राजिम माघी पुन्नी मेला का भव्य समापन,अंतिम दिन रही लाखों लोगों की भीड़,देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालू

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर उमड़ा जन सैलाब

राजिम(खबर वारियर)माघ पूर्णिमा 09 फरवरी से शुरू हुए राजिम माघी पुन्नी मेला के अंतिम दिन शुक्रवार महाशिवरात्रि को लाखों की संख्या में लोगों की भीड़ जुटी। पूरे मेला क्षेत्र के चारों तरफ दर्शनार्थियों की रेलमपेल भीड़ रही।

श्रद्धालु ब्रम्ह मुुर्हुम में पुण्य स्नान कर नदी में दीपदान प्रवाहित किया। पश्चात श्री राजीव लोचन एवं श्री कुलेश्वरनाथ महादेव के दर्शन करने पहुंचे। दर्शन के बाद श्रद्धालु मेला क्षेत्र के विभिन्न स्थानों में परिवार, मित्रों के साथ घूमते हुए दिखाई दिए। मसलन संत समागम स्थल, झांकियां, विभिन्न स्टाॅलों, शासकीय प्रदर्शनी, मीना बाजार आदि स्थानों में श्रद्धालु दिखाई पड़ती रही। यह भीड़ गुरूवार की रात से जुटती गई, जो शुक्रवार महाशिवरात्रि की देर रात तक रही।

आने वाले साल में राजिम की भव्यता और बढ़ेगी

दुकानदारों के लिए भी महाशिवरात्रि के दिन बहुत ही अच्छा साबित हुआ। मेला में सजी सभी दुकानों में खरीददारों की भीड़ नजर आयी। खासतौर से झुला, मौत कुंआ, मिक्की माउस, भेलपुरी, चार्ट कार्नर, आईसक्रीम, गन्ना रस, मनिहारी जैसे रोड किनारे लगी सभी दुकाने भारी भीड़ रही।

मेले का मुख्य आकर्षण दिन में मीना बाजार और शाम में महोत्सव स्थल में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम बना था। इसी के साथ गंगा महाआरती, महानदी आरती,संत समागम राजिम मेला के प्रमुख आकर्षण है।

संत समागम स्थल में बड़े-बड़े पंडाल बनाये गये है संत समागम स्थल के ठीक बाजु में नागा बाबाओं का कैम्पस बनाया गया है यहां धुनि रमाय दर्जनों साधु संत उपस्थित है, जिनका भी श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

15 दिनो तक चलने वाले राजिम माघी पुन्नी मेला छत्तीसगढ़ी संस्कृति को पुनर्जीवित करने किया जायेगा याद

लोमश ऋषि आश्रम के सामने पर्वत आकृति पर त्रिगौमुखी का आकर्षक दृष्य बनाया गया है, उस गौ मुख से निरंतर अमृत धारा प्रवाहित हो रही है दर्शानार्थी गंगाजल मानकर उसे ग्रहण कर रहे थे। गौमुख के दर्शन के लिए लोगों की भीड़ जुटी रहीं। महाशिवरात्रि की भीड़ राजिम को जोड़ने वाली सभी सड़कों पर थी। लोग अपने परिवार के साथ मेले का मजा लेने पहुंचे हुए थे।

रेत पर चल रहे खेल तमाशें करतब ने लोगों को खूब आकर्षित किया। विभिन्न जिलों से पहुंचे श्रद्धालु राजिम मेला में आकर अपने आपको धन्य समझा और एहसास किया कि हम हरिद्वार व काशी जैसे पावन तीर्थ स्थल पर का आभास हो रहा है।

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