कबाड़ से जुगाड़: मेमू के पुराने इंजन अब बनेंगे निरीक्षण यान

बिलासपुर(खबर वारियर)- बिलासपुर रेल मंडल के कोचिंग डिपो में कालातीत मेमू (मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट) के रेल इंजन को मरम्मत और रूपांतरित कर उसे निरीक्षण यान बनाने का प्रयोग सफल रहा है। अब भिलाई से मेमू के एक पुराने इंजन को मंगाया गया है। इलेक्ट्रिक व मैकेनिकल विभाग की टीम इसका आकलन कर रही है। इसके बाद लागत, उपयोगी उपकरण समेत अन्य खर्च का ब्योरा तैयार कर मुख्यालय भेजा जाएगा। बजट स्वीकृत होने के बाद काम शुरू हो जाएगा।
कोचिंग डिपो में नए— नए प्रयोग होते रहते हैं। बच्चों के खिलौने वाली कार से ट्रेनों के नीचे निरीक्षण हो या फिर कोच में लगे बायोटायलेट की बदबू दूर करने का तरीका। यह सारे कार्य बिलासपुर रेल मंडल की उपलब्धियों में आते हैं। अब एक और मेमू इंजन आया है। जिसे निरीक्षण यान के रूप में रूपांतरित करना है।
रेलवे के लिए यह कार्य कठिन नहीं है, क्योंकि इससे पहले 30 साल पुराने कंडम कोच को निरीक्षण यान बनाने का सफल प्रयोग किया जा चुका है। अधिकारी इसी से सेक्शन व यार्ड की जांच करते हैं। इसी के जैसा मेमू इंजन से निरीक्षण यान बनाने की योजना है। दो दिन पहले ही यह भिलाई से आया है। इसका आंकलन किया जा रहा है। जब यह पूरी हो जाएगी तब एक रिपोर्ट दी जाएगी।
25 साल पुराना इंजन
भिलाई से आया यह इंजन 25 साल पुराना है। रेलवे में नियम है कि इस अवधि के बाद किसी भी इंजन को ट्रेन या मालगाडी के परिचालन के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता है, लेकिन दूसरे उपयोग जैसे निरीक्षण यान, सेलून आदि के रूप में रूपांतरित कर चलाया जा सकता है। इसीलिए रेलवे ने यह निर्णय लिया है।
50 से 60 लाख रूपये खर्च
इलेक्ट्रिक व मैकेनिकल विभाग का तैयारी में जुटा हुआ है। हालांकि पूरी रिपोर्ट नहीं बनी है, लेकिन एक अनुमान लगाया जा रहा है कि निरीक्षण यान बनाने में करीब 50 से 60 लाख रूपये खर्च आएगा। इस दौरान शौचालय, एसी, बैठने के लिए कुर्सियां, सनमाइका, पर्दे आदि लगाए जाएंगे। इसमें अधिकारी आराम भी कर सकते हैं।



