प्रदेश के शासकीय कार्यालयों में कोरोना विस्फोट, अधिकारी कर्मचारीअसुरक्षित, रोटेशन प्रणाली व 50 प्रतिशत् उपस्थिति हो सुनिश्चित

स्वास्थ कर्मियों से सहानुभूति पूर्वक व सम्मान् के साथ लिया जाए कार्य,अवकाश रोक हटे
रायपुर(khabar warrior)- छत्तीसगढ़ के शासकीय कार्यालयों, संस्थाओं में बढ़ते कोरोना संक्रमण व शासकीय चिकित्सालयों में भर्ती न हो पाने, निजी चिकित्सालयों में मची लूट से प्रदेश के शासकीय अधिकारी कर्मचारी चिंतित है। अकेले रायपुर राजधानी के कलेक्टोरेट, शिक्षा विभाग सहित अन्य कार्यालयों में कोरोना ब्लास्ट होने से छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संध ने मंत्रालय की भाॅति रोटेशन प्रणाली लागू करने, 50 प्रतिशत् उपस्थिति के आदेश पूरे प्रदेश में लागू करने की मांग मुख्यमंत्री भूपेश बधेल से की है।
संध के प्रदेशाध्यक्ष विजय कुमार झा एवं जिला शाखा अध्यक्ष इदरीश खाॅन ने बताया है कि छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा कोई भी आदेश प्रसारित किया जाता है तो वह पूरे प्रदेश के शासकीय सेवकों के लिए प्रभावी होता है। किंतु कोरोना संबंधी रोटेशन प्रणाली व 50 प्रतिशत् उपस्थिति का आदेश केवल मंत्रालय संचालनालय में लागू किया गया है।
सोमवार को कलेक्टर कार्यालय के 5 कक्षों में कोरोना संक्रमण पाएं जाने पर कक्ष क्रमांक 09 सामान्य निर्वाचन शाखा, कक्ष क्रमांक 7 नजूल कार्यालय, कक्ष क्रमांक 06 के भाड़ा नियंत्रण अधिकारी कार्यालय, को 48 धण्टे के लिए सील कर दिया गया है। वहीं खाद्व शाखा में 01 सहायक खाद्य अधिकारी एवं जिला नाजरात् के लिपिक के परिजन के पाॅजिटिव्ह होने से दोनों शाखाओं को सेनेटराईस कराया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में 7 कर्मचारियों के संक्रमित होने पर 48 धण्टे के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय भी सील कर दिया गया है। जबकि जिला दण्डाधिकारी रायपुर के आदेशानुसार 5 या 5 से अधिक संक्रमित मिलने पर कन्टेंमेंट जोन धोषित किया जाना चाहिए। किंतु जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में यह निर्देश लागू नहीं किया गया है।
ऐसी स्थिति में खतरा और बढ़ने की संभावना है। यही स्थिति सभी जिलों, विशेषकर दुर्ग जिले में कार्यालयों, शासकीय सेवकों की है। मृत्यु दर बढ़ने के कारण परिवार में न अंतिम संस्कार करने वाला बच रहा है न ही अस्थि संचयन करने की स्थिति में परिजन है। दूसरी ओर तमाम शासकीय व्यवस्था के बाद भी शासकीय चिकित्सलयों में पाॅजिटिव मरीज को भर्ती करना मुश्किल हो गया है। निजी चिकित्सालय गाईड-लाईन के विपरित राशि वसूलने से बाज नहीं आ रहे है।
कुल मिलाकर चिकित्सा सुविधा के अभाव में होम आइसोलेशन में रहने या धर पर ही मरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। मंत्रालय संचालनालय की तुलना में जिलों के स्वास्थ कर्मचारी, शिक्षक, लिपिक, पटवारी, ग्राम सहायक, आंगनबाड़ी, मितानिन, पुलिस प्रशासन के कर्मचारी कोरोना की संपूर्ण व्यवस्था में दो गुना काम कर जाॅन जोखिम में डाल रहे है।
ऐसी स्थिति में संध ने बढ़ते कोरोना संक्रमण को दृष्टिगत् रखते हुए विभागाध्यक्ष व मंत्रालय की भाॅति रोस्टर प्रणाली लागू करते हुए वर्क फ्राम होम व 50 प्रतिशत् की उपस्थिति सुनिश्चित करने, तथा स्वास्थ कर्मचारियों के अवकाश पर लगाए गए प्रतिबंध को तत्काल हटाया जाकर, उनसे प्रेम स्नेह, सम्मान व विश्वास के साथ मानवीय संवेदनाओं व सहानुभूति रखते हुए कोरोना का जोखिम कार्य संपादित कराये जाने की मांग संध के प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष अजय तिवारी, महामंत्री उमेश मुदलियार, संभागीय अध्यक्ष संजय शर्मा, पी.एच.ई. प्रांतीय संयोजक विमल चंद कुण्डू, संभागीय सचिव आलोक जाधव, प्रांतीय सचिव विश्वनाथ ध्रुव, सुरेन्द्र त्रिपाठी, रामचंद ताण्डी, महासमुंद अध्यक्ष ओम नारायण शर्मा, संरक्षक प्रमोद तिवारी, जी.एस.यादव, एम.पी.आड़े, जिला कोषाध्यक्ष जवाहर यादव, मनोहर लोचनम्, दिनेश मिश्रा, टार्जन गुप्ता, बजरंग मिश्रा आदि नेताओं ने मुख्यमंत्री भूपेश बधेल से की हैै।



