राजधानी

किसान आंदोलन के साथ एकजुटता के लिए बनाएंगे मानव श्रृंखला, निकलेंगे मशाल रैली और ट्रेक्टर की प्रभात फेरी

रायपुर (खबर वारियर)- किसानों के आन्दोलन के साथ सम्पूर्ण एकजुटता व्यक्त करते हुए प्रदेश के ट्रेड यूनियन संगठन, सामाजिक व नागरिक संगठन, जनसंगठन के साथ ही कला, साहित्य, रंगकर्म आदि से जुड़े संगठनों और आम जन नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि के साथ 23 जनवरी 2021 की शाम 5 बजे पंडरी के समक्ष मानव श्रृंखला निर्माण करेंगे । 24 जनवरी को किसानों के पक्ष में जनसमर्थन जुटाने नुक्कड़ सभाएं करेंगे, 25 जनवरी को मशाल जुलूस निकलेंगे और 26 जनवरी को संविधान बचाओ, देश बचाओ, किसान बचाओ खेत बचाओ के नारे पर ट्रेक्टर की प्रभात फेरी निकलेंगे ।

उल्लेखनीय है कि किसान आंदोलन के समन्वय समिति के द्वारा देश भर में 23 जनवरी से 25 जनवरी तक राजभवन मार्च, महापड़ाव व 26 जनवरी को ट्रेक्टर परेड का आव्हान किया है । देश के संविधान की हिफाजत व किसान के संघर्ष के साथ एकता के आज संपन्न हुई विभिन्न संगठनों की बैठक ने प्रदेश में इसे सफल।बनाने यह निर्णय लिया । सीटू के राज्य सचिव धर्मराज महापात्र ने इस बैठक का संचालन किया और हाकर्स यूनियन के नेता गौतम बंदोपाध्याय ने इसकी अध्यक्षता की ।

बैठक में सीटू महासचिव एम् के नंदी, तृतीय वर्ग शास कर्म संघ के अध्यक्ष राकेश साहू, एस टी यू सी के सचिव एस सी भट्टाचार्य, आर डी आई ई यू के के के साहू, संदीप सोनी, एस एफ आई के राजेश अवस्थी, जनवादी नौजवान सभा के प्रदीप गभ्नें, साजिद रजा, इपटा के अरुण काठोटे, दलित शोषण मुक्ति मंच के रतन गोंडाने, किसान सभा के प्रवीण दीक्षित, अजय कन्नोजे प्रमुख रूप से उपस्थित थे ।

सीटू के राज्य सचिव धर्मराज महापात्र ने यह जानकारी देते हुए कहा कि बैठक की यह राय थी कि यह शर्मनाक है कि देश का मौजूदा निजाम 100 से अधिक किसानों की शहादत के बावजूद अपने कार्पोरेट अकाओ के दबाव में किसान विरोधी काले कानूनों की वापसी की पहल नहीं कर रहा है और केवल बातचीत का भोंडा नाटक कर रहा है ।

जबकि कड़कती ठंड व 3 डिग्री के तापमान में जमे हाथ-पांव के बावजूद भाजपा के किसान विरोधी प्रचार की वजह से जैसे-जैसे कारपोरेट के हाथों जमीन व बाजार खोने का डर बढ़ रहा है, किसान बड़ी संख्या में विरोध में शामिल हो रहे हैं ।

किसानों ने कृषि मंत्री को याद दिलाया है कि इन कानूनों को वापस लिये जाने का सवाल 7 माह से उनकी मेज पर लंबित है और जब वे कहते हैं कि वे मुद्दे, तर्क और तथ्यों पर बात करेंगे तो उन्हें इसे भी याद रखना चाहिए। सरकार का दावा कि ये कानून किसानों के लाभ के लिए है, बेतुका है। लाखों किसान जो कम्पनियों की सच्चाई को उनसे बेहतर समझते हैं, पिछले डेढ़ माह से ज्यादा समय से उनके दरवाजे पर बैठे हैं।

ये कानून जो विदेशी व घरेलू कारपोरेट को कानूनी रूप से अधिकार देते हैं, सरकारी मंडियों को कमजोर करेंगे और किसानों को ठेकों में बांध देंगे। ये सामान की आपूर्ति, सुपरवाइजर, एग्रीगेटर, पारखी, आदि के रूप में बिचैलियों की एक लंबी श्रृंखला को स्थापित करेंगे। ये लागत के दाम बढ़ाएंगे, फसल के दाम घटाएंगे, किसानों पर कर्ज बढ़ाएंगे और जमीन छिनने व आत्महत्याओं की घटनाएं बढ़ जाएंगी।

ठेका कानून के अन्तर्गत किसानों को कर्ज लेना ही पड़ेगा और ठेका कानून में जमीन गिरवी रखकर ऐसे कर्जे लेने तथा जमीन से उसकी वसूली का प्रावधान है। सरकार जानबूझकर देश को गलत जानकारी दे रही है कि वह एमएसपी व सरकारी खरीद का आश्वासन दे सकती है। उसके अपने नीति आयोग के उपाध्यक्ष रोजाना लेख लिख रहे हैं कि सरकार के पास भंडारण की समस्या है और उसका फसल खरीदने का कोई इरादा नहीं है।

इतनी भारी संख्या ने भाग ले रहे किसानों व उनके संगठनों द्वारा दमन के बावजूद शांतिपूर्ण विरोध के साथ जो अनुशासन बनाए रखा गया है वह एक नया इतिहास बना रहा है । सभी संगठनों ने किसानों के पक्ष में इस शपथ कार्यक्रम को पूरे प्रदेश में सफल बनाने की अपील की है ।

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