सीएम बघेल ने आखिर ढूंढ़ निकाला मिट्टी से हीरा

(थनौद से गुलाब देशमुख की रिपोर्ट)

दुर्ग(khabar warrior)- वह मिट्टी से भगवान बनाता था जिसको बचपन में मिट्टी से गणेश की मूर्ति बनाने में सुकून मिलता था कभी दुर्गा की प्रतिमा तो कभी सरस्वती की प्रतिमा। यह बनाते- बनाते दिन निकल रहा था उसका नाम हो रहा था छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में उसकी मूर्तियां जाने लगी। कुछ ऐसा हुआ कि अब मूर्तियां उड़ीसा, महाराष्ट्र, बंगाल भी जाती है वह मूर्तिकार बस आकर्षक मूर्ति के लिए प्रसिद्ध हो रहा था उसने पूरे अपने समाज को इस मिट्टी से सराबोर कर दिया अपने समाज के लोगों को मिट्टी से दीए, मटके और मिट्टी से भगवान बनाना सिखाया, कईयों को मूर्तियों से ही स्वरोजगार और आत्मनिर्भर समाज बनाने की कोशिश की। जी हां नाम क्या है उनका जानना चाहते हैं??

कुम्हार समाज से ताल्लुक रखने वाले शिल्पग्राम थनौद निवासी मूर्तिकार बालम चक्रधारी को छत्तीसगढ़ शासन के माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष बनाकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सबको चौंका दिया है।

मिट्टी से भगवान के प्रतिरूप की जीवटता उकेरने वाले मूर्तिकार को सहसा यकीन भी नहीं हुआ होगा कि अदने से कलाकार-मूर्तिकार जो मूर्तियों में जान डालते हैं। उसके भी जीवन में कोई जान फूंक दे ऐसा हो गया कि मूर्तियां बना कर बेचकर जीवन यापन करने वाले एक आम आदमी को केबिनेट मंत्री के दर्जे वाले पद से सुशोभित कर दिया जाएगा।

सूबे में इस बात को लेकर चर्चा है कि क्या सामान्य आदमी भी कैबिनेट मंत्री का दर्जा वाले पद से सुशोभित हो सकता है तो जी हां यह हो सकता है 20 साल के इस छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार हो रहा है की एक मिट्टी से जुड़े हुए व्यक्ति को जो दिन भर गांव की गलियों में और अपने हाथों से अपने कर्म भूमि में मिट्टियों से प्रतिमा बनाते नजर आने वाले मूर्तिकार बालम अपने काम से जाने जाते थे।

आज वह जाने जाएंगे माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष के नाम पर यह पद पाकर खुशी के आंसू चेहरे पर जरूर देखे जा सकते हैं। बधाइयों का तांता लगने का क्रम कल से ही जारी है और हो भी क्यों ना मिट्टी से जुड़े आदमी की बात ही निराली होती है वे सब को मिलते हैं क्योंकि माटी की महक हर जगह होती है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा की गई इस नियुक्ति की क्षेत्र में जमकर तारीफ हो रही है और सामाजिक संतुलन बनाने की जो कोशिश है उसकी भी प्रशंसा की जा रही है और होना भी लाजमी है, छत्तीसगढ़ के इस 20 वर्ष के इतिहास में शायद ही ऐसा कोई फैसला किसी मुखिया ने लिया हो।

लेकिन एक कसक जरूर मूर्तिकार समाज को है जिन्हें कोरोना जैसे भयावह महामारी ने बर्बाद कर दिया है कई मूर्तिकार काल के आगोश में भी समा गए, कर्ज में भी डूब गए, जरूर अब चक्रधारी समाज को अपनी बात रखने का एक सशक्त माध्यम मिल गया है। या कहे यह दर्द जल्दी दूर होगी मूर्तिकारों और चित्रकारों की।

विदित हो कि ग्राम थनौद में बालम चक्रधारी के परिवार में अनेक मूर्तिकार पैदा हो गए कि आज यह गांव शिल्पग्राम के नाम से जाना जाता है। और अपनी आजीविका भी इसी से चलाते आ रहे हैं।

माटी कला बोर्ड अध्यक्ष बनने के बाद लोग बधाई शुभकामनाएं देने पहुंच रहें हैं। वे सहर्ष उन्हें स्वीकार कर रहे हैं।