राजधानी

राजधानी में हजारों शिक्षकों ने वेतन कटौती के विरोध में निकाली रैली

मुख्यमंत्री निवास धेराव करने जा रहे शिक्षकों को पुलिस ने रोका

(बढ़े हुए वेतन को कम करना ही है मुख्य वेतन विसंगति -शासनादेश के बाद भी नहीं मिला लाभ)

रायपुर (खबर वारियर) छत्तीसगढ़ सरकार के शिक्षा विभाग के अधीन सहायक शिक्षकों ने वेतन विसंगति दूर करने हेतु विधान सत्र प्रारंभ होने की तिथि 13 दिसंबर सोमवार को पूरे प्रदेश से रायपुर पहुंचकर, राजधानी में हजारों की संख्या में रैली निकालकर मुख्यमंत्री निवास धेराव करने हेतु बुढ़ातालाब धरना स्थल से कूच किया। सप्रे शाला मैदान के सामने उन्हें पुलिस प्रशासन द्वारा रोका जहां शाम तक जमीन पर धरना देकर बैठे रहे।इनके वेतन विसंगति व अन्य मांगों का समर्थन छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने समर्थन किया है।

संघ के प्रांताध्क्ष विजय कुमार झा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में ऐसा कोई उदाहरण नहीं होगा जो इन सहायक शिक्षकों के साथ हुआ है। प्रदेश के लाखों सहायक शिक्षकों को 2400 ग्रेड-पे पर नियुक्त कर 7 वर्ष पश्चात् क्रमोन्नत वेतनमान् के तहत 4200 ग्रेड पे प्रदान कर वेतन निर्धारित किया गया। इसके उपर व्याख्याताओं का ग्रेड- में 4300 है। किंतु 8 वर्ष बाद वास्तविक पदोन्नति प्रदान कर पुनः उसको पूर्व के समान 2400 ग्रेड-पे में वेतन निर्धारित कर दिया। प्रतिमाह 18000/-रू. की आर्थिक क्षति झेल रहे शिक्षकों के उक्त विसंगति को दूर करने अंर्तविभागीय समिति का गठन भी किया गया था। इनके विसंगति को पिंगुंआ समिति से नहीं जोड़ा जा सकता है। श्री झा ने तत्काल पूर्ववत् 4200 ग्रेड-पे में वेतन नियमन की कार्यवाही करने तथा लंबित मंहगाई भत्ता प्रदान किए जाने की मांग मुख्यमंत्री  भूपेश बधेल से की है।

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