सीमाबंधन शिथिलीकरण- आदेश जारी करते समय नियमों का हो स्पष्ट उल्लेख

शिक्षक एल.बी. हेतु टीईटी. अनिवार्यता हो समाप्त- आरक्षण न हो लागू
बड़ी संख्या में दिवंगत् शिक्षकों के आश्रित लिपिक- भृत्य बनने होंगे मजबूर
रायपुर(khabar warrior)- छत्तीसगढ़ राज्य के यशस्वी मुख्मंत्री व उनके मंत्रिपरिषद् ने तृतीय श्रेणी के पदों पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए विभागों में स्वीकृत तृतीय श्रेणी संवर्ग के स्वीकृत पद से 10 प्रतिशत् से अधिक पदों पर अनुकंपा नियुक्ति पर लगे प्रतिबंध को 31 मई 2022 तक के लिए शिथिल किए जाने का निर्णय लिया है। मंत्रिपरिषद् के निर्णय के परिप्रेक्ष्य में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आदेश प्रसारित किया जाना है।
आदेश जारी करने के पूर्व अधिनियम के विपरित आदेश में उल्लेखित किए गए अंश को विलोपित कर, अनुसूचित जाति, जनताति, अन्य पिछड़ा वर्ग अधिनियम 1994 की धारा 3 (2) के अनुपालन में अनुकंपा नियुक्ति को आरक्षण से मुक्त रखा जाकर, भारत के अधिसूचित जनजाति क्षे़त्रों में सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्ति में शिक्षक प्रवेश परीक्षा (टीईटी) से बस्तर, सरगुजा संभाग की भाॅति मुक्त रखा जावे। अन्यथा दिवंगत् शिक्षक स्थानीय संस्था के आश्रित परिजन लिपिक अथवा चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति के लिए बाध्य होगें।
छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संध प्रांताध्यक्ष विजय कुमार झा एवं जिला शाखा अध्यक्ष इदरीश खाॅन ने बताया है कि प्रदेश में तृतीय श्रेणी के अनुकंपा नियुक्ति में 10 प्रतिशत् सीमाबंधन को आगामी एक वर्ष 31 मई 2022 तक शिथिल किए जाने से जहां एक ओर कर्मचारी संगठन उत्साहित है वहीं दिवंगत् कर्मचारी के आश्रितगण आशान्वित है। किंतु मंत्रिपरिषद् के निर्णय उपरांत सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा शिथिलीकरण के आदेश जारी करते समय कुछ विशिष्ठ बिन्दुओं को स्पष्ट करते हुए आदेश जारी करने की मांग संध ने करते हुए बताया है प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक साथी दिवंगत हुए है, उनमें भी 01 जुलाई 2018 से संविलियन हुए शिक्षक एल.बी.की संख्या बहुतायत है।
शिक्षा कर्मी के पद पर संविलियन होने के बाद आज भी पुरानी पेंशन की पात्रता इसलिए नहीं है क्योंकि वर्ष 2004 के बाद देश में पुरानी पेंशन बंद होकर एनपीएस. लागू है। इसी प्रकार सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्ति हेतु अर्हतादायी शैक्षणिक योग्यता में टीईटीे परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। जुलाई 2018 के ही निर्देश के तहत जो टी.ई.टी. उत्तीर्ण है उसकी मान्यता भी उत्तीर्ण दिनांक से 7 वर्ष तक ही है। स्पष्ट है दिवंगत शिक्षक के आश्रित टीईटी उत्तीर्ण नहीं होगें ऐसी स्थिति में योग्यतानुसार तृतीय श्रेणी अथवा चतुर्थ श्रेणी में ही अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता होगी।
चूंकि भारत सरकार द्वारा अधिसूचित जनजाति क्षेत्रों यथा बस्तर व सरगुजा संभाग में सहायक शिक्षक के पद के लिए टीईटी उत्तीर्ण होने से छूट है, यदि वहीं छूट पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाता है तो दिवंगत शिक्षक के आश्रितों के शिक्षक के पद पर पात्रता बन सकती है। इसी प्रकार दिवंगत कर्मचाारियों के आश्रित पूर्व में जारी सामान्य प्रशासन विभाग में अनुकंपाा नियुक्ति के पदों पर पर आरक्षण व्यवस्था की शर्त स्वेच्छा से शामिल कर दिया है, वास्तव में अधिनियम 1994 की धारा 3 (2) में अनुकंपा नियुक्ति में आरक्षण लागू न करने का स्पष्ट निर्देश के बाद भी अधिनियम के मंशा के विपरित उक्त शर्त समाहित कर संवर्ग के पद अंकित है।
इसका लाभ लेकर अधिकारी आश्रित परिजनों को दिग्भ्रमित करते है। लिपिक के पद पूर्व में दो वर्ष शिथिलीकरण के दौरान नियुक्त तृतीय श्रेणी के लिपिकीय संवर्ग में न्यूनतम् शैक्षणिक योग्यता धारित करने के बाद भी यह शर्त शामिल किये जाने से कि कम्प्यूटर कौशल परीक्षा उत्तीर्ण होने के बाद ही वेतनवृद्वि की पात्रता होगी, इस शर्त के कारण अनेक लिपिक आज भी वेतन वृद्वि से वंचित है। अनुसूचित जाति, जनताति, अन्य पिछड़ा वर्ग अधिनियम 1994 की धारा 3 (2) के अनुपालन में कोताही बरतने व त्रुटि के लिए जिम्मेदार अधिकारी पर प्राथमिकी तक दर्ज करने का प्रावधान है।
इसलिए संध के प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष अजय तिवारी, महामंत्री उमेश मुदलियार, संभागीय अध्यक्ष संजय शर्मा, प्रांतीय सचिव विश्वनाथ ध्रुव, दिनेश मिश्रा, रविराज पिल्ले, आलोक जाधव, नरेश वाढ़ेर, जवाहर यादव, विमलं चंद्र कुण्डू, प्रमोद पाण्डेय, नीरज प्रताप सिंह, अश्वनी यादव, सुंदर यादव, सुरेन्द्र त्रिपाठी, ए.जे.नायक, डाॅ. अरूंधती परिहार, यादव, टार्जन गुप्ता, रविशंकर विश्व विद्यालय कर्मचारी संध के अध्यक्ष श्रवण सिंह ठाकुर, महासचिव प्रदीप मिश्रा आदि नेताओं ने आदेश में इन बिन्दुओं को स्पष्ट करने की मांग मुख्य सचिव से की है।



