फीस को लेकर पालकों का विरोध जारी,किया प्रदर्शन

रायपुर(khabarwarrior) स्कूल संचालक संघ और कांग्रेस से जुड़े नेता फीस को लेकर भले ही समझौते की बात प्रचारित कर रहे हैं, मगर पालक इस तथाकथित समझौते को मानने को तैयार नहीं हैं। यही वजह है कि सोमवार को राजधानी सहित राज्य के अनेक शहरों में पालकों ने प्रदर्शन किया। जहां भी पालकों का प्रदर्शन रहा, वहां प्रबंधन के लोग भूमिगत हो गए और चर्चा के लिए सामने नहीं आए।

राजधानी के निजी स्कूलों के संचालको ने भले ही फीस के लिए पालकों को तंग नहीं करने की बात कही है, सच तो यह है कि स्कूल संचालक ट्यूशन फीस के साथ दूसरे मद के शुल्क जोड़कर फीस वसूल रहे हैं।

इसी के संबंध में मोआ में संचालित आदर्श विद्यालय मोआ के प्राचार्य से चर्चा के लिए बड़ी संख्या में पालक पहुंचे हुए थे, लेकिन भीतर से प्राचार्य के उपस्थित नहीं होने की सूचना भेज दी गई। गुस्साए पालकों ने विद्यालय के गेट पर किसी भी पालक द्वारा फीस जमा नहीं करने का नोट चिपका दिया।

 

पालकों ने बताया कि उनके ट्यूशन फीस में पूरी फीस जोड़ दी गई है और उसे जमा करने को कहा जा रहा है। इस मौके पर पालकों ने यहां जोरदार प्रदर्शन किया। सूचना पर इलाके की पुलिस भी यहां पहुंची, इसके बाद भी प्रबंधन के लोग चर्चा के लिए नहीं आए।

इससे पूर्व बड़ी संख्या में पालक कापा, रायपुर स्थित होलीक्रॉस स्कूल पहुंचे। यहां पालकों की भीड़ को देखते हुए प्राचार्य पिछले दरवाजे से निकल गए। सूचना भेजे जाने के बावजूद वे नहीं आए। यहां भी पालकों ने नारेबाजी की। पालकों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि उनसे ट्यूशन की फीस के साथ दूसरे शुल्क भी जोड़कर जमा करने को कहा जा रहा है।

शिक्षा के अधिकार के तहत जो कानून बनाए गए हैं, उसका पालन कराने में राज्य की सरकार अब तक विफल रही है। पालकों को उनका अधिकार दिलाने की मुहिम चला रहे संगठन छात्र – पालक संघ के अध्यक्ष नजरुल खान ने इस प्रदर्शन के दौरान चेतावनी दी है कि फीस को लेकर स्कूल संचालकों की मनमानी को रोकते हुए अधिसूचित फीस लेने का आदेश नहीं दिया गया तो उनका आंदोलन और भी उग्र होगा।

छात्र पालक संघ के अध्यक्ष और पालकों का कहना है कि बीते दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और रायपुर महापौर की पहल पर स्कूल संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारी के बीच जो बैठक हुई इसमें मूल विषय पर चर्चा ही नहीं हुई। पालकों की मांग है कि सभी विद्यालय शिक्षा विभाग द्वारा अधिसूचित ट्यूशन फीस ही वसूलें, मगर स्कूलों द्वारा इसमें दूसरे शुल्क भी जोड़कर वसूली की जा रही है। पालक अब तो यह भी मांग कर रहे हैं कि राज्य में फीस विनियामक अधिनियम पारित होने के बाद फीस कि वसूली को रोकते हुए नए सिरे से इसका निर्धारण किया जाए।