पुरानी पेंशन योजना हो लागू, अन्यथा 2004 के बाद नियुक्त प्रधानमंत्री, मंत्री,सांसदों, विधायकों का भी पेंशन हो बंद

रायपुर(khabar warrior)- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित बूढ़ातालाब धरना स्थल पर 01 नवंबर 2004 के बाद नियुक्त शासकीय सेवकों को पुरानी पेंशन योजना लागू कराने की एक सूत्रीय मांग के समर्थन में आयोजित एक दिवसीय प्रांतव्यापी धरना का छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संध ने संमर्थन किया है। संध के प्रांताध्यक्ष विजय कुमार झा ने धरना स्थल पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों की आलोचना करते हुए ‘‘एक देश‘‘ ‘‘एक कानून‘‘ ‘‘एक कानून-एक राशन कार्ड‘‘ की नीति को शासकीय सेवकों के लिए भी ‘‘एक देश-एक पेंशन‘‘ लागू करने की मांग करते हुए भारत के संविधान में कानून के समक्ष समानता के अधिकार को पेंशन में भी लागू किया जावे।
देश में 2004 के बाद नियुक्त शासकीय सेवकों को पुरानी पेंशन योजना लागू किया जावे अन्यथा 2004 के बाद निर्वाचित सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि व स्वयं प्रधानमंत्री को भी पेंशन से वंचित किया जावे। धरना स्थल पर ‘‘एक नेशन-एक पेंशन‘‘ ‘‘छोंड़ो टेंशन लेगें पेंशन‘‘ के गगनभेंदी नारे गुंजायमान् थे। सबसे ज्यादा आर्थिक क्षति व पेंशन से वंचित संविलियनीकृत शिक्षा कर्मी हुए है।
जिनकी पुरानी सेवा को राज्य सरकार ने डूबत खाते में डालकर 1 जुलाई 2018 संविलियन तिथी से ही सेवा की गणना कर रही है। 8-10-18 वर्षो की सेवाओं की क्षति से पेंशन, क्रमोन्नति, पदोन्नति में वैसे ही हानि हो रही है, जैसे संविलियन से हानि हुई है। पुरानी पेंशन के लिए केन्द्र व राज्य सरकार बराबर के दोषी है। राज्य सकार अपने चुनावी धोषणा पत्र का पालन करें व पेंशन लागू करंे। मांग पूरी न होने पर ऐतिहासिक आंदोलन करने का निर्णय लिया जावेगा।



