अदानी अम्बानी के उत्पादों के बहिष्कार का आव्हान रिलायंस पेट्रोल पंप पर हुए इस तरह हुआ विरोध प्रदर्शन

रायपुर(खबर वारियर)- किसानों के देशव्यापी आंदोलन और आज बहुत हुई प्रधानमंत्री के मन की बात अब सुनो किसानों की बात के नारे के साथ किसान आंदोलन के कार्पोरेट विरोधी दिवस के आव्हान पर माकपा, सीटू व ट्रेड यूनियन व अन्य जनसंगठनों ने देवपुरी स्थित रिलायंस पेट्रोल पंप पर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन कर अदानी, अम्बानी के उत्पादों व सेवाओं का आम जनता से बहिष्कार की अपील की ।
यहां प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सीटू के राज्य अध्यक्ष बी सान्याल, माकपा राज्य सचिव मण्डल सदस्य धर्मराज महापात्र, जिला सचिव प्रदीप गभ्नें, तृतीय वर्ग शस कर्म संघ के अध्यक्ष राकेश साहू, एस सी भट्टाचार्य, सुरेन्द्र शर्मा, नवीन गुप्ता ने प्रधानमंत्री के किसानों की मदद के दावों की निन्दा की। जो प्रधानमंत्री किसानों को बरबाद करे और कारपोरेट व विदेशी कम्पनियों की मदद करे, फिर भी अपने मुंह मिया मिटठू बने, देश के लिए शर्मनाक है।*
नेताओं ने कहा कि 3 खेत कानून व बिजली बिल 2020 की वापसी किसानो की पहली व सबसे अग्रिम मांग है – शेष मांगें बाद में।
– प्रधानमंत्री बेतुके दावे कर अंजान लोगों को गोलबंद कर रहे हैं और किसानों की न्यायोचित मांग पर जनता के बीच संदेह फैला रहे हैं।
– भारत सरकार ने खेती में निजी निवेशकों की मदद के लिए 1 लाख करोड़ रुपये आवंटित किये हैं खुद निवेश करने को राजी नहीं हैं।
– पीएम किसान किसानो को मात्र रु0 16.32 का तुत्छ सहयोग है; फसल बीमा ने कम्पनियों की आय 10 हजार करोड़ प्रतिवर्ष से बढ़ाई; ओडीएफ में बने 90 फीसदी शौचालय गैर कार्यात्मक; 95 फीसदी बैंक खाता ज्यादातर शून्य बैलेन्स; रसोई गैस पर अब ज्यादातर सब्सिडी गायब; मनरेगा, आवास में थोक के भाव गबन हो रहा है ।
नेताओं ने कहा कि देश भर ने ‘धिक्कार दिवस’ मनाया गया। 2 लाख किसान एक माह से दिल्ली की सीमा पर ठंड में और सरकार बेपरवाह है । इसलिए अम्बानी, अडानी के उत्पादों व सेवाओं के खिलाफ कारपोरेट विरोधी अभियान तेज किए गए है, आज का प्रदर्शन उसी की कड़ी है , आज देश भर में थाली पीटी गई है ।
किसानों की 3 कानून व बिजली बिल वापसी की मांग पर मुंह मोड़ने के साथ-साथ भारत सरकार ने निजी निवेशकों द्वारा खेती में पैसा लगाने में सहयोग करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये आवंटित किया है, जबकि किसानों की मांग थी कि सरकार खुद सिंचाई, मशीनों की आपूर्ति, मंडियों में सुधार, लागत की सब्सिडी, एमएसपी व खरीद आदि में निवेश करे।
नेताओं ने कहा कि किसान आंदोलन ने दोहराया है कि उसकी सबसे पहली व अग्रिम मांग 3 खेती के कानून व बिजली बिल 2020 की वापसी है और हर अन्य मांग इसके बाद है। देश के किसान एआईकेएससीसी के नेतृत्व में कई सालों से सी 2.5 फीसदी के हर फसल के एमएसपी और हर किसान से खरीद तथा सभी किसानों, खेत मजदूरों, आदिवासियों की कर्जमाफी के लिए लड़ते रहे हैं। पर इन्हें हल करने के लिए मोदी सरकार 3 अध्यादेश और बिजली बिल 2020 को लेकर आई जिससे सभी वर्तमान सुविधाएं व सुरक्षाएं समाप्त हो जाएंगी और एक कानूनी ढांचा कारपोरेट व विदेशी कम्पनियों के मुनाफे का बनेगा।
इससे खेती की प्रक्रिया, लागत की बिक्री, मशीनरी, फसल की खरीद, भंडारण, परिवहन, प्रसंस्करण और खाने की बिक्री पर उनका कब्जा हो जाएगा। इससे किसानों पर कर्ज बढ़ेगा, आत्महत्याएं बढ़ेंगी, फसलें सस्ती होंगी, खाना मंहगा होगा और जमाखोरी व कालाबाजारी बढ़ेगी।
तथ्य दिखाते हैं कि मोदी का गुजरात का किसानों के लिए विकास माॅडल पूरी तरह विफल रहा है। 2001 से 2011 के बीच एनएसएस रिपोर्ट के अनुसार 3.55 लाख जमीन वाले किसान गायब हो गये और 17 लाख कृषि मजदूर बढ़ गये। अध्ययन बताते हैं कि ये कारपोरेट खेती जो निर्यात के लिए कराई गयी, उसके कारण हुआ। गुजारत आज भी सिंचाई के आभाव से त्रस्त है जबकि नर्मदा बांध का पानी उद्योगों व साबरमती रीवर वाटर फ्रंट के लिए भेजा जा रहा है। गुजरात के 9 किसानों पर पेप्सिकों कम्पनी ने उनका पेटेंट वाला बीज इस्तेमाल करने के लिए उन पर 1 करोड़ रुपये का दावा ठोक दिया।
प्रधानमंत्री व उनके मंत्री बार-बार बेतुका दावा कर रहे हैं कि किसान अपनी फसल कहीं भी बेच सकते हैं, किसी भी दाम पर बेच सकते हैं, कम्पनियां उन्हें बेहतर दाम देंगी। यह केवल सीधे व अंजान लोगों को गुमराह करने और किसानों की मांग के प्रति दुर्भावना फैलाने के लिए है। कम्पनियां केवल मुनाफे के लिए निवेश करती हैं और किसान स्थानीय बाजार में ही फसल बेच सकता है।
इस प्रदर्शन में बी सान्याल, धर्मराज महापात्र,राकेश साहू, एस सी भट्टाचार्य, प्रदीप ग्भ्ने, सामाजिक कार्यकर्ता हरजीत जुनेजा, डाक्टर राजेश अवस्थी, सुरेन्द्र शर्मा, अजय जन्नोजे, मनोज देवांगन, नवीन गुप्ता, प्रदीप मिश्रा, के के साहू, अनुसूया ठाकुर, वासुदेव शुक्ल, समीर मोघे, शाहिद रजा, मोहम्मद रब्बानी, ए आर खान, सुधाकर दिघे, मनोहर साहू , मयंक लौत्रे, राजेश बाघ, दुलाल मजूमदार आदि साथी प्रमुख रूप से शामिल थे । सभी ने किसान आंदोलन के साथ एकजुटता में जब तक यह लड़ाई जारी रहेगी ऐसे प्रदर्शन जारी रहने का ऐलान किया ।



