प्रावधान है कि वे संक्रमणशील क्षेत्र जहां जनसंख्या का घनत्व, उत्पन्न राजस्व, कृषि से भिन्न व्यवसाय में नियोजन की प्रतिशतता व अन्य आर्थिक महत्व के क्रियाकलाप नगर के अनुरूप हो उन्हीं स्थानों का नगर पंचायत के रूप में उन्नयन किया जावेगा इस आधार पर ग्राम- कुसमुन्द, काकदेही, जुगेसर व कुरूद (म) का परीक्षण करने पर प्राप्त होता है कि ये पूर्णतः कृषि व मनरेगा पर आधारित ग्राम है जिनमे जनसंख्या घनत्व भी अत्यंत कम है। इस आधार पर भी इनका नगर पंचायत के रूप में उन्नयन अनुचित है।
मारकण्डेय ने यह भी जानकारी दी है कि समोदा व चंदखुरी के साथ सम्मिलित किये गए ग्राम- कागदेही, कुसमुन्द तथा जुगेसर की जनता ने उनके ग्राम को नगर पंचायत ने सम्मिलित किये जाने का विरोध किया है। ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर वे नगर पंचायत में शामिल होने के बाद अधिरोपित मकान, सफाई, प्रकाश, निर्माण अनुज्ञा व गुमास्ता आदि प्रकार के करों का भुगतान करने में अक्षम हैं.
वहीं दूसरी ओर इस निर्णय के साथ वे मनरेगा व प्रधनमंत्री आवास योजना जैसे महत्वपूर्ण योजनाओं से भी वंचित हो जाएंगे जो उनके व उनके परिवार के लिए एक अपूरणीय आर्थिक क्षति होगी। इन सभी का उद्धरण देते हुए ग्रामीणों ने नवीन मारकण्डेय के साथ कलेक्टर से मुलाकात कर अपना दावा-आपत्ति दर्ज कराते हुए यह मांग किया है कि नगर पंचायत उन्नयन की अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया जावे।



