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वैश्विक अस्तित्व के लिए ‘राष्ट्रवाद’ की भावना का महत्वः खलीफा-राज की स्थापना के विरुद्ध एक कथानक

नेशनल (खबर वारियर)- ‘राष्ट्रवाद की अवधारणा उस विचार एवं ‘आंदोलन’ की ओर इशारा करती है जो किसी राष्ट्र के हितों को उसकी मातृभूमि पर तरजीह देती है राष्ट्रवाद में निहित अर्थ यह मांग करता है कि राष्ट्र स्वयं शासन चलाए जिसमें किसी भी प्रकार का बाहरी हरतक्षेप न हो, जिसे अपना निर्णय लेने की छूट हो तथा वह राष्ट्र अकेले ही प्राकृतिक तौर पर राजनैतिक-सत्ता का स्रोत हो। राष्ट्रवाद का उद्देश्य एक राष्ट्रीय पहचान बनाना व इसे कायम रखना है जो सांस्कृतिक, जातीय, भौगोलिक स्थिति, भाषा, राजनीति धर्म, परंपरओं तथा विश्वास का सांझा सामाजिक-चरित्र है जिसका इकलौते इतिहास में अटूट विश्वास होता है।

राष्ट्रवाद, राष्ट्र की पारंपरिका-संस्कृतियों व सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजकर उसके पोषण की मांग करता है। इसके अलावा, वह राष्ट्र की उपलब्धियों के प्रति गर्व महसूस करने की भावना को बढ़ाता है और देशभक्ति की भावना से जुड़ा होता है। दुनिया भर में राष्ट्रवाद की अवधारणा औद्योगिक क्रांति’ के साथ उपजी तथा बाद में यह ‘राष्ट्र-राज’ के वजूद में आने के साथ-साथ बढ़ती रही। इसका अर्थ यह भी है कि लोगों की समझ में यह परिवर्तन हुआ कि उनमें ये जिज्ञासा हुई कि ये कौन हैं और उनकी पहचान । इस ‘अपनेपन की भावना’ को कैसे परिभाषित किया जा सकता है। नए चिन्ह व प्रतीक, नए गीत व विचारों मे जाए संबंध बनाएं और विभिन्न समुदायों की सीमाओं को पुनः परिभाषित किया।

बहरहाल, पिछले कुछ वर्षों में देशों के बीच बढ़ते संबंधों के कारण, जो पहले व्यापार, कूटनीति तथा साइबर-स्पेस के क्षेत्रो में विकसित नहीं हो पाए थे, मे “राष्ट्रवाद’ की शक्ति को समाप्त कर दिया है। किन्तु, आज की भूमण्डलीय-दुनिया में ‘राष्ट्रवाद विभिन्न तरीकों से पुनः उभर रहा है और विश्व की राजनीति को प्रभावित कर रहा है। विभिन्नता से भरे देश जैसे इजरायल, फ्रांस, चीन इंग्लैण्ड और अमेरिका धीरे-धीरे आगे आकर अपने राष्ट्रवाद को बचाने की चेष्टा कर रहे हैं और विश्व की राजनीति में अपनी पहचान को पुनः स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं यहां राष्ट्रवाद-मात्र किसी ‘वस्तु की प्राप्ति की भावना के कारण विधमान नही है बल्कि यह संस्कृति, आषा, क्षेत्रवाद, जातीयता आदि कई प्रकार से मौजूद है। भारत में भाजपा सरकार के सता में आने के बाद सन् 2014 से ही राष्ट्रवाद’ पर एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है।

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