छत्तीसगढ़

शिक्षाकर्मी संविलियन मामले में शिक्षा विभाग करे उच्च न्यायालय के आदेश का पालन, पुरानी सेवाओं की गणना के लिए संघ ने की ये मांग

रायपुर(खबर वारियर)- प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बधेल द्वारा प्रदेश के शिक्षा कर्मियों का संविलियन कर उन्हें शिक्षक (एल.बी.) स्थानीय संस्थाएं बनाया। इसके पूर्ववर्ती सरकार द्वारा भी लगभग 1 लाख शिक्षा कर्मियों का संविलियन किया गया था जो वर्ष 1996 तथा 1998 से पंचायत विभाग के अधीन छग. पंचायत राज अधिनियम के उपबंधों के अधीन सेवारत् थे।

जिनका संविलियन 01 जुलाई 2018 को सशर्त किया जाकर यह लेख किया गया कि इनकी सेवाएं संविलियन दिनांक से मान्य होगी। इसका दुष्परिणाम है कि लगभग आधे से ज्यादा सेवा 20-22 वर्षो की सेवाएं डूबत खाते में चली गई।

कांकेर जिले के नरहरपुर शाला के शिक्षक साथियों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में प्रस्तुत याचिका में नियुक्ति दिनांक से सेवा की गणना करने का निर्देश सचिव स्कूल शिक्षा विभाग एवं जिला शिक्षा अधिकारी कांकेर को दिया है। इस आदेश का पूरे प्रदेश में पालन सुनिश्चित करने की मांग छग.प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संध ने मुख्यमंत्री से की है ताकि जन धोषणा पत्र में किए गए वादे का भी पालन हो सके।

संध के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार झा एवं जिला शाखा अध्यक्ष इदरीश खाॅन ने बताया है कि शिक्षा कर्मियों का पूर्ववर्ती शासन में 1 जुलाई 2018 को लगभग 01 लाख शिक्षा कर्मियों का जिनकी सेवाएं 8 वर्ष से अधिक हो चुकी थीं, संविलियिन करने का आदेश किया था। तब उक्त शिक्षक 1996 से 1998 को नियुक्त शिक्षा कर्मी थे। उसके बाद वर्तमान् सरकार ने चुनाव पूर्व अपने जन धोषणा पत्र में संविलियन का वादा किया था तथा लगभग शेष बचे 80 हजार शिक्षा कर्मियों को दो किश्तों में क्रमशः 01 जनवरी 2020 एवं 01 नवंबर 2020 को संविलियन करने का आदेश जारी किया। किंतु इसमें में पुरानी सेवाएं को शामिल नहीं किया गया।

संध हमेशा 1.10.1963 में नगरीय निकाय से शिक्षा विभाग में किए गए संविलियन का उद्वरण प्रस्तुत करते हुए यह तर्क प्रस्तुत करते रहा है कि संविलियिन नहीं अपितु पंचायत विभाग से शिक्षा विभाग में सेवा का हस्तांतरण किया जावे, किंतु अतिजोश में शासन व शिक्षा कर्मियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। क्योंकि 1.10.1963 के पूर्व के हमारे पूर्वजों की 1963 के पूर्व की सेवाओं को भी शामिल नहीं किया गया जिससे आज भी जो जीवित है, उन्हें पेंशन में आर्थिक क्षति हो रही है।

चूंकि माननीय उच्च न्यायालय ने बस्तर के शासकीय शिक्षकों और व्याख्याताओं से जो 1998 से शिक्षक व व्याख्याता पद पर कार्यरत् है, उनसे पुरानी पेंशन स्कीम के तहत ही वेतन से कटौती करने का आदेश सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, सहित जिला शिक्षा अधिकारी कांकेर, विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी नरहरपुर को 3 माह में याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन का निकरारण करने हेतु आदेशित है।

राज्य शासन से संविलियनीकृत सभी लाखों शिक्षा कर्मियों के प्रकरण में भी इस आदेश को लागू करने की मांग संध के कार्यकारी अध्यक्ष अजय तिवारी, महामंत्री उमेश मुदलियार, संभागीय अध्यक्ष संजय शर्मा, प्रांतीय सचिव विश्वनाथ ध्रुव, अमर मुदलियार, नरेश वाढ़ेर, रामचंद ताण्डी, विमल चंद्र कुण्डू, सुरेन्द्र त्रिपाठी, दिनेश मिश्रा, आलोक जाधव, डाॅ. अरूंधति परिहार, सी.एल.दुबे, बी.पी.कुरील, जे.पी.जायसवाल, राजू गवई, आदि नेताओं ने मुख्यमंत्री भूपेश बधेल व शिक्षा मंत्री प्रेम सिंह साय से की है।

Related Articles

Back to top button