छत्तीसगढ़

किसानों के समर्थन में निकली मशाल रैली कल समर्थन में होगी ट्रेक्टर परेड

राजधानी (खबर वारियर)- देश के किसानों के आन्दोलन के साथ एकता का इजहार करते हुए केंद्र सरकार से किसान विरोधी काले कानून व मजदूर विरोधी श्रम संहिता वापस लेने की मांग को लेकर श्रमिक संगठनो, कला, साहित्य सहित विभिन्न संगठनों के कार्यकताओं ने आज मशाल रैली निकाली । सीटू के राज्य सचिव धर्मराज महापात्र ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इस रैली में सीटू, आर डी आई ई यू, एस एफ आई, जनवादी नौजवान सभा, इपटा, तृतीय वर्ग शास कर्म संघ सहित अन्य संगठनों के साथी शरीक हुए । कर्मचारी भवन से प्रारंभ हुई यह रैली कालीबाड़ी, मोतीबाग, छोटापारा, होते हुए सपरे स्कूल परिसर में समाप्त हुई ।

यहां विभिन्न संगठनों के नेताओं ने सभा को संबोधित करते हुए सरकार के कानून स्थगन के प्रस्ताव की निन्दा की और कहा सरकार की योजना खेती में बड़े कारपोरेट के कब्जे का बढ़ाते रहने और किसानों को जमीन से बेदखल करने की है।

वक्ताओं ने कहा कि सरकार का कानून सस्पेण्ड करने का प्रस्ताव और कृषि मंत्री का बयान कि कानून रद्द नहीं किये जाएंगे, किसानो की किसी भी समस्या को हल नहीं करेंगे। स्थगन का अर्थ एक ही है कि यह किसान इस बात को स्वीकार कर लें कि यह किसी भावी तिथि से लागू होंगे औश्र यह किसानों को नामंजूर है।

सरकार का प्रस्ताव एक कमेटी के गठन से जुड़ा हुआ है। इन कानूनों के स्थगन के साथ, इनका मूल आधार किसानों की गर्दन पर लगातार लटका रहेगा और कमेटी में चर्चा इनके सुधार तक ही सीमित रहेगी, जो सुधार न तो सम्भव है और न उनका काई मतलब है। वैसे भी कानून में सुधार को किसान नकार चुके हैं। हालांकि भारत सरकार का दावा है कि वार्ता के 11वें दौर में वह जो कुछ दे सकती थी, वह दे चुकी है, सच यह है कि कमेटी का प्रस्ताव उसने शुरू में ही दिया था और किसान उसे नकार चुके हैं।

इन कानूनों के उद्देश्य सरकार को आदेशित करते हैं कि वह कृषि उपज के बड़े व्यापारियों, निर्याताकों को और ठेका खेती को बढ़ावा देगी। सरकार ने पहले ही इन कम्पनियों को बढ़ावा देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये आवंटित कर दिये हैं और इसका सीधा अर्थ है कि सरकारी सब्सिडी, खरीद और एमएसपी को निरुत्साहित किया जाएगा। इससे किसानों की कर्जदारी, आत्महत्याएं और जमीन से बदेखली बढ़ेगी। भाजपा सरकार भारतीय और विदेशी बड़ी कम्पनियों को बढ़ावा दे रही है। उसकी योजना साम्राज्यवाद परस्त है और इससे किसानों और भारतीय बाजारों के विकास को नुकसान होगा।

यह कानून सरकारी खरीद घटा देंगे, राशन व्यवस्था समाप्त कर देंगे, खाने की जमाखोरी बढ़ा देंगे और 75 करोड़ गरीब लोगों को कम्पनियों के नियंत्रण वाले बाजार पर खाने के लिए निर्भर बना देंगे। भूख, कुपोषण और भुखमरी बढ़ेगी।

मशाल रैली में एम् के नंदी, धर्मराज महापात्र, एस सी भट्टाचार्य, राकेश साहू, सुरेन्द्र शर्मा, वी एस बघेल, प्रदीप मिश्रा, प्रदीप गभने, सुखी राम धरितलहरे, अंजना बाबर, के के साहू, वासुदेव शुक्ला, चन्द्रशेखर तिवारी, राजेश अवस्थी, अरुण काठोटे, निसार अली, फादर सेबेस्टियन, मारुति डोंगरे, कैलाश सेंदरे, के जनघेल सहित अनेक साथी शामिल हुए ।

महापात्र ने बताया कि 26 जनवरी को देश के किसान गणतंत्र दिवस पर जब दिल्ली में ट्रेक्टर परेड निकलेंगे तो उनके साथ संविधान और देश बचाने रायपुर में भी ट्रेक्टर परेड निकलेंगे ।

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