
अमित चन्द्रवंशी “सुपा“✍️
नव दिन के नवरात्रि म माता के जगराता होथे, हमन हिन्दू मन खासकर दुर्गा दाई के नव रूप ल मानथन, अलग अलग रूप के अलग विशेषता हवय, नव दुर्गा के शक्ति मातृत्व शक्ति के पहचान हरय, एक माता ह जीवन बनाये बर जन्म लेथे, ममता के मूरत होथे। नव दिन के नवरात्रि अउ महिला दिवस बस में नही जीवनभर एक एक दिन माता के शक्ति ह जीवन ल समृद्ध बनाथे, एक लईका के जन्म ले माँ के खुशी के कोनो ठिकाना नही रहय, जीवनभर के पुण्य ल अपन लईका के खुशी बर दुआ माँगथे की सुख अउ समृद्ध रहय।
नवदुर्गा माता दुर्गा के नव रूप हरय, सबके अलग अलग स्वरूप हवय फेर सबो एके ममतामयी माता हरय, जेन म जड़ पदार्थ के महत्व, चेतना, जीव में वाणी, अंडा धारण, पुत्रवती, पुत्री, जड़ चेतन मृत्यु, अउ ज्ञान आदि नव रूप में मूल रूप ले मिलथे।
जवारा अउ जसगीत ह पहली मूलरूप म रहय, नवरात्रि म नव दिन माता देवालय अउ गांव के देवालय मन म दिनमान अउ रतिया देवी गीत गाना बजाना करय, आघु दुर्गा देवी के मूर्ति नई रखे जात रहिस हवय, अउ रखे भी त एकदम गिने चुने, सबले बड़का जन गांव के मन जुरयातीस अउ जसगीत गान करय, माता देवालय अउ ठाकुरदईया म जवारा ल नवरात्रि के सुरु दिन बोतीस अउ नवरात्रि के अंतिम दिन विसर्जन होतीस, ओखर बीच मे अखण्ड जोत देवालय म जलय, अउ माता के जसगान होवय, पंडा ह जवारा के देखभाल करतीच अउ महाराज ह पूजापाठ बिहनिया अउ संझा कुन करय।
आज भी गांव मनमा जवारा बोवथे, फेर धीरे धीरे विलुप्त होवत जात हवय, आघु काखरो काखरो घर के देवता म तको चलन रहय, नव दिन ले जवारा बोवय रहय अउ अंतिम दिन ठंडा होवय तेन दिन बकरा के बलि दे जावय। अब धीरे धीरे सब विलुप्त होवत जावत हवय।
जसगीत के जगह ल माता के जगराता ह लेत हवय, तेन म स्टेज शो होथे माता के जगराता म चार चंदनी लगत हवय। आघु जसगीत म मन ह रम जवय, माता के प्रति अपार श्रद्धा निहित रहय, आघु जवारा तको बदय, अभी भी कोनो कोनो नेवज अउ नवा तको खाते नवरात्रि म।
नवरात्रि के अलग अलग राज म अलग अलग महत्व हवय, माता के उत्तर भारत म माता के जगराता प्रसिद्ध हवय त गुजरात के गरबा- डांडिया ह पुरा भारत अउ विश्व म प्रसिद्ध होवत जात हवय, अउ बंगाल के काली देवी के पूजा बर प्रसिद्ध हवय, माता के आराधना अलग अलग राज म विशेष रूप से करे जाथे। देखते देखत म गरबा ह माता के उपासना बर सबो मनखे ल पसंद आगे, गरबा नाच के माता के स्तुति करना अपन आप म माता के प्रति श्रद्धा अर्पित करे जाथे।
बेरा के संग नवरात्रि के रूप बदलत जात हवय, जसगीत अउ जवारा ल आज भी देवालय म जिंदा रखे हवय।
अभी कोरोना काल म हमन ल माता दुर्गा ह शक्ति देहि, अउ देवी दुर्गा ल पापों की विनाशिनी कहे जाथे, सबो मनखे के पाप ल दूर करही अउ हमन ल कोरोना ले मुक्ति दिलाही। माता के जगराता अउ उंखर अस्त्र शस्त्र के पूजा घर म रहिके करना उचित हवय, अउ कोरोना ल ध्यान म रखे माता ल घर मे खुश करना जरूरी हवय, पाप ले मुक्ति देहि अउ हमर पुनः जन्म कोरोना के बाद होही।



