छत्तीसगढ़ के मूल निवासी NEET चयनित छात्रों और पालकों के लिए ये है अच्छी खबर

रायपुर(खबर वारियर)-छत्तीसगढ़ के मूल निवासी नीट चयनित छात्रों और पालकों के लिए अच्छी खबर है, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिन छात्रों ने नीट के डिक्लेरेशन फॉर्म में छत्तीसगढ़ के अलावा अन्य राज्य का चयन किया है इन करीब 54 छात्रों को मेरिट लिस्ट में छत्तीसगढ़ का मूल निवासी नहीं माना गया है।
बिलासपुर हाईकोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा संचालक (डीएमई) को आदेशित किया है कि वे नीट के फॉर्म में उल्लेखित मूल निवासी के आधार पर दाखिले तय करें। संचालक डॉ. आरके सिंह और उनके लीगल सेल के अधिकारियों को आदेश की स्पष्टता के संबंध में अब महाधिवक्ता (एजी) सतीशचंद वर्मा से अभिमत के आधार पर निर्णय लिया गया है। बुधवार को अभिमत की प्रक्रिया होगी। ऐसे विद्यार्थियों जिन्होंने नीट के फॉर्म में दूसरे राज्य का मूल-निवासी होना दर्शाया है। लेकिन उन्होंने छत्तीसगढ़ के मूल निवासी प्रमाण -पत्र का इस्तेमाल कर राज्य कोटा की सीट पर दाखिला ले लिया है तो उनके लिए खतरे की घंटी बज चुकी है।
समाचार के माध्यमों ने मेडिकल सीट हथियाने के लिए मूल-निवासी में की गई गड़बड़ी से जुड़ा खुलासा किया था। जिसके बाद आईएमए और पालकों ने डॉ. राकेश गुप्ता की अगुवाई में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात कर, उन्हें गड़बड़ी की जानकारी दी थी।
सीएम के आदेश पर डीएमई ने सभी कॉलेज डीन को कहा था कि वे छात्रों से कंफर्मेशन फॉर्म जमा करवाएं। कंफर्मेशन फॉर्म नीट आवेदन के बाद जनरेट होता है, जिसमें सारी जानकारी दर्ज होती है। इसी आधार पर अब बड़ा खुलासा हुआ है कि 1-2 नहीं बल्कि 54 छात्र ऐसे हैं जिनके पास 2-2 राज्यों के मूल-निवासी प्रमाण-पत्र हैं। वे राज्य के मेडिकल कॉलेजों की राज्य कोटा सीट पर दाखिला ले चुके हैं।
विगत दिनों आईएमए पदाधिकारियों, डॉ. राकेश गुप्ता, डॉ. महेश सिन्हा, डॉ. आशा जैन नेडीएमई से मुलाकात कर हाईकोर्ट के आदेश को जल्द अमल में लाने की मांग भी की थी।
रद्द हो सकती है पहली मैरिट सूची
संचालनालय सूत्रों के मुताबिक पहली मैरिट सूची रह भी हो सकती है, क्योंकि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में लिखा है कि जिन छात्रों ने नीट के कंफर्मेशन फॉर्म में दूसरे राज्य का मूल-निवासी होना उल्लेखित किया है, उन्हें बाहर किया जाए। अगर, ऐसा होता है तो सूची रद्द कर, नया पंजीयन और नया आवंटन जारी होगा।
3 विद्यार्थी दस्तावेज लेकर चले गए
मूल-निवासी प्रकरण में खुलासे के बाद प्रदेश के 3 कॉलेजों में सीट आवंटन के बाद 3 छात्र अपने दस्तावेजों को लेकर चले गए। संभव है कि उन्हें गड़बड़ी पर कार्रवाई का डर रहा होगा।



