छत्तीसगढ़

उच्च न्यायालय के युगलपीठ ने कृषि विभाग में नियम विरूद्व पदोन्नति नियम में किए गए संशोधन को किया अमान्य

रायपुर ( खबर वारियर) छत्तीसगढ़ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघ द्वारा कृषि विभाग के पदोन्नति नियम में अधिकारियों ने अपने स्वेच्छाचारिता का परिचय देते हुए न केवल संशोधन कर दिया अपितु संशोधित नियम के तहत नियम विपरित वरिष्ठों की उपेक्षा करते हुए, 235 कनिष्ठ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को शैक्षणिक आधार पर पदोन्नति भी प्रदान की गई थीं।

संघ द्वारा बारंबार पत्राचार करने के बाद भी अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की। इसलिए 26 दिसंबर 2020 से 12 जनवरी 2021 तक 18 दिनों तक महाभारत के युद्व की भॉति अनिश्चितकालिन आंदोलन किया गया था। तब भी अधिकारियों ने माननीय उच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय आने के पूर्व ही न्यायालय की परवाह किए बिना नियम विपरित पदोन्नति प्रदान कर दी।

अंततोगत्वा संध द्वारा माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ बिलासपुर में याचिका क्रमांक डब्लू.पी.एस. नं. 4742/2019 में पारित आदेश दिनांक 07 अप्रैल 2022 द्वारा मूल भर्ती नियम 2010 में 4 दिसंबर 2018 को किए गए संशोधन को निरस्त कर 07 अप्रैल 2022 से छग.अधिनस्थ कृषि तृतीय श्रेणी अलिपिक वर्गीय सेवा भर्ती नियम 2010 के आधार पर समस्त कार्यवाही निरस्तीकरण योग्य हो गया है।

प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष विजय कुमार झा, एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संध के प्रांताध्यक्ष एम.पी.आड़े माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश को छत्तीसगढ़ में व्याप्त अफसरशाही द्वारा कर्मचारियों व कर्मचारी संध के विरूद्व लोगों पर न्याय की जीत निरूपित किया है।

आंदोलन के दौरान संचालक अमृत खल्को को अनेक बार चर्चा करने, आंदोलन समाप्त करने हेतु पदोन्नति पर रोक लगाने, की मांग की लगातार उपेक्षा से रूष्ट संध के प्रांतीय अध्यक्ष एम.पी.आड़े, परमाानंद कुर्रे, कुषल प्रसाद गेंदले, सुखराम भगत चारों याचिकाकर्ताओं ने माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की प्रतिलिपिक सहित विधिवत् ज्ञापन प्रमुख सचिव कृषि, महानदी भवन व संचालक कृषि इंद्रावती भवन नवारायपुर को सौपकर तत्काल उच्च न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।

अधिकारियों ने नियम विपरित कार्य कर 880 योग्य व वरिष्ठ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी जो विभाग में 1987-88 से कार्यरत् रहते हुए वरिष्ठ थे उनको तो पदोन्नति से वंचित किया ही, इसके अतिरिक्त कृषि स्नातक होने के कारण वरिष्ठता की उपेक्षा कर योग्यता के आधार पर 235 कनिष्ठों को पदोन्नति प्रदान कर उनके जीवन व सम्मान के साथ भी खिलवाड़ कर दिया।

कुछेक सदस्यों नाम न छापने की शर्त पर शीध्र पदोन्नति का लाभ लेने के लालच में भ्रष्टाचार की बैतरणी पार करना बताया है। इसके फलस्वरूप छत्तीसगढ़ पदोन्नति नियम 2003 के
‘‘वरिष्ठता-सह-उपयुक्तता‘‘ की उपेक्षा मनमाने ढंग से किया गया।

माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का अजय तिवारी प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संध, संध के महामंत्री विजय लहरे, कोषाध्यक्ष नलनी चन्द्राकर, संरक्षक निर्मल शर्मा, सीताराम भगत, एस.एस.राजौरिया, मनोज कुमार, गीता जुरेशिया, कुबेर सिंह, प्रदेश कृषि विकास अधिकारी संध,जी.एस.यादव, प्रदेशाध्यक्ष वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी संघ ने स्वागत् करते हुए कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे व कृषि विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि तत्काल उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुएग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के साथ किए गए अन्याय का प्रतिकार किया जावे अन्यथा समय सीमा में समुचित निर्णय न होने पर माननीय उच्च न्यायालय की शरण मेंपुनः जाकर अवमानना की कार्यवाही करने के लिए संघ पीछे नहीं हटेगा। क्योंकि विभाग ने प्रदेश के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को बहुत अपमानित किया है।

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