वैदिक नियमों के अनुसार होगा अयोध्या का शहरी विकास, बनेगा दुनिया का प्रमुख धार्मिक स्थान

उत्तर प्रदेश (खबर वारियर)- अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर के निर्माण का काम रफ्तार पकड़ रहा है, इसी के साथ-साथ अयोध्या के विकास की भी तैयारियां तेज हो गई हैं. उत्तर प्रदेश सरकार एक नई अयोध्या बसाने का प्लान तैयार कर रही है. यानी राम मंदिर बनने के साथ-साथ पूरे नगर को भी नया रूप देने की भी योजना बनाई रही है. मेगा अयोध्या विकास योजना के तहत 1,200 एकड़ के नए मॉडल को ‘फ्यूचर सिटी’ का नाम दिया गया है. यूपी सरकार के आदेश के मुताबिक, ‘भविष्य की अयोध्या’ को धार्मिक और पर्यटन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाएगा, जो आध्यात्म, संस्कृति और आधुनिकता का अद्भुत संगम होगी.
सूत्रों के मुताबिक, अयोध्या का विकास इस तरह किया जाएगा कि यह नगर दुनिया में प्रमुख धार्मिक शहर के रूप में अपनी पहचान बनाएगा. सरकार का कहना है कि जिस तरह कैथोलिक लोगों के लिए वेटिकन सिटी है, उसी तरह हिंदुओं के लिए अयोध्या होगी. अयोध्या का विकास वैदिक सिद्धांतों के आधार पर किया जाएगा. यानी अयोध्या के विकास में वैदिक रामायण और वैदिक वास्तुकला का पालन किया जाएगा.
30 सालों के लिए तैयार की जाएगी विकास की योजना
इस विकास की योजना 30 सालों के लिए तैयार की जाएगी, जिसमें शहर की मुख्य विरासत (Heritage) को बरकरार रखने पर ध्यान दिया जाएगा. राम मंदिर निर्माण के दौरान तीर्थयात्रियों के लिए रिवरफ्रंट और परिक्रमा मार्ग के विकास के साथ-साथ और मनोरंजन की गतिविधियों और सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा, जिसमें रामजन्म भूमि तक पैदल जाने वाले रास्ते में सुधार, तीर्थयात्रियों के रहने-ठहरने की व्यवस्था, आसपास की हरियाली, सामुदायिक स्थान आदि शामिल हैं.
राम मंदिर का निर्माण 2023 तक पूरा होने की संभावना
अयोध्या के लिए योजना तैयार करने को लेकर एक सलाहकार का चयन किया जाएगा चयनित सलाहकार सात महीने के भीतर विकास योजना तैयार करेंगे. इस विकास योजना में शहर में प्रदर्शनी स्थान, लाइटिंग आदि का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा. राम मंदिर का निर्माण 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. मालूम हो कि सरकार नए अयोध्या नगर के लिए सरयू नदी के तट पर करीब 1,200 एकड़ जमीन के अधिग्रहण (Acquisition) करने का नोटिफिकेशन जारी कर चुकी है.



