छत्तीसगढ़

नक्सली घटना में शहीद 22 जवानों में कर्मचारी संध अध्यक्ष का युवा पुत्र भी शामिल, संघ ने जताया दुख, की निंदा

रायपुर(khabar warrior)- छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संध ने बीजापुर में नक्सलियों के कायरतापूर्ण हमले में 22 जवानों के शहीद् होने की धटना की निंदा की है। इस धटना में संध के मालखरौदा तहसील अध्यक्ष श् राधेलाल भारद्वाज के युवा पुत्र जिनका एक वर्ष पूर्व ही विवाह हुआ था, दीपक भारद्वाज उपनिरीक्षक शहीद् हो गये है। प्रदेश के शासकीय सेवकों ने इस अमानवीय कृत्य की निंदा करते हुए, नक्सलियों से आरपार की लड़ाई लड़ने की मांग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बधेल से की है।
संध के प्रमुख संरक्षक पी.आर.यादव एवं प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार झा ने बताया है कि दीपक भारद्वाज प्रारंभ से ही होनहार बालक था।

उसके पिता मालखरौदा तहसील शाखा अध्यक्ष है। प्रदेश के 22 जवानों के शहीद् होने व संध अध्यक्ष के युवा पुत्र उपनिरीक्षक शहीद् दीपक भारद्वाज के प्राणोत्सर्ग पर प्रदेश के शासकीय सेवक गौरान्वित है। अब आतंकवाद, नक्सलवाद् से आर-पार करना ही इन शहीदों को सच्ची श्रद्वांजलि होगी। माता-पिता व पत्नी के लिए यह धटना इसलिए और पीड़ादायी है क्योंकि शहीद् दीपक भारद्वाज का विवाह 29 नवंबर 2019 को ही एक वर्ष पूर्व सम्पन्न हुआ था, उनके कोई संतान भी नहीं हुए है। ऐसी स्थिति में शहीद् होना परिवार के उपर दुख का पहाड़ टूटा है।

देश व प्रदेश की सरकार से संध के कार्यकारी अध्यक्ष अजय तिवारी, महामंत्री उमेश मुदलियार, जिला शाखा अध्यक्ष इदरीश खाॅन, बस्तर अध्यक्ष गजेन्द्र श्रीवास्तव, अतुल शुक्ला बिलासपुर अध्यक्ष जी.आर.चन्द्रा, दुर्ग अध्यक्ष विजय लहरे, महासमुंद अध्यक्ष ओम नारायण शर्मा, चांपाजांजगीर अध्यक्ष रामकिशोर शुक्ला, रायगढ़ संयोजक शेख कलीमुल्लाह खाॅन, सरगुजा अध्यक्ष आनंद सिंह, धमतरी अध्यक्ष कृष्णा साहू, बलौदाबाजार अध्यक्ष पी.हिरवानी, गरियाबंद अध्यक्ष देवकुमार पड़ोसी, बेमेतरा अध्यक्ष राजेन्द्र वर्मा, कोरबा अध्यक्ष जे.पी.उपाध्याय, एम.पी.आडे़, जी.एस.यादव, संभागीय संजय शर्मा, कलाम खाॅन पेड्रा, गौरेला, मरवाही अध्यक्ष आदि ने नक्सली धटना की निंदा करते हुए केन्द्र व राज्य सरकार की नक्सली समस्या में ढूलमूल नीति के प्रति आक्रोष व्यक्त किया है। संध ने आरोप लगाया है कि देश में दो प्रकार के कानून ने नक्सलियों के हौसले बुलंद है।

एक सामान्य नागरिक द्वारा हत्या करने पर आजीवन कारावास तथा नक्सलियों द्वारा खुलेआम हत्या करने के बाद समर्पण, लाखों रूपये सहायता, रोजगार, विवाह कर उन्हें उपकृत व प्रोत्साहित करने के कारण यह परिस्थिति उत्पन्न हुई है। संभव है इन 22 जवानों की हत्या करने वाले नक्सली 4 माह बाद समर्पण कर सरकार की पुर्नवास नीति का आर्थिक, सामाजिक, व्यवहारिक लाभ सीना तानकर प्राप्त करेगें, यह निंदनीय है।

Related Articles

Back to top button