यदुवंशियों ने पूरी रात अपने शौर्य से परंपरा की फैलाई आभा

बिलासपुर(खबर वारियर)- जइसे मालिक लिए दिए, तइसे देबो आशीषर.., पूजा परत पुजेरी के संगी, धोवा चांउर चढ़ाए.., सब गोपियन के बीच बइठे, छेड़े प्रीति के तान.., तुलसी के चौरा अंगना, पीपर तरिया पार.., मोटर गाड़ी के धुवां, करय हाल बेहाल.., सदा भवानी दाहिनी, सन्मुख रहे गनेस हो, पांच देव रक्छा करंय..,एही जनम अउ जनम, फरे जनम जनम अहीर हो, चिखला कांदा मं गोड़, दूध मं भींजे सरीर हो.., राउत-राउत का कइथव संगी, राउत गाय चरइया रे, दुरपति के लाज रखइया, बंसीवाला कन्हइया रे… जैसे एक से बढ़कर एक दोहों के साथ यदुवंशियों ने मंगल आशीष और सामाजिक संदेश देते हुए पूरी रात गड़वाबाजा की धुन पर थिरकते रहे। वहीं योद्धा के जैसे लठ्ठ संचालन कर अपने शौर्य का प्रदर्शन किया।
इससे पूरी रात लोक कला की सतरंगी छटा बिखरती रही। शनिवार को लाल बहादुर शास्त्री स्कूल मैदान में 43वां रावत नाच महोत्सव हुआ। इसमें पूरी रात यदुवंशियों ने पारंपरिक वेशभूषा में सजकर अपनी प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया। इसमें अंचल ही नहीं प्रदेशभर के यदुवंशियों ने अपनी प्रस्तुति दी। पारंपरिक वाद्ययंत्र गड़वाबाजा की धुन पर थिरकते हुए सभी को आशीष देते रहे।
वहीं रातभर चलने वाले कार्यक्रम की मनोहारी प्रस्तुति देखने के लिए शहरवासियों ने भी रतजगा किया। महोत्सव की शुस्र्आत शनिवार शाम हुई और दूसरे दिन रविवार सुबह तक चलता रहा। इसमें शौर्य प्रदर्शन के साथ ही लोक कला के रंग सजते रहे। कोरोना संक्रमण को देखते हुए कड़े नियम भी रहे। इसके तहत प्रस्तुति देने वाले के साथ ही दर्शकों की थर्मल स्क्रीनिंग हुई। मास्क की अनिवार्यता के साथ ही सैनिटाइज करने के बाद सभी को प्रवेश मिला। इसके बाद एक-एक से बढ़कर एक प्रस्तुति होती रही।
झांकियों से दिया संदेश
नर्तक दलों ने अपनी प्रस्तुति के साथ ही झांकियों के साथ कृष्ण भक्ति और सामाजिक संदेश देते रहे। इसमें कालिया नाग मर्दन, कृष्ण जन्म समेत अनेक झांकियां आकर्षण का केंद्र रही। सभी ने अपने साथ झांकियां लेकर प्रस्तुति दी।
इस मापदंड पर परखा
समिति ने प्रस्तुति देने वाले दलों को पारंपरिक वेशभूषा, अनुशासन, प्रस्तुति, बाजा, लठ्ठ संचालन, गुस्र्द चालन व झांकी के आधार पर परखा गया और विजेता का चयन किया गया।
बिलासपुर का रावत नाच महोत्सव प्रदेश के बाहर भी प्रसिद्ध: सीएम
43वें रावत नाच महोत्सव का मुख्यमंत्री भुपेश बघेल ने दीप प्रज्जवलन कर उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री को आयोजन समिति की ओर से कलगी, पागा, जैकेट, कौड़ी पहनकर पारंपरिक वेशभूषा में तैयार किया और लाठी दी। सीएम ने भी पारंपरिक वेशभूषा में नृतकों के गोल घेरे में पहुंचे और उनके साथ गड़वा बाजा और मुरली की धुन में दोहा पढ़ते हुए जमकर थिरके। पहली प्रस्तुति परसदा के दल ने दी।
सीएम ने कहा कि बिलासपुर का रावत नाच महोत्सव प्रदेश के बाहर भी अपनी खासियत के लिए जाना जाता है। इस आयोजन के लिए बिलासपुर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। विगत 43 वर्ष से लगातार पूरी गरिमा और पवित्रा के साथ यह आयोजित हो रहा है। इसे निरंतर जारी रखना है।



