छत्तीसगढ़

स्वतंत्र भारत में आज भी अंग्रेजियत कानून लागू- विजय झा

बंदर के हाथ में उस्तरा साबित हो रहा है पदोन्नति -तृतीय चतुर्थ वर्ग कर्मचारी हो रहे हैं वंचित  (गोपनीय चरित्रावली, संपत्ति विवरण, ईमानदारी प्रमाणपत्र के कारण अफसरशाही हावी है) 

रायपुर(khabar warrior)- छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संध ने सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा पदोन्नति हेतु 15 जनवरी को जारी निर्देश में पूर्व में जारी निर्देशों का उल्लेख करते हुए प्रदेश में शासकीय सेवकों के लिए प्रति वर्ष रिक्त पदों के आधार पर वर्ष में एक बार पदोन्नति समिति की बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए गए है।

किंतु यह निर्देश तृतीय व चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए कागजी साबित हो रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों को पदोन्नति शीध्र हो जाती है। किंतु तृतीय व चतुर्थ वर्ग कर्मचारी प्रदेश में एक ही पद पर नियुक्त होने व सेवानिवृत्त व मृत होने के लिए आज भी मजबूर है। इसका प्रमुख कारण आज भी स्वतंत्र भारत में अंग्रेजित कानून लागू होने के कारण कर्मचारी पदोन्नति को दिवास्वप्न समझते है।

संध के प्रदेशाध्यक्ष विजय कुमार झा जिला शाखा अध्यक्ष इदरीश खाॅन ने बताया है कि कर्मचारी संगठन वर्षो से अंग्रेज शासन काल में राजा महाराजाओं द्वारा अपने सेवकों के चरित्रावली अंकित करने की प्रथा को समाप्त करने की मांग करते रहा है किंतु यह गुलामी की व्यवस्था आज भी कायम है। प्रतिवर्ष पदोन्नति समिति की बैठक कम से कम रिक्त पदों की पूर्ति हेतु एक बार होनी चाहिए। किंतु इसके पूर्व 04 माह का समय केवल वरिष्ठता सूची के प्रकाशन में लग जाता है। शिक्षा विभाग में पूरे प्रदेश में वरिष्ठता सूची में व्यापक त्रुटियां होने की शिकायतें प्राप्त हो रही है। अब ऐसी स्थिति में सभी कर्मचारियों को वरिष्ठता सूची अवलोकनार्थ उपलब्ध कराने व उसकी त्रुटियों पर दावा आपत्ति करने, फिर दावा आपत्ति का निराकरण करने के बाद अंतिम प्रकाशन होने के बाद ही रिक्त पदों की जानकारी संकलित कर, पदोन्नति समिति की बैठक संभव हो पाता है।

फिर यदि किसी अधिकारी ने गोपनीय चरित्रावली अंकित नहीं किया है, तो उसके पिछलग्गू बनकर उनसे चरित्रावली मतांकन कराना भी टेढ़ी खीर है। राज्य शासन ने कभी गोपनीय चरित्रावली अंकित न करने वाले अधिकारी के विरूद्व कोई कार्यवाही नहीं की। अन्यथा स्थानातरण होने पर बिना चरित्रावली मतांकन के भारमुक्त न किए जाने की व्यवस्था होने से अधिकारी गंभीरता से पालन करते। गोपनीय चरित्रावली प्रारूप में सनिष्ठता संबंध टीप अंकित करने की व्यवस्था है। किंतु अधिकारी पृथक से संनिष्ठता प्रमाण पत्र मांगते है। जिसमें कोई विभागीय जाॅच, दण्ड, अथवा अपराधिक प्रकरण विचाराधीन होने का लेख होता है।

ऐसा होने गोपनीय चरित्रावली में विपरित टीप अंकित होगा फिर दोबारा संनिष्ठता का क्या औचित्य है।

तृतीय चतुर्थ वर्ग कर्मचारी, शिक्षक,से 25-30 वर्ष कार्य करने के बाद ईमानदारी का प्रमाणपत्र भी पदोन्नति के लिए चाहा जाता है। इसके बाद 5 वर्षो का अचल-संपत्ति का विवरण भी अधिकारियों की पदोन्नति की भाॅति मांगा जाने लगा है। सामान्य प्रशासन विभाग के पदोन्नति संबंधी उपरोक्त निर्देशों से कर्मचारी पदोन्नति से वंचित रहते है। संध के कार्यकारी अध्यक्ष अजय तिवारी, महामंत्री उमेश मुदलियार, संभागीय अध्यक्ष संजय शर्मा, प्रांतीय संयोजक पीएचई. विमल चंद्र कुण्डू, प्रांतीय सचिव अमर मुदलियार, नरेश वाढ़ेर, प्रांतीय उपाध्यक्ष विश्वनाथ ध्रुव, सुरेन्द्र त्रिपाठी, रामचंद्र ताण्डी, सी.एल.दुबे, ज्ञानेश झा आदि नेताओं ने मुख्य सचिव से मांग की है कि दो-चार बड़े विभागों के पदोन्नति की नस्तियों को अवलोकनार्थ बुलाकर पदोन्नति के नाम कर्मचारियों के सम्मान् के साथ क्या खिलवाड़ होता है,उसका स्वयं अवलोकन करें।

ताकि सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देश जमीनी स्तर पर प्रभावी व कर्मचारी हित में लाभकारी हो। अफसरशाही के कारण पदोन्नति के अनेक प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय में प्रस्तुत किए जाते है। अनेक अवमानना प्रकरण भी प्रस्तुत हुए है। उसकी वसूली भी संबंधित अधिकारियों की जावें ताकि पदोन्नति के नाम पर कर्मचारियों का उपहास बंद हो सके तथा गोपनीय चरित्रावली अंकित करने की अंग्रेजों की प्रथा को समाप्त किया जा सके।

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