मरवाही से जोगी बाहर,याद करें अंतागढ़

मरवाही से जोगी बाहर,याद करें अंतागढ़ !

धीरेन्द्र गिरि गोस्वामी✍️


छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री रहे अजीत जोगी के जीते जी मरवाही में उनके परिवार को चुनाव से अलग किया जाना संभव नही हो पाया लेकिन पहली बार अब मरवाही के चुनावी मैदान से जोगी परिवार बाहर हो गया है।अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी और उनकी पत्नी ऋचा जोगी का जाति प्रमाण पत्र पत्र रद्द होने की वजह से उनका नामांकन रद्द हो गया। बहरहाल अदालत जाना ही अब जूनियर जोगी के पास आखरी विकल्प है।

दरअसल अमित जोगी के सियासी करियर सामने खड़े इस संकट को समझने के लिए जून 2014 में छत्तीसगढ़ की ही अन्तागढ़ विधानसभा में हुए उपचुनाव के खेल को समझना होगा। छत्तीसगढ़ के मौजूदा सीएम भूपेश बघेल उस समय प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे,जिन्होंने पार्टी के फैसले के बाद मन्तूराम पवार को कांग्रेस प्रत्याशी घोषित किया। उस समय छत्तीसगढ़ की सत्ता पर डॉ रमन सिंह की अगुवाई वाली भाजपा थी।

चुनावी गरमाहट के बीच बड़ा उलटफेर हुआ और मंतूराम पवार ने अपना चुनाव से पहले ही हार मानते हुए अपना नाम वापस ले लिया। शायद छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास में ऐसा पहली बार घटित हुआ जब किसी उपचुनाव में कांग्रेस का प्रत्याशी मैदान में न रहा हो। नतीजा भाजपा के भोजराज नाग ने निर्दलीय रूपधर पुड़ो को  51 हजार वोट से हराकर एकतरफा जीत हासिल की।

2001 के उपचुनाव में अजीत जोगी के विधायक बनने के बाद से ही 2003, 2008, 2013 और 2018 चुनाव में भी जोगी परिवार का ही कब्जा रहा है,आज वही जोगी परिवार मरवाही के चुनावी मैदान से बाहर केवल मतदाता की भूमिका में नज़र आएगा।

 किस प्रकार मज़बूत प्रत्याशी को सत्ता की ताकत से चुनाव लड़ने से रोक दिया जाता है यह अंतागढ़ में देखने को मिला था और अब मरवाही चुनाव में बड़ा उलटफेर होने से जनता अलग-अलग मायने निकालकर इसे समझने की कोशिश कर रही है।

यह भी जानना जरूरी है कि मंतूराम बाद में भाजपा में प्रवेश कर गए और जब कांग्रेस की सरकार बनी तो भाजपा भी छोड़ दी। अब अमित क्या करेंगे राजनीति में रुचि रखने वालो के लिए इस सवाल का उत्तर जानना वाकई रुचिकर होगा।

बहरहाल पिता की मृत्यु के बाद अमित जोगी के पास राजनीति के मैदान में भावुक अपील के साथ खड़े रहने के लिए मरवाही के सिवा कुछ बचा नही था,वह विकल्प भी अब उनके पास नही है। पहले भाजपा और फिर कांग्रेस की सरकार 20 वर्ष से अधिक समय तक पुख्ता तरीके से जोगी की जाति तय कर पाने में सफल नही रही है,इतना बड़ा तंत्र कभी कोई अकाट्य फॉर्मूला नही निकाल पाया कि जोगी परिवार के पास कोर्ट जाकर राहत पाने के रास्ते बंद किये जा सके।

बहरहाल जोगी की जाति पहले भी विवादित थी, अब भी है। मगर फिर भी जोगी किसी न किसी तौर पर मरवाही के चुनाव का हिस्सा रहे।वही  एक बार फिर कोर्ट पहुच चुके अमित जोगी तो चुनावी जंग से बाहर हो चुके है।

कोई कुछ भी कहे ,लेकिन जब अजीत जोगी ने सशरीर मरवाही छोड़ी,यही पल मरवाही की सियासत को नई दिशा में ले जाने सबसे कड़ी घटना साबित हुई है। सत्ता किसी की हो ,अब अमित की जाति से किसी को ज्यादा फर्क पड़ने नही वाला।

(लेखक- धीरेन्द्र गिरि गोस्वामी छत्तीसगढ़ के पत्रकार है, राजनीतिक विषयो पर गहन रुचि रखते है)