किसान आंदोलन के साथ एकजुटता के लिए महिलाओं ने बनाई मानव श्रृंखला

25 जनवरी को निकलेंगे मशाल रैली

रायपुर(खबर वारियर)- किसानों के देशव्यापी आंदोलन के साथ एकजुटता के देशव्यापी आव्हान पर महिलाओ ने रायपुर।में।बनाई मानव श्रृंखला । इसमें बड़ी संख्या में माकपा, सीटू , आर डी आई ई यू महिला समिति व ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं के साथ समाज के हर हिस्से के नागरिकों ने भागीदारी की । सीटू के राज्य सचिव धर्मराज महापात्र ने यह जानकारी देते हुए बताया कि शामिल लोगों ने प्रधानमंत्री के किसानों की मदद के दावों की निन्दा की । जो प्रधानमंत्री किसानों को बरबाद करे और कारपोरेट व विदेशी कम्पनियों की मदद करे, फिर भी अपने मुंह मिया मिटठू बने, देश के लिए शर्मनाक है।

इस मानव श्रृंखला में एम् के नंदी, धर्मराज महापात्र,, गौतम बंदोपाध्याय, गंगा साहू,गीता पंडित अनुसुइया ठाकुर , ज्योति पाटिल, संध्या भगत , संध्या राज, गीता दलाल, किरण श्रीवास्तव, अंजना बाबर, ऊषा परगनिहा, अलका शर्मा, जिशु तिग्गा, अनुसुइया तिग्गा, एस सी भट्टाचार्य, प्रदीप गभने, डाक्टर राजेश अवस्थी, सुरेन्द्र शर्मा, अलेक्जेंडर तिर्की, वी एस बघेल अजय कन्नोजे, , प्रदीप मिश्रा, के के साहू, ,राजेश पराते, प्रवीण मेश्राम, मारुति डोंगरे, पुनीत राम साहू, सुखदेव साहू, ललित वर्मा, संदीप सोनी, वासुदेव शुक्ल, आर के गोहिल, भास्कर राव, राम यादव, शाहिद रजा, मोहम्मद रब्बानी, ए आर खान, लखन यादव, ऑर्थो, मनोहर साहू , आदि साथी प्रमुख रूप से शामिल थे ।

नेताओं ने कहा कि 3 खेत कानून व बिजली बिल 2020 की वापसी किसानो की पहली व सबसे अग्रिम मांग है शेष मांगें बाद में। प्रधानमंत्री बेतुके दावे कर अंजान लोगों को गोलबंद कर रहे हैं और किसानों की न्यायोचित मांग पर जनता के बीच संदेह फैला रहे हैं।भारत सरकार ने खेती में निजी निवेशकों की मदद के लिए 1 लाख करोड़ रुपये आवंटित किये हैं खुद निवेश करने को राजी नहीं हैं।

पीएम किसान निधि किसानो को मात्र रु0 16.32 का तुत्छ सहयोग है; फसल बीमा ने कम्पनियों की आय 10 हजार करोड़ प्रतिवर्ष से बढ़ाई; ओडीएफ में बने 90 फीसदी शौचालय गैर कार्यात्मक; 95 फीसदी बैंक खाता ज्यादातर शून्य बैलेन्स; रसोई गैस पर अब ज्यादातर सब्सिडी गायब; पी एम् आवास में थोक के भाव गबन हो रहा है । श्रम कानून भी सरकार ने बदल दिए ।

किसानों की 3 कृषि कानून व बिजली बिल वापसी की मांग पर मुंह मोड़ने के साथ-साथ भारत सरकार ने निजी निवेशकों द्वारा खेती में पैसा लगाने में सहयोग करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये आवंटित किया है, जबकि किसानों की मांग थी कि सरकार खुद सिंचाई, मशीनों की आपूर्ति, मंडियों में सुधार, लागत की सब्सिडी, एमएसपी व खरीद आदि में निवेश करे।

देश के किसान एआईकेएससीसी के नेतृत्व में कई सालों से सी 2.5 फीसदी के हर फसल के एमएसपी और हर किसान से खरीद तथा सभी किसानों, खेत मजदूरों, आदिवासियों की कर्जमाफी के लिए लड़ते रहे हैं। पर इन्हें हल करने के लिए मोदी सरकार 3 अध्यादेश और बिजली बिल 2020 को लेकर आई जिससे सभी वर्तमान सुविधाएं व सुरक्षाएं समाप्त हो जाएंगी और एक कानूनी ढांचा कारपोरेट व विदेशी कम्पनियों के मुनाफे का बनेगा। इससे खेती की प्रक्रिया, लागत की बिक्री, मशीनरी, फसल की खरीद, भंडारण, परिवहन, प्रसंस्करण और खाने की बिक्री पर उनका कब्जा हो जाएगा। इससे किसानों पर कर्ज बढ़ेगा, आत्महत्याएं बढ़ेंगी, फसलें सस्ती होंगी, खाना मंहगा होगा और जमाखोरी व कालाबाजारी बढ़ेगी।

तथ्य दिखाते हैं कि मोदी का गुजरात का किसानों के लिए विकास माॅडल पूरी तरह विफल रहा है। 2001 से 2011 के बीच एनएसएस रिपोर्ट के अनुसार 3.55 लाख जमीन वाले किसान गायब हो गये और 17 लाख कृषि मजदूर बढ़ गये। अध्ययन बताते हैं कि ये कारपोरेट खेती जो निर्यात के लिए कराई गयी, उसके कारण हुआ। गुजारत आज भी सिंचाई के आभाव से त्रस्त है जबकि नर्मदा बांध का पानी उद्योगों व साबरमती रीवर वाटर फ्रंट के लिए भेजा जा रहा है। गुजरात के 9 किसानों पर पेप्सिकों कम्पनी ने उनका पेटेंट वाला बीज इस्तेमाल करने के लिए उन पर 1 करोड़ रुपये का दावा ठोक दिया।

प्रधानमंत्री व उनके मंत्री बार-बार बेतुका दावा कर रहे हैं कि किसान अपनी फसल कहीं भी बेच सकते हैं, किसी भी दाम पर बेच सकते हैं, कम्पनियां उन्हें बेहतर दाम देंगी। यह केवल सीधे व अंजान लोगों को गुमराह करने और किसानों की मांग के प्रति दुर्भावना फैलाने के लिए है। कम्पनियां केवल मुनाफे के लिए निवेश करती हैं और किसान स्थानीय बाजार में ही फसल बेच सकता है।

महापात्र ने बताया कि आन्दोलन के अगले चरण में 25 जनवरी को सभी संगठन मशाल जुलूस निकलेंगे । इसके पूर्व सभी लोगों ने सुबह नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर इस लड़ाई को मजबूत करने का संकल्प लिया ।