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जल्द मिल सकती है वैक्सीन लगवाने वालों को गुड न्यूज

डेस्क(khabar warrior)- इन दिनों स्पेन में एक रिसर्च चल रहा है जो वैक्सीन लगवाने वालों के लिए गुड न्यूज साबित हो सकता है। कोरोना संक्रमण के इस दौर में नये नये परीक्षण और कोरोना से लड़ने कई चीजों का अविष्कार हो रहा है जो किसी भी देश की जनता के लिए जरूरी साबित हो रही है। ऐसी ही एक गुड न्यूज यानि अच्छी खबर वैक्सीन लगवाने वालों को आने वाले समय में मिल सकती है। खबर है कि स्पेन में एक परीक्षण किया गया है जिसमें यह पाया गया है कि दो डोज़ अलग अलग वैक्सीन के लगवाये जा सकते हैं।

उदाहरण के तौर पर यदि आपने पहली डोज़ कोविशील्ड की लगवायी है तो दूसरी डोज़ स्पूतनिक की लगवा सकते है। कोरोना के नए वैरिएंट को लेकर भी तमाम तरह की चिंताएं हैं। इस परीक्षण का नतीजा बेहद उत्साहजनक रहा है। अब तक यही कहा जा रहा है कि पहली और दूसरी डोज़ समान वैक्सीन की होनी चाहिए यानि दोनो डोज़ कोवैक्सीन या कोविशील्ड की होनी चाहिए। लेकिन आने वाले समय में शायद यह बदल सकता है।

स्पेन में हुई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि अगर किसी व्यक्ति को एक डोज AstraZeneca की दी जाए और दूसरी Pfizer की, तो यह काफी सुरक्षित और असरदायक साबित होगा। स्पेन की सरकार की मदद से कार्लोस-3 हेल्थ इंस्टीट्यूट की कॉम्बिवैक्स स्टडी में यह पाया गया कि अगर दो अलग-अलग डोज दी जाए तो शरीर में 30 से 40 गुना ज्यादा एंटीबॉडी बनती है।

18 से 59 साल आयुवर्ग पर किया अध्ययन

स्टडी का नेतृत्व कर रहे डॉक्टर मेगडालेना कैंपिंस ने बताया कि इस अध्ययन में 18 से 59 साल के आयुवर्ग के 670 लोगों को शामिल किया गया था। इनमें से 450 लोगों को फाइजर (Pfizer) की वैक्सीन दी गई। इनमें से सिर्फ 1.7 फीसदी लोगों में ही गंभीर साइड इफेक्ट देखे गए। जबकि अन्य को हल्का सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द जैसे साइड इफेक्ट दिखे। हालांकि ब्रिटेन में इन दो वैक्सीन की अलग-अलग डोज देने के ट्रायल में ज्यादा लोगों में साइड इफेक्ट देखने को मिले थे।

अंतिम नतीजों का इंतजार

स्पेन में हुए इस अध्ययन के नतीजे अभी काफी शुरुआती स्तर के हैं। अंतिम परिणाम तक पहुंचने में वैज्ञानिकों को कुछ समय लग सकता है। एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) की वैक्सीन से ब्रिटेन और अमेरिका में खून के थक्के जमने के कुछ मामले सामने आए हैं। इसे स्पेन ने काफी गंभीरता से लिया है और वह इसका विकल्प तलाशने में जुट गया है। भारत की तर्ज पर स्पेन ने भी एस्ट्राजेनेका की पहली और दूसरी खुराक में अंतर को बढ़ाकर 16 हफ्ते कर दिया है। स्पेन इस दौरान अपने लोगों के लिए ज्यादा बेहतर और सुरक्षित उपाय खोजने में लगा हुआ है।

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