किसानों को धान बेचे बिना 10 हजार रु.देने की घोषणा को वापस लेने पर उठने लगे सवाल, राजीव गांधी किसान न्याय योजना के साथ क्या खुद अन्याय करने पर आमादा है सरकार?

छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन ने जताया संदेह
खाद्य मंत्री अमरजीत सिंह भगत ने जो कहा वो गलत नहीं,उन्होंने वही कहा जो सरकार के केबिनेट ने पारित किया।
13मई 2020को पारित मंत्री मंडल निर्णय में किसी भी प्रकार का हेरा फेरी किसानों को स्वीकार्य नही।
दुर्ग(खबर वारियर)छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के महासचिव झबेन्द्र भूषण वैष्णव ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना पर,संदेह जताया है। जिसमें छत्तीसगढ़ के किसानों को खरीफ धान ,मक्का ,गन्ना, और दलहन तिलहन पर निर्धारित रूपये प्रति एकड़ कृषि आदान सहायता के रुप में वर्ष 2020-21एवं आगामी वर्षों में देने का निर्णय सरकार द्वारा किया गया है जिसका किसानों ने स्वागत किया था।मगर पिछले दिनों खाद्य मंत्री के बिना धान बेचे भी 10000प्रति एकड़ किसानों को देने की बात को सरकार के अन्य मंत्रियों द्वारा खंडन संदेह पैदा कर रही है।
सरकार राजीव जी के नाम एवं किसान न्याय जैसे शब्दों के साथ खिलवाड़ न करे , किसानों को योजना के तहत 10000रु /एकड़ से कम या किसी भी प्रकार का योजना में बदलाव मंजूर नही।
राजीव गांधी किसान न्याय योजना पर वैष्णव का कहना है कि दिनांक 13 मई 2020 को केबिनेट ने योजना पर ये निर्णय लिया था कि , किसानों को वर्ष 2019-20के लिए कृषि आदान सहायता के रुप में *पंजीकृत उपार्जित रकबा* के आधार पर अधिकतम 10000रू/एकड़ सहायता दी जावेगी जो कि किसानों के खाते में चार किस्तों में आयेगी पहली किस्त की राशि भी किसानों को धान खरीदी के अंतर की राशि के अनुरूप मिला ।
कम धान बेचने वाले किसानों को बेचे गये धान की मात्रा और समर्थन मूल्य तथा 2500रु का अंतर की राशि का चौथाई रकम मिला जो कि स्पष्ट है सरकार ने अपने वादे के मुताबिक 2500पर अंतर की राशि दिया कैबिनेट ने भी पंजीकृत उपार्जित रकबा शब्द का इस्तेमाल किया जो कि वर्ष 2019-20के लिए ही था।

वहीं पर न्याय योजना के दूसरे बिंदु पर *वर्ष 2020/21एवं आगामी वर्षों के लिए खरीफ धान,मक्का,गन्ना,दलहन तिलहन पर पंजीकृत अधिसूचित रकबा के आधार पर प्रति एकड़ निर्धारित राशि* देने का निर्णय लिया गया ।
केबिनेट नोट में स्पष्ट है न तो *उपार्जन* का शर्त है और न ही 10000रू *अधिकतम* का शर्त है।स्पष्ट है तब सरकार पंजीकृत अधिसूचित रकबा के आधार पर निर्धारित राशि/एकड़ देने का निर्णय लिया था और सरकार के योजना के प्रचार प्रसार में निर्धारित राशि 10000रू/एकड़ कहा जाता रहा फिर अब मंत्री अमरजीत सिंह भगत के धान नही बेचने वाले किसानों को भी लाभ मिलने की बात पर अन्य मंत्रियों द्वारा सफाई क्यों दिया जा रहा है?
क्या सरकार किसानों के साथ छल करने जा रही है ?
जबकि होना तो ये चाहिए कि सरकार कोरोनावायरस महामरी से चौपट ग्रामीण अर्थव्यवस्था को उठाने के लिए किसानों से किये और भी वादे जिसमें 2साल का बकाया बोनस समर्थन मूल्य पर चना गेहूं की खरीदी की व्यवस्था करने के लिए कदम उठाना चाहिए।
प्रदेश में 34 लाख किसान हैं न्याय योजना से 18.35 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं बाकि के बचे किसान जो सब्जी ,चारा या फिर अन्य की खेती करते हैं उन्हें भी न्याय योजना से जोड़कर 10000रु. आदान सहायता दी जानी चाहिए । सरकार को इस पर विचार करने की जरूरत है।
चुंकि धुआं उठी है तो जरूर कहीं आग लगी है !
छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन मांग करती है कि सरकार स्पष्ट करे कि पंजिकृत अधिसूचित रकबे के आधार पर ही राशि किसानों को दी जावेगी जिसका समर्थन मूल्य खरीद से कोई संबंध नहीं होगा।और वह निर्धारित राशि किसानों को प्रति एकड़ 10000 ही दी जावेगी क्योंकि इसका निर्णय तो पहले ही हो चुका है। अब इससे पिछे हटना सरकार के लिए संभव नही। वहीं छूटे हुए किसानों को भी योजना में शामिल कर उनके साथ भी न्याय किया जावे।



