PSC के सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में बीजेपी ने उठाया सवाल, लगाया अनियमितता का आरोप,की न्यायिक जांच की मांग

रायपुर(खबर वारियर)- छत्तीसगढ़ राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सहायक प्रध्यापक भर्ती परीक्षा 2019 में प्रारम्भ से बड़ी अनियमितता सामने आ रही हैं चंद दिनों पहले एक अभ्यर्थी ने आरोप लगाया है कि परीक्षा केंद्र में एक रोल नंबर वाला अभ्यार्थी उसके पीछे अनुपस्थित था, लेकिन साक्षात्कार के लिए उसका चयन हो गया है जो अनेक आशंकाओं को जन्म दे रही है।
राज्य लोक सेवा आयोग में भारी अनियमितताओं व भ्रष्टाचार की आशंकाओं को इस बात से और बल मिलता हैं जब छत्तीसगढ़ लोकसेवा आयोग उक्त विषय पर स्वयं को क्लीन चिट दे रहा हो।
सहायक प्रध्यापक भर्ती परीक्षा 2019 में अनुपस्थित अभ्यर्थी का नाम आना, परीक्षा केंद्र में वीडियो ग्राफी नहीं कराया जाना राज्य लोकसेवा आयोग की कार्यप्रणाली व विश्वशनियता पर सवाल खड़ा करता हैं.
छत्तीसगढ़ राज्य लोक सेवा आयोग की विश्वशनियता पर तब और भी सवाल कड़े हो जाते हैं और भ्रस्टाचार की आशंकाओं से इनकार नहीं किया जा सकता जब स्वयं सरकार के एक संसदीय सचिव द्वारा पीएससी में गड़बड़ी की बात स्वीकारी जाती हैं.
छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा हैं की जिस संस्था पर अनियमितता और गड़बड़ी के आरोप लग रहे हों वही संस्था बिना देर करे अपने आपको क्लीन चिट दे रही हैं यह कैसे संभव हैं।
विषय की गंभीरता और छत्तीसगढ़ के युवाओं के हित को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी से सहायक प्रध्यापक भर्ती परीक्षा 2019 में अनियमितता एवं भ्रष्टाचार की न्यायिक जांच की मांग करती हैं।
साथ ही भारतीय जनता युवा मोर्चा प्रदेश के युवाओं के हित में छत्तीसगढ़ पीएससी से संबंधित विसंगतियां एवं सामाधान की दृष्टि से प्रदेश सरकार से मांग करती हैं-
विसंगतियां :-
1. विभिन्न स्रोतों के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती परीक्षा में अलग-अलग विषयों से कुल 105 प्रश्नों को विलोपित करने की बात आई है। अनेक अभ्यर्थियों का यह भी आरोप है कि दर्जन भर प्रामाणिक स्रोतों के रिफरेंस को भी नजरअंदाज किया गया है, नहीं तो विलोपित प्रश्नों की संख्या 200 से भी अधिक हो सकती थी। इस तरह की कार्यप्रणाली न्यायालय में याचिकाओं की स्थिति निर्मित कर सकती है और भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक विलम्ब हो सकता हैं जो प्रदेश के युवाओं के हित में नहीं होगा।
2. इसी तरह सहायक संचालक-कृषि की परीक्षा में 150 में से 14 प्रश्नों को विलोपित किये जाने की जरूरत पड़ी।
3. अनेक मामलों में अभ्यर्थियों ने पीएससी द्वारा गठित कुछ विशेषज्ञ समितियों द्वारा अडि़यल रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया है। दावा-आपत्ति के बाद भी मॉडल उत्तर में सुधार नहीं करने की स्थिति निर्मित हो रही है। 26 दिसंबर 2020 को स्वयं छत्तीसगढ़ पीएससी द्वारा ही एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गयी थी,जिससे स्पष्ट होता है कि 9 फरवरी 2020 को प्री-2019 की परीक्षा आयोजित हुई।
दावा-आपत्ति के बाद संशोधित मॉडल आंसर 29 मई 2020 को जारी किया गया। दावा-आपत्ति में अनेक युवा भाई-बहनों के तर्कों को नजरअंदाज किया गया,तभी वे माननीय उच्च न्यायालय की शरण में जाने को बाध्य हुये। उदयन एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ शासन का केस चला। युवाओं का तर्क सही था,तभी माननीय उच्च न्यायालय में उनकी जीत हुई और फिर से 5 सदस्यीय समिति पीएससी को गठित करनी पड़ी।
विशेषज्ञ समिति ने भी कई प्रश्नों में युवाओं के तर्क को सही पाया। और इसी कारण प्रश्न विलोपित कर नया मॉडल आंसर जारी करना पड़ा और अब 1 साल बीतने को है,पीएससी 2019 की मुख्य परीक्षा ही आयोजित नहीं हो पाई है। अभी तक तो डेट की भी घोषणा नहीं हुई है।
4. किसी भी परीक्षा के किसी प्रश्न-पत्र में न्यूनतम मानवीय भूल तो हो सकती है। लेकिन असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा में पूछा गया था कि तातापानी कहां हैं? मॉडल उत्तर में सूरजपुर लिया गया था। जबकि छत्तीसगढ़ के बच्चे बच्चे को पता है कि तातापानी तो बलरामपुर जिले में है। इस स्तर की बड़ी गलतियां कदापि स्वीकार्य नहीं हो सकती। ऐसे बड़ी गलती करने वाले तथाकथित विशेषज्ञ का नाम सार्वजनिक किया जाना चाहिये और ऐसे तथाकथित विशेषज्ञ को आजीवन ब्लैक लिस्टेड किया जाना चाहिये था।
5. यूपीएससी हर साल विभिन्न परीक्षाओं का कैलेंडर पहले ही जारी कर देती है। इसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश,मध्य प्रदेश जैसे अन्य राज्यों के लोक सेवा आयोगों ने भी अपने-अपने कैलेंडर जारी कर दिये हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ पीएससी ने कोई कैलेंडर ही जारी नहीं किया है। प्रीलिम्स में पास हुए अभ्यर्थी अभी मेन्स की तैयारी में लगे हुये हैं। मेन्स की तारीख का अभी तक अता-पता नहीं है प्रीलिम्स-2020 की तारीख घोषित हो गई है।
अभ्यर्थी प्रीलिम्स की तैयारी करे या मेन्स की? मेन्स-2019 पहले ही हो जाना चाहिये था। कैलेंडर फिक्स नहीं रहने से केंद्र और राज्यों की अनेक परीक्षाओं के साथ डेट क्लैस भी होता है। कैलेंडर फिक्स रहने की स्थिति में अभ्यर्थी अपने परीक्षाओं का चयन पहले से ही कर सकते हैं।
6. वन विभाग से संबंधित एसीएफ और रेंजर के लगभग 178 पदों के विज्ञापन में परीक्षाओं का अता-पता ही नहीं है। कैलेंडर नहीं होने के कारण ही यह सब स्थितियां निर्मित हो रही हैं।
7. अनेक मामलों में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा आरटीआई के अंतर्गत सूचना प्रदान न करने की स्थिति भी निर्मित होती रही है। अनेक सूचनाओं के लिए राज्य सूचना आयोग तक अभ्यर्थियों को जाना पड़ता है। इससे अनेक संदेह की परिस्थितियाँ निर्मित होती हैं।
विसंगतियों के सामाधान की दृष्टि से मांगे सामाधान :-
1. पीएससी में जारी विसंगतियों की न्यायिक जांच समिति गठित करके एक माह के भीतर जांच सुनिश्चित की जाये।
2. सबसे पहले किसी भी हालत में 2014 से चले आ रहे इस श्रेष्ठ परिपाटी को बरकरार रखा जाये कि प्रत्येक संविधान दिवस अर्थात् 26 नवम्बर को पीएससी का विज्ञापन जारी हो जाये। और अगले प्रीलिम्स से पूर्व किसी भी स्थिति में पहले साल की परीक्षा पूर्ण कर ली जाये।
3. 26 नवम्बर को ही आने वाले वर्ष के लिये पूरे साल का कैलेण्डर जारी कर दिया जाये।
4. मानक पुस्तकों और प्रामाणिक शासकीय दस्तावेजों पर आधारित आंकड़ों को प्रश्रय देने की संस्कृति का विकास किया जाये।
5. किसी भी भर्ती परीक्षा के पूर्व,स्तरीय प्रश्न तैयार कराके उनके विकल्पों को परीक्षा पूर्व ही विशेषज्ञों से जाँच करा लिया जाये। ताकि गलतियों की आशंकायें और मानवीय भूल न्यूनतम हो जायें।
6. देश और दुनिया में चल रहे उच्चतम श्रेणी के विशेषज्ञता युक्त कौशल को पीएससी के साथ जोड़ा जाये। ताकि ‘‘तातापानी’’ जैसी हास्यास्पद स्थितियाँ उत्पन्न न हों।
7. पारदर्शिता की दृष्टि से उत्तर पुस्तिकाओं की कार्बन कापी प्रदान करना प्रारंभ किया जाये।
8. सूचना प्रदान करने में पीएससी द्वारा उदासीनता न बरती जाये।
9. आयोग में एक तो त्रुटियाँ कम हों और यदि हों तो आयोग के विशेषज्ञ हठधर्मिता के बजाय संवेदनशीलता से तत्काल निराकरण करें। इससे अभ्यर्थियों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और अनावश्यक विलम्ब से बचा जा सकेगा।
10. सबजेक्टिव पेपरों में भी जाँच के लिये मानक निर्धारित करके वस्तुनिष्ठता और समानता लायी जाये। और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाये।
11. अभी प्रदेश में 16 परीक्षा केन्द्र हैं। प्रत्येक जिले में एक अर्थात् 28 परीक्षा केंद्रों की तत्काल घोषणा की जाये। कम से कम प्रीलिम्स परीक्षा की दृष्टि से तो 28 केन्द्र होने ही चाहिये।



