शहीद की बहन को धोखा, दूल्हा निकला दो बच्चों का पिता

राजनांदगांव(खबर वारियर)- छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में एक एनआरआई ने शहीद के परिवार के साथ धोखा किया। पहले से ही शादीशुदा युवक ने शहीद की बहन और उसके माता-पिता को अपनी बातों में फंसा कर रुपए भी ऐंठे। युवती ने शिकायत की है कि उसका शारीरिक शोषण भी किया गया। घटना जिले के जंगलपुर गांव की है। इस मामले में अब डोंगरगांव पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। आरोपी एनआरआई को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
तीन दिन में ही टूटी शादी
जंगलपुर के रहने वाले सीआरपीएफ जवान पूर्णानंद साहू की 10 महीने पहले बीजापुर में मौत हो गई थी। पूर्णानंद साहू वहां मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। इनकी बहन से मूलत: अर्जुनी के रहने वाले शैलेंद्र साहू ने शादी का प्रस्ताव भेजा। शैलेंद्र अमेरिका में रहता है, वहां बिजनेस करता है। रिश्ता देखकर शहीद का परिवार भी खुश हुआ। बात पक्की हो गई। इसी 9 दिसंबर को सामाजिक रीति रिवाज से शादी हुई। 13 तारीख को लड़की के घर वालों को पता चला कि शैलेंद्र ने पहले से अमेरिक का में शादी कर ली है। उसके दो बच्चे भी हैं।
हड़बड़ी में की शादी, और रुपए भी ऐंठे
लड़की के जीजा नरोत्तम ने बताया 21 नवंबर को रिश्ता आया। इसके बाद सब कुछ जल्दबाजी में तय हुआ। लड़के को देखने के बाद परिवार ने सोचने के लिए थोड़ा वक्त मांगा तो लड़के के पिता हिरा लाल साहू और परिवार के अन्य लोग नाराज हो गए। ऐसे में रिश्ता तय करना पड़ा। शैलेंद्र और उसके परिवार ने टीवी, सोफा, वॉशिंग मशीन, सोने की अंगूठी और चेन की मांग की जिसे लड़की वालों ने पूरा किया।
ऐसे हुआ खुलासा
युवती चूंकि शहीद की बहन थी। ऐसे में सीआरपीएफ के नियमों के मुताबिक शहीद के बच्चों या भाई-बहन की शादी में फोर्स की तरफ से सहायता राशि दी जाती है। इसके तहत परिवार ने लड़की की शादी के बारे में सीआरपीएफ अफसरों को बताया। अफसरों ने लड़के की जानकारी मांगी। सीआरपीएफ ने जब युवक के पासपोर्ट की जांच करवाई तो वो शादीशुदा निकला। अमेरिकी महिला से उसने पहले ही शादी कर ली थी। जब शहीद के परिजनों ने दबाव बनाया तो युवक ने शादीशुदा होने की बात कबूली।
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यह बारात 9 दिसंबर को शहीद के घर पहुंची थी। इसमें 11 बैलगाड़ियां शामिल थीं।
शैलेंद्र ने बात-चीत में खुद को काफी मॉडर्न विचारों वाला बताया। शहीद की बहन से शादी करने की वजह से उसे सुर्खियों में जगह मिली। उसने अपनी बारात बैलगाड़ी में निकाली। अपने गांव से वो बैलगाड़ी में सवार होकर लड़की के गांव पहुंचा था। ऐसा इस वजह से क्योंकि शहीद पूर्णानंद की भी शादियों की तैयारी में परिवार लगा हुआ था, पूर्णानंद अक्सर खुद की बारात बैलगाड़ी पर निकालने की बात कहते थे। उसी इच्छा को पूरा करने के लिए बारात बैलगाड़ी पर आई। मगर अब असलियत सामने आने के बाद परिवार पूरी तरह से टूट चुका है।



