
छत्तीसगढ़ के राज्यगीत “अरपा पैरी के धार..” के रचयिता, प्रख्यात कवि, साहित्यकार, विद्वान स्वर्गीय डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा की पुण्यतिथि पर उनको मेरा नमन 🙏🙏
होमेन्द्र देशमुख🖊️🖊️
छत्तीसगढ़ के भौगोलिक अस्मिता का गुणगान और उसकी तुलना छत्तीसगढ़ महतारी के नख-शिख वर्णन बड़े सुंदर और सुसंस्कृत शैली और शब्दों में करने वाले इस गीत को सुन कर आप गीतकार की छत्तीसगढ़ के प्रति मनोदशा को बहुत बेहतर समझ सकते हैं ।
राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जीवन-संगिनी के पिता ,व इस महान विभूति से कुछ और परिचय आपकी करा दूं ।
परिचय का यह पहलू अहम इसलिए है कि आज के चतुर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को संवेदनशील भूपेश बघेल बनाने में उनकी अर्धांगिनी और ससुर के रचनाधर्मी संस्कार का भी साया मिला ।
पांच भाइयों में एक डॉ नरेन्द्रदेव वर्मा के तीन भाई रामकृष्ण मिशन के विवेकानंद आश्रम के समर्पित सन्यासी हो गए थे
एक और भाई भी विवेकानंद के विचारों से ओतप्रोत उनके अपने जीवन का लक्ष्य बनाकर आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प ले एक दिन घर छोड़ गए । सम्पन्न किसान , रायपुर से कुछ ही दूर ,मांढर के पास बरबन्दा में शिक्षक धनीराम वर्मा के घर मे बचा एक मात्र पुत्र नरेंद्र देव पर परिवार की जिम्मेदारी आन पड़ी । और सन्यासी बन जाने के डर से उन्हें उम्र के अठारवें साल में विवाह-बंधन में बांधकर गृहस्थ बना दिया गया ।

स्वामी विवेकानंद के संस्कृति, मातृभूमि प्रेम का पूरे परिवार पर असर तो था ही , उसी संस्कार और देशप्रेम ने उन्हें छत्तीसगढ़ की माटी से प्रेम करने वाले ,रचनाधर्मी, लोककर्मी ,मंचीय प्रस्तोता विद्वान ,लेखक, ग़ज़लकार ,कवि, उपन्यासकार, समीक्षक डॉ नरेन्द्रदेव वर्मा ‘कातिल रायपुरी’ बना दिया ।
उनके लिखे इस प्रसिद्ध गीत “अरपा पैरी के धार” को आकाशवाणी रायपुर ने तत्कालीन छत्तीसगढ़ी गायिका और आज खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति ममता चन्द्राकर की सुरीली आवाज के साथ 80 के दशक में घर-घर पहुँचा दिया था । वह गीत आज हर छत्तीसगड़िहा के जुबान पर आत्मगौरव का मीठा रस केवल घोलती नही बल्कि , रस-धार बहा देती है ।
डॉ. नरेन्द्र देव वर्मा के जीवन का यह पक्ष लोककला से इस तरह जुड़ा था कि छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के यशस्वी और अमर प्रस्तोता स्व. महासिंह चंद्राकर के रात भर चलने वाले लोकनाट्य ‘सोनहा बिहान’ के वे प्रभावशाली कलाकार और सूत्रधार हुआ करते थे । हालांकि इस कार्यक्रम से उनके जुड़ने की बड़ी रोचक कहानी भी है वह आपको फिर कभी सुनाऊंगा । मंचीय प्रस्तुति में नरेंद्र देव का स्वर, श्रोताओं और दर्शकों को अपने सम्मोहन में बांध लेता था ।
2018 के राज्योत्सव में उनके इस गीत
” अरपा पैरी के धार …” को थीम-सांग बनाकर तत्कालीन सरकार ने भी अपना गौरव बढ़ाया था । छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 19 वीं वर्षगांठ पर 2019 में यहां की सरकार ने उनके इस अमरगीत को राज्य-गीत घोषित कर अपने स्वयं के साथ-साथ , उस विद्वान -कवि-लेखक- साहित्यकार को सही सम्मान दिया है ।
यह सम्मान , संयोगवश वर्तमान मुख्यमंत्री के ससुर होने के कारण या किसी पारिवारिक गठजोड़ का परिणाम नही ,बल्कि छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिगीत का सम्मान है ।
इन दिनों किसी भी देश के राष्ट्र-गीत के अलावा राज्यों के भी अपने गीत की परंपरा चल पड़ी है । मध्यप्रदेश में पत्रकार-लेखक महेश श्रीवास्तव ने भी सरकार के कहने पर मप्र-गान ‘मेरा मध्यप्रदेश’ तैयार किया जो कि सचमुच मध्यप्रदेश के गौरव और अस्मिता की प्रतिनिधि रचना कही जाती है । छत्तीसगढ़ राज्य ने भी इस रत्नगर्भा धरती के भौगोलिक और सांस्कृतिक गुणों के गान करने वाले इस गीत को यथोचित सम्मान देकर छत्तीसगढ़ महतारी के आरती करने का भी मौका दिया है ।
*रामाएन मोर गांव* नाम के लंबी कविता में उन्होंने , छत्तीसगढ़ के गांव और राम के वनवास स्थल की भूमि का बहुत सुंदर वर्णन किया है । महानदी, इन्द्रावती, पैरी, शिवनाथ, पैरी, अरपा, जोंक नदियों के साथ-साथ सिहावा के पर्वत , बस्तर के मुड़िया- माड़िया आदि , इन सबका मोहक और विस्तृत वर्णन भी है । उनके इस रचना में ह्रदय में छत्तीसगढ़ के प्रति अपार प्रेम का सागर लहराता है ।
1979 में इस हिंदी और छत्तीसगढ़ी के साहित्यकार, दार्शनिक, विचारक इस लोक को छोड़ गए ।
*40* साल की अल्पायु में जब उस रचना-स्वर-धर्मी की स्वयं की आवाज की गूंज जब अकस्मात बंद हुई , तो उन्हीं की ये पंक्ति आकाश व धरती पर जैसे गूँजने लगीं –
“दुनिया ह रेती के महाल रे, ओदर जाही ।
दुनिया अठवारी बजार रे, उसल जाही ।
आनी बानी के हावय खेलउना, खेलय जम्मो खेल ।
रकम रकम के बिंदिया फुंदरा, नून बिसा लव तेल ।
दुनिया ह धुंगिया के पहार रे, उझर जाही ।
दुनिया अठवारी बजार रे, उसल जाही ।”
आज बस इतना ही…
होमेन्द्र देशमुख
9425016515
(लेखक न्यूज़ चैनल में सीनियर वीडियो जर्नलिस्ट हैं)



