कोरोना काल, लाॅक डाउन, के दौरान हजारों कर्मचारी वेतन से वंचित, कर्मचारी नाराज, जानिए वजह

रायपुर(khabar warrior)- छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संध कलेक्टोरेट, सिविल कोर्ट, राजभवन, पुलिस विभाग सहित अनेक विभागों के अधिकारी कर्मचारियों के वेतन भुगतान न होने से बैंकों की मनमानी व आहरण संवितरण अधिकारियों के लापरवाही के कारण बैंकों के मर्जर होने, बैंक का आई.एफ.एस.सी. कोड न बदलने के कारण हजारों कर्मचारियों का वेतन भारतीय स्टैट बैंक में जाम हो गया है।
राजधानी में लाॅक डान 10 दिनों तक लगाया गया है, जिसमें बैंक कोषालय भी बंद रहेगें। कोरोना डयूटी करने वाले फ्रंट लाइन के अधिकारी कर्मचारी बिना वेतन तथा बाजार बंद होने से परिवार की व्ययवस्था करें या कोरोना डयूटीकरें धर्म संकट में पड़ गए है। संध ने मुख्यमंत्री भूपेश बधेल से कोरोना डयूटी करने वालों को तत्काल वेतन भुगतान कराने की मांग की है।
संध के प्रांतीय अध्यक्ष विजय कुमार झा एवं जिला शाखा अध्यक्ष इदरीश खाॅन ने बताया है कि गत् माह भी 18-19 मार्च को वेतन का भुगतान हुआ था। इस माह भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 10 बैंकों का संविलयन कर 4 बैंकों में समाहित करने के कारण बैंकों की स्थिति बद्त्तर होने व कर्मचारी एवं आम जनता को परेशान करने की इस नीति का अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संयुक्त महासंध के आव्हान पर निरंतर बैंकों के मर्जर के विरोध में आंदोलन किया जा रहा है।
फिर भी प्रधानमंत्री व वित्त मंत्री के अडियल रवैये के कारण बैंकों की दुर्दशा हो गई है। रायपुर राजधानी स्थित कलेक्टोरेट ब्रांच के ओंरिएंटल बैंक तथा यूनाइटेड बैंक का मर्जर पंजाब नेशनल बैंक में किया गया है। मर्जर के कारण 31 मार्च के पूर्व समस्त जारी किए गए चेक बैंकों ने वापस जमा करा लिया है। नए चेक बुक व लूज चैंक भी देना बंदहो गया है। कोषालय से वेतन देयक स्वीकृत होने के बाद आॅन लाइन भारतीय स्टैट बैंक में वेतन हस्तांतरित हो जाता है। उसके बाद एसबीआई ओरिंएटल बैंक में कर्मचारियों अधिकारियों की सूची अनुसार धनादेश जारी करता है तब शासकीय सेवकों के खाते में वेतन जमा होता है।
गत् माह तक बिना आई.एफ.एस.सी. कोड के वेतन कर्मचारियों के खाते में जमा होता रहा है। नए वित्तीय वर्ष 01 अप्रैल 2021-22 से औंरिएटल बैंक का अस्तित्व समाप्त हो जाने के कारण जब तक पंजाब नेंशनल बैंेक का देयकों में कोड अंकित नहीं किया जावेगा, तब तक वेतन भुगतान संभव नहीं है। अब 19 अप्रैल तक लाॅक डाउन के कारण नवरात्रि के बाद वेतन भुगतान होगा। अब इसकी और जटिल प्रक्रिया होगी या तो आहरण संवितरण अधिकारियों द्वारा जमा किये गए देयक वापस किए जावेगें और पुनः देयक तैयार कर कोषालय जमा किया जावेगा। जिनका कोषालय ने देयक स्वीकृत कर दिया है, उनके वेतन की राशि का एस.बी.आई. बैंकर्स चेक डी.डी.ओ. को जारी करेगा तब वेतन भुगतान संभव होगा। इस प्रकार न नौ मन तेल होगी और न राधा नाचेगी।
संध ने आरोप लगाया है कि बड़े अधिकारी अपना वेतन प्राप्त कर लेते है और अधिनस्थ तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों को हर माह वेतन से वंचित करते है। संध के महामंत्री उमेश मुदलियार, प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष अजय तिवारी, संभागीय अध्यक्ष संजय शर्मा, प्रांतीय सचिव विश्वनाथ ध्रुव, विमल चंद्र कुण्डू, सुरेन्द्र त्रिपाठी, रविराज पिल्ले, वाहन चालक संध सचिव संतोष धनगर, टार्जन गुप्ता, बजरंग मिश्रा, प्रमोद पाण्डेय, दिनेश मिश्रा, प्रदीप उपाध्याय, सतीश शर्मा, प्रमोद हेड़ाउ, नीलकंठ साहू, भजन बाध, पवन धनगर,
राजकुमार देशलहरे, दिनेश साहू, मुरलीधर शर्मा, निर्मल कुमार नाग आदि नेताओं ने 24 धण्टे में वेतन भुगतान की व्यवस्था करने की मांग मुख्यमंत्री भूपेश बधेल से लाॅक डाउन में जैसे आम नागरिकों, बैंकों, एल.आई.सी. को क्लोजिंग के लिए ई-पासजारी कर रहे हैे, उसी प्रकार एस.बी.आई., कोषालय व पंजाब नेशनल बैंक के कर्मचारियों को ई-पास जारी कर बुलाया जावे एवं तत्काल वेतन भुगतान करने की व्यवस्था करें अन्यथा कोरोना डयूटी पर विपरित प्रभाव पड़ेगा। क्योंकि वेतन के अभाव में लाॅकडाउन हेतु जीवनोपयोगी सामग्री क्रय करने में असमर्थ रहे है।



