छत्तीसगढ़

मंत्री परिषद की बैठक में मंत्रियों के वेतन-भत्ते बढ़े, कर्मचारियों के महंगाई भत्ता पर कोई निर्णय नहीं, ट्रांसफर नीति पर मंत्रीमंडलीय उप समिति लेंगे फैसला :

रायपुर (खबर वारियर) मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज 14 जुलाई को उनके निवास कार्यालय में मंत्रिपरिषद की बैठक हुई, जिसमें निम्नानुसार महत्पूर्ण निर्णय लिए गए:

1. राज्य में प्रचलित मछली नीति के स्थान पर नई मछली पालन नीति लागू करने के प्रस्ताव अनुमोदन किया गया।

2. प्रदेश में स्वीकृत सहायक आरक्षकों के पदों को समाप्त कर डिस्ट्रिक्ट स्ट्राईक फोर्स संवर्ग के सृजन की स्वीकृत के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इससे पुलिस विभाग के सहायक आरक्षकों के वेतन संबंधी विसंगति को दूर होगी और प्रदेश के समस्त सहायक आरक्षकों को नियमित वेतनमान प्राप्त होगा।

3. स्थानांतरण नीति 2022 के परिपेक्ष्य में यह निर्णय लिया गया कि इस संबंध में मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन किया जाएगा, जिसके सुझाव/अनुशंसा के आधार पर माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त किया जाएगा।

4. प्रथम अनुपूरक अनुमान वर्ष 2022-2023 का विधान सभा में उपस्थापन बाबत् छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक, 2022 के प्ररूप का अनुमोदन किया गया।

5. विधान सभा के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष एवं सदस्यों के वेतन एवं भत्तों संशोधन विधेयक 2022 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।

6. छत्तीसगढ़ मंत्री (वेतन तथा भत्ता) अधिनियम, 1972 में संशोधन विधेयक, 2022 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।

7. मुख्यमंत्री के स्वेच्छानुदान मद में प्रावधानित वार्षिक राशि 40 करोड रूपए की सीमा को बढ़ाकर 70 करोड़ रूपए किए जाने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।

8. क्षेत्र संयोजक से मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत के पद पर पदोन्नति हेतु न्यूनतम कालावधि 05 वर्ष में 06 माह की छूट प्रदान करने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।

9. वर्ष 2022-23 के लिये आबकारी राजस्व लक्ष्य एवं गौठान के विकास तथा अन्य विकास गतिविधियों के लिये अतिरिक्त राशि की आवश्यकता की प्रतिपूर्ति हेतु ‘‘अतिरिक्त आबकारी शुल्क‘‘ में वृद्धि किए जाने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।

10. विघटित परिवहन निगम के अधिकारियों/कर्मचारियों की असामयिक मृत्यु होने पर आश्रित परिवार के सदस्य को अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान करने की प्रक्रिया में आवश्यक संशोधन किया गया।

11. छत्तीसगढ़ भू-जल (प्रबंधन और विनियमन) विधेयक-2022, के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।

12. छत्तीसगढ़ राज्य गठन के पूर्व एवं पश्चात् मोटरयानों पर बकाया कर के एकमुश्त निपटान योजना-2020 की मियाद अवधि एक अप्रैल 2022 से माह मार्च 2023 तक बढ़ाने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।

13. अपै्रल 2020 से मार्च 2022 कुल 24 माह का सिटी बसों पर बकाया रोड टैक्स की राशि 99.95 लाख को छूट प्रदान करने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।

14. औद्योगिक एवं आर्थिक मंदी के दुष्प्रभाव के कारण एचव्ही-4 श्रेणी के स्टील उद्योग अंतर्गत स्टेंड एलोन रोलिंग मिल को प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए राज्य शासन द्वारा विशेष राहत पैकेज अंतर्गत ऊर्जा प्रभार में 01 जुलाई 2022 से 31 मार्च 2023 तक छूट दिए जाने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।

15. छत्तीसगढ़ विद्युत शुल्क अधिनियम, 1949 में संशोधन विधेयक के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।

फेडरेशन ने जताया रोष : 25 से 29 जुलाई तक   हड़ताल

छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने आज 14 जुलाई को छत्तीसगढ़ शासन के मंत्री परिषद की बैठक के निर्णय को लेकर कहा है कि  कर्मचारियों के संबंध में निर्णय  शून्य बटा सन्नाटा रहा, वही मंत्री परिषद ने विधायकों के वेतन वृद्धि को ध्वनि मत से पारित कर दिया है। स्थानांतरण नीति पर प्रतिबंध हटाने के बदले मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन टालमटोल का परिचायक है। ऐसी स्थिति में छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर 25 से 29 जुलाई को प्रस्तावित हड़ताल पर कर्मचारी अडिग रहते हुए सभी जिलों में इसकी व्यापक तैयारी कर रहे हैं।

संघ के प्रांतीय संरक्षक विजय कुमार झा एवं प्रांतीय अध्यक्ष अजय तिवारी ने संयुक्त विज्ञप्ति में बताया है कि आज की मंत्रिपरिषद की बैठक में भी कर्मचारियों के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है। कर्मचारियों द्वारा केंद्रीय कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता एवं सातवें वेतनमान में केंद्रीय कर्मचारियों के समान गृह भाड़ा भत्ता की मांग के लिए प्रस्तावित पांच दिवसीय सामूहिक अवकाश आंदोलन को सरकार उपेक्षा पूर्ण नीति से देख रही है, और उसे हल्के में लेकर कोई चर्चा नहीं किया गया। ऐसी स्थिति में ऐतिहासिक आंदोलन की तैयारी जिला तहसील विकास खंडों में जारी है।

13 जुलाई को बिलासपुर संभाग की बैठक संयोजक कमल वर्मा की अध्यक्षता में बिलासपुर कर्मचारी भवन में संपन्न हुई,जिसमें बिलासपुर संभाग में आंदोलन की तैयारी की समीक्षा की गई।

भूपेश बघेल सरकार के गठन के बाद साडे 3 वर्षों में स्थानांतरण नीति पर प्रतिबंध नहीं हटाया गया है, लगातार कर्मचारी संगठनों की मांग करोना से पीड़ित परिवारों की वेदना के बाद पति पत्नी एवं वृद्ध माता-पिता के साथ रहने की अपेक्षा रखते हुए स्थानांतरण नीति पर चुनाव पूर्व प्रतिबंध हटाने की अपेक्षा कर्मचारियों ने की थी। किंतु उसे टालमटोल करते हुए मंत्रिमंडलीय उप समिति के गठन का निर्णय लिया गया है ।

स्पष्ट है मंत्रिमंडल उपसमिति में कम से कम तीन मंत्री समिति के सदस्य होंगे। सामान्य तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग कर्मचारी इन मंत्रियों तक अपने आवेदन प्रस्तुत करने स्थानांतरण कराने में पहुंच विहिन रहेंगे। इसका परिणाम मंत्रियों के निजी सचिव का हस्तक्षेप होगा। जो पूर्ववर्ती सरकार में तबादला उद्योग का आरोप वर्तमान सरकार ने आरोपित किया था।

सामान्यता स्थानांतरण मई-जून में किया जाता है ताकि बच्चों के पढ़ाई स्कूल में प्रवेश आदि पर परेशानी ना हो। अब कब मंत्रिमंडलीय उप समिति स्थानांतरण नीति तैयार करेगी तब तक बच्चों का प्रवेश पढ़ाई प्रारंभ हो जाएगा। ऐसी स्थिति में स्थानांतरण से शासकीय सेवक को स्वयं परेशानी के साथ बच्चों के अध्ययन अध्यापन में अवरोध उत्पन्न होगा।

संघ के महामंत्री उमेश मुदलियार संभागीय अध्यक्ष संजय शर्मा जिला शाखा अध्यक्ष रामचंद्र टांडी कौशल अग्रवाल विमल चंद कुंडू श्रीमती अरुंधति परिहार, सुनील जरौलिया विजय कुमार डागा प्रदीप उपाध्याय आदि नेताओं ने कर्मचारियों के हित में कोई निर्णय ना होने से सरकार द्वारा छले जाने का आरोप लगाते हुए कर्मचारियों से चट्टानी एकता का परिचय देते हुए 25 से 29 जुलाई के प्रस्तावित आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है।

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