
रायपुर ( खबर वारियर) भाजपा ने छत्तीसगढ़ के सीएम की घोषणा 10 दिसंबर को की है ,इस दिन छत्तीसगढ़ के एक बड़े आदिवासी क्रांतिकारी की पुण्य तिथि है। माना जा रहा है कि इसलिए इस दिन का चुनाव किया गया, आखिर भाजपा ने पहले विष्णुदेव साय को पहले विश्व आदिवासी दिवस पर प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया फिर अब वीरनारायण सिंह की पुण्य तिथि पर मुख्यमंत्री पद पर बैठाया है, तो क्या इसे महज संयोग माने या प्रयोग!
पहले विश्व आदिवासी दिवस पर प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया अब शहीद वीर नारायण सिंह की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री के रूप में शीर्ष पद से नवाजा
पिछले साल 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के दिन विष्णुदेव साय को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया गया था,तब कांग्रेस ने बीजेपी को आदिवासी विरोधी बताया था। अब छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह की पुण्यतिथि पर बीजेपी ने विष्णुदेव साय को छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री बनाकर एकतरह से कांग्रेस को जवाब दिया है।

छत्तीसगढ़ में बीजेपी के पहले आदिवासी (जनजातीय) मुख्यमंत्री साय
छत्तीसगढ़ ट्राइबल स्टेट है. राज्य में 32 प्रतिशत आदिवासी ( जनजातीय )समाज की है। विधानसभा में भी 29 सीट इस वर्ग के लिए आरक्षित है।राज्य के विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने के लिए राजनीतिक पार्टियों को आदिवासियों का भरोसा जितना जरूरी होता है ऐसे में बीजेपी ने छत्तीसगढ़ का पहला आदिवासी मुख्यमंत्री बनाया है,इससे पहले साल 2000 में राज्य गठन के बाद कांग्रेस ने अजीत जोगी को मुख्यमंत्री बनाया था. जिनको आदिवासी माना जाता है. लेकिन इनके जाति प्रमाण पत्र को लेकर कोर्ट में सुनवाई चल रही है. इस लिहाज से विष्णुदेव साय राज्य के पहले आधिकारिक आदिवासी मुख्यमंत्री हैं।
बीजेपी ने विष्णु देव साय को इस दिन क्यों चुना छत्तीसगढ़ का सीएम, जानिए- क्यों खास है 10 दिसंबर की तारीख?
छत्तीसगढ़ के सीएम चुने जाने के बाद विष्णु देव साय का राजभवन में कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद सबसे पहले रायपुर के जय स्तंभ चौक पहुंचना बहुत खास है ।
दरअसल छत्तीसगढ़ की धरती में सबसे बड़े आदिवासी क्रांतिकारी शहीद वीर नारायण सिंह की रविवार ( 10 दिसम्बर)को पुण्य तिथि थी,और इसी दिन यानी 10 दिसंबर 1857 को अंग्रेजों ने रायपुर के हृदय स्थल जय स्तंभ चौक पर नारायण सिंह को फांसी दे दी थी।इसलिए इस दिन पूरे प्रदेश में वीर नारायण सिंह के बगावत की कहानी को लोग याद करते हैं।
आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी वीर नारायण सिंह बलौदा बाजार जिले के सोनाखान इलाके के एक बड़े जमींदार हुआ करते थे,नारायण सिंह बिंझवार की कहानी काफी दिलचस्प है। जिस समय यह क्रांति हुई उसी समय अंग्रेजी सेना छत्तीसगढ़ में अपना कब्जा जमाना चाहती थी और तब नारायण सिंह ने खुद की फौज बनाकर अंग्रेजो के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।
कांग्रेस आदिवासियों को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती है- साय
विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री बनते ही शहीद वीर नारायण सिंह की फांसी वाली जगह पर पहुंचकर उनकी मूर्ति की पूजा की । उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि आज शहीद वीर नारायण सिंह की पुण्यतिथि है इसलिए उन्हें श्रद्धांजलि देने आए हैं।बीजेपी वास्तव में आदिवासी कौम की चिंता करती है, वहीं कांग्रेस इन्हें हमेशा सिर्फ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है। बीजेपी ने आदिवासियों के कल्याण के लिए अलग मंत्रालय का गठन भी किया है।



