” हर काम, देश के नाम” कोरोना महामारी की रोकथाम में बीआईटी रासेयो के छात्र निभा रहे हैं महत्वपूर्ण भूमिका, विभिन्न माध्यमों से कर रहे हैं लोगों को जागरुक

“मो.फ़ारूक़ की रिपोर्ट”

दुर्ग(khabarwarrior)प्रधानमंत्री द्वारा 21 दिनों के लॉक डाउन की घोषणा उपरांत बीआईटीदुर्ग के राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के स्वयंसेवकों द्वारा एक अनूठी मुहिम की शुरुआत की गई है। इस खास मुहिम का उद्देश्य है लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन किए बिना बच्चे-बुजुर्ग ,शहरी-ग्रामीण सभी तक कोविड-19 से बचने के उपाय और लॉकडाउन के दौरान अपने व्यक्तित्व के समुचित विकास के लिए अपनाए जाने वाली आदतों के बारे में अवगत कराना है ।

इसके तहत ” हर काम, देश के नाम” इस मुहिम की शुरुआत की गई है। इसमें इकाई के 200 से ज्यादा स्वयंसेवकों द्वारा यह संकल्प लिया गया कि परिस्थितियों के ठीक होते तक अफवाह को फैलने से रोकेंगे तथा बड़ी संख्या में लोगों तक सोशल मीडिया के माध्यम से सकारात्मक संदेश व सही जानकारी पहुंचाने का काम करेंगे।

रासेयो के छात्रों द्वारा प्रतिदिन डिजिटल एनएसएस न्यूज़ लेटर का प्रकाशन किया जाता है जिसे व्हाट्सएप ग्रुप्स – स्टेटस एवं नेशनल सर्विस स्कीम बीआईटी दुर्ग इंस्टाग्राम एवं फेसबुक पेज द्वारा राज्य के विभिन्न कोनो तक पहुंचाया जाता है।

न्यूज़ लेटर में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी किए गए कोविड-19 से राज्य, राष्ट्र एवं राष्ट्रीय स्तर पर संक्रमित एवं मृतजनों के आंकड़ों के साथ विश्व में इस महामारी के परिणाम स्वरूप लिए जा रहे विभिन्न अहम फैसलों का उल्लेख भी किया जाता है।

स्टे होम स्टे सेफ, सोशल डिस्टेंसिंग, वर्क फ्रॉम होम, लॉक डाउन के नियम , अफवाह से बचने के उपाय, भारत सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं, इत्यादि विषयों पर जनता को बेहतर और जानकारीपूर्ण संदेश देने के उद्देश्य से प्रतिदिन इकाई के 1-1 स्वयंसेवक द्वारा पोस्टर बनाकर शेयर किया जाता है।

राष्ट्रीय एकता, आपदा प्रबंधन और जनकल्याण के लक्ष्य के साथ स्वयंसेवकों द्वारा” प्रधानमंत्री कोविड-19 राहत कोष” से जुड़ी जानकारी जैसे सहायता राशि भेजने के माध्यम , विभिन्न मोबाइल वॉलेट एप्लीकेशन से राहत कोष में योगदान देने के दिशा निर्देश के साथ-साथ बैंक अकाउंट से राहत कोष में फंड ट्रांसफर से जुड़ी विभिन्न जानकारियों को मैसेजेस , पोस्टर इत्यादि द्वारा जनहित के लिए जारी किया गया।

साथ ही भारत सरकार के मोबाइल एप्लीकेशन ” आरोग्य सेतु” जोकि जनता को स्वास्थ्य विभाग से जोड़े रखेगा, उसके बारे में भी जागरूकता पोस्टर निकाला गया है।

जिसके द्वारा एप्लीकेशन से जुड़ी विभिन्न जानकारी जैसे इसका उद्देश्य क्या है, यह काम कैसे करता है इत्यादि जानकारियां बताई जा रही है।

दुर्ग पुलिस द्वारा इस महामारी से जुड़े विभिन्न जागरूकता चल चित्रों को भी सभी स्वयंसेवकों द्वारा ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का कार्य किया गया है।

ऐसे आपातकाल के समय में, सही जानकारी पाना हर नागरिक का अधिकार होता है और भाषा ही वह सेतू होती है जो जन जन को जोड़ती है।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए बीआईटी, दुर्ग के रासेयो स्वयंसेवकों द्वारा इस विषय में एक बहुत अहम कदम उठाया गया।

राज्य के विभिन्न स्थानों में आज भी ग्रामीण बोलचाल के लिए छत्तीसगढ़ी भाषा का प्रयोग करते हैं इसीलिए स्वयंसेवकों द्वारा इस महामारी से बचने के उपायो के वीडियो बनाए गए हैं जिसमें उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा का प्रयोग करते हुए जानकारी साझा की है

स्वयंसेविका शुभांगी गुप्ता द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग का अर्थ एवं उसका पालन कैसे करें, कितने फीट की दूरी बनाए रखें इत्यादि जानकारियां दी गई।

स्वयंसेवक पुरंजन बंजारे द्वारा सैनिटाइजर के प्रयोग करने का तरीका बताया गया। मास्क को कैसे पहने, कितनी देर के लिए पहने और किस तरह से पहने इस बारे में स्वयंसेवक कृष्णकांत द्वारा जानकारी दी गई।

कोरोना वायरस से बचने के लिए हैंड वॉश कितनी देर करें, किससे करें और कैसे करें इसके बारे में स्वयं सेविका प्रेरणा द्वारा अवगत कराया गया।

लॉक डाउन का सही इस्तेमाल कैसे करें ,आदतों में क्या-क्या जोड़ें , आत्म बेहतरी से जुड़ी 21 बातें जैसे स्वस्थ रहे, उत्पादक रहे इत्यादि जिससे हमारे पास जो है हम उसी से बेहतरी की ओर बढ़े ऐसे विचारों को स्वयंसेवकों ने भली-भांति समझा और लोगों को बताया।

स्वयंसेवकों के जन कल्याण के जुनून को बीआईटीदुर्ग के प्राचार्य डॉ अरुण अरोरा द्वारा सराहा गया। रासेयो समन्वयक श्री एस आर ठाकुर द्वारा स्वयंसेवकों के इस शिक्षा द्वारा समाज सेवा के कार्य की तारीफ की गई।

रासेयो कार्यक्रम अधिकारी शबाना नाज़ सिद्धकी एवं अमर कुमार डे के दिशा निर्देश मे स्वयंसेवकों द्वारा जनकल्याण के कार्य किए जा रहे है।

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