“कही-सुनी”:- वरिष्ठ पत्रकार रवि भोई की कलम से

(12 SEPT-21)

“कही-सुनी”

  रवि भोई🖋️🖍️


कयासों के बीच भूपेश बघेल की बैटिंग

छत्तीसगढ़ में राजनीतिक धुंध अब भी छाए नजर आ रहे हैं। राज्य में करीब दो महीने से राजनीतिक गर्मी के बाद बादल अब बरसे तब बरसे जैसी स्थिति बनी हुई है। कयासों और अटकलों के बीच मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आक्रामक बैटिंग करते दिख रहे हैं। वे बड़े फैसले और घोषणाएं कर रहे हैं, पर आकाश अब भी साफ़ न होने से ब्यूरोक्रेसी के कदम थमे नजर आ रहे हैं।

कहते हैं मुख्यमंत्री निवास के तीजा उत्सव कार्यक्रम में टीएस सिंहदेव के ऐसे आयोजन आगे भी जारी रखने की बात का ब्यूरोक्रेसी और आम लोग अलग-अलग अर्थ निकाल रहे हैं।

टीएस सिंहदेव लंबे अर्से बाद छह सितंबर को सीएम हाउस गए। भूपेश बघेल के शक्ति परीक्षण कार्यक्रम से दूर रहने वाले मंत्री भी सीएम हाउस में नजर आए। कहते हैं तीजा उत्सव के लिए सीएम हाउस से सबको बुलावा आया था। तीजा उत्सव कार्यक्रम में एक महिला विधायक की सक्रियता चर्चा का विषय है। कहते हैं सक्रियता से इस महिला विधायक को प्रमोट करने वाले नेता को झटका लगा है।

नेताजी की लाइन कुछ अलग है।चर्चा है दिल्ली में शक्ति परीक्षण कार्यक्रम के लिए महिला विधायकों को एकजुट करने में भी कथित महिला विधायक की अहम भूमिका रही। कहते हैं पहली बार चुने गए विधायक भूपेश बघेल के साथ हैं , जबकि पुराने विधायक समय को परख रहे हैं। लेकिन सभी को आसमान खुलने का इंतजार है।

भूपेश सरकार की तारीफ़ पर तारीफ़

जम्मू-कश्मीर के वैष्णोदेवी में कांग्रेस नेता और सांसद राहुल गांधी से छत्तीसगढ़ के किसानों की अचानक भेंट और राहुल के सामने भूपेश सरकार की प्रशंसा सुर्ख़ियों में है ही । खबर है कि करीब दो दर्जन कांग्रेस विधायकों ने राज्य में भूपेश बघेल के नेतृत्व में अच्छे काम होने का पत्र मुख्यमंत्री को दिया है।

कहते हैं पिछले दिनों कांग्रेस के एक प्रवक्ता और राजीव भवन के एक छोटे कर्मचारी ने कांग्रेस नेता अजय माकन के कान में भूपेश सरकार की उपलब्धियों के मंत्र फूंके। चर्चा है कि प्रेस कांफ्रेंस के लिए आए माकन के सामने प्रवक्ता और कर्मचारी ने भूपेश सरकार की तारीफों के ऐसे पुल बांधे कि कुछ कांग्रेस नेताओं ने ही दांतों तले अंगुली दबा दी। अब लोग भूपेश सरकार के इस गुण -गान के तरह-तरह के मायने निकाल रहे हैं।

केबल के धंधे में शेर को सवा शेर ?

कहते हैं कि छत्तीसगढ़ में एक बार फिर केबल वार की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। वैसे छत्तीसगढ़ में केबल वार कोई नया नहीं है। जब से राज्य बना है , तब से केबल के धंधे में अलटी-पलटी का खेल चल रहा है। इस धंधे में लगे लोग कभी-दोस्त तो कभी दुश्मन बन जाते हैं।खबर है कि कांग्रेस सरकार के करीबी कहे जाने वाले दो लोग जोर आजमाइश में लग गए हैं। चर्चा है कि इस धंधे में अभी जमे व्यक्ति ने कुछ साल पहले अपने दमख़म से दूसरे केबल वालों को उखाड़ फेंका था। कहा जा रहा है अब शेर को सवा शेर मिल गया है।

भाजपा में स्थानीय और बाहरी की लड़ाई

कहते हैं रायपुर जिला भाजपा में स्थानीय और बाहरी की लड़ाई तेज हो गई है।कहा जा रहा है इस मुद्दे पर भाजपा के एक पूर्व मंत्री ने जिले के पदाधिकारी को बड़ी खरी-खोटी भी सुनाई और समाज की राजनीति करने या पार्टी की राजनीति करने की नसीहत भी दे डाली। चर्चा है सोशल मीडिया से शुरू लड़ाई ने पार्टी के भीतर ही बवाल खड़ा कर दिया है।

एक समाज प्रमुख पर टिप्पणी के मसले पर भाजपा से जुड़े दो लोगों की गिरफ्तारी ने जिला भाजपा में फूट पैदा कर दिया और मुद्दा स्थानीय और बाहरी का हो चला है।

भाजपा से जुड़े दोनों जब जेल से छूटे तो एक वर्ग ने उनका विजेता की तरह स्वागत किया। खबर है कि दोनों के स्वागत के लिए जेल के द्वार पर सैकड़ों लोग खड़े थे। कहा जा रहा कि स्थानीय और बाहरी की लड़ाई भाजपा के भीतर कहीं लंबी दरार न पैदा कर दे।

धर्मांतरण के मुद्दे से भाजपा के बल्ले-बल्ले

कहते है राज्य में धर्मांतरण की ख़बरों से भाजपा के हाथ पारस लग गया है। राज्य की कांग्रेस सरकार को घेरने के लिए भाजपा बड़े दिन से अच्छे मुद्दे की तलाश में थी, शासन-प्रशासन की रणनीतिक चूक से उसे सरकार पर हमले के लिए धर्मांतरण का मुद्दा मिल गया। धर्मांतरण का विषय भाजपा के लिए शुरू से संजीवनी बूटी रहा है, फिर से यह मुद्दा हाथ लगने से पूरी पार्टी रिचार्ज हो गई, दिख रही है।

कहा जा रहा है एक पूर्व मंत्री को पार्टी ने ही हासिए में डाल दिया था, इस मुद्दे ने उनमें प्राणवायु जैसा काम किया और उन्हें फिर से अग्रिम पंक्ति में आने का मौका मिल गया। धर्मांतरण के विषय के बहाने भाजपा नेता सक्रियता दिखा रहे हैं तो कार्यकर्त्ता भी जोशीला बन गए हैं। इस मुद्दे पर भाजपा लगातार सड़क पर संघर्ष करते अपनी ताकत दिखाने और कांग्रेस को पटखनी देने के मूड में लगती है।

आनन -फानन क्यों हटाया गया अजय यादव को ?

चर्चा थी कि अजय यादव को रायपुर एसएसपी से दुर्ग रेंज का प्रभारी आईजी बनाया जा सकता है,लेकिन पुरानी बस्ती थाने में पादरी की पिटाई की घटना ने अजय यादव को पुलिस मुख्यालय पहुंचा दिया। 2004 बैच के आईपीएस अजय यादव जनवरी 2022 में आईजी के पद पर पदोन्नति के लिए पात्र हो जाएंगे। सवाल यह है कि जब 2003 बैच के आईपीएस पात्र होने के आठ माह बाद भी आईजी नहीं बन पाए तो 2004 वालों का नंबर कब आएगा ?

2004 बैच के आईपीएस बद्रीनारायण मीणा दुर्ग के एसएसपी बनाए गए हैं। प्रतिनियुक्ति से लौटकर मीणा को लंबे इंतजार के बाद जांजगीर-चांपा जिले का अस्थायी प्रभार मिला था, पर अब उन्हें वीवीआईपी जिले की कमान मिल गई।

वैसे कहा जा रहा है कि अजय यादव को सरकार ने ऊपरी दबाव के चलते आनन-फानन में रायपुर एसएसपी के पद से हटा दिया। कहते हैं अजय यादव रायपुर में वैसा काम नहीं कर पा रहे थे, जैसे उन्होंने दूसरे जिलों में खुलकर काम किया था।

अजय यादव पर गाज से रायपुर की पुलिस कितनी चुस्त और सक्रिय होती है, यह तो समय बताएगा, लेकिन उनको हटाने से भाजपा को सरकार पर हमला करने लिए हथियार मिल गया।

जिलों की सीमा पर राजनीति

कहते हैं नए जिलों के गठन से भाजपा-कांग्रेस के कई नेताओं की राजनीति सिमट कर रह जायेगी या चौपट हो जाएगी। इसके चलते कुछ नेता किसी गांव या ब्लाक को नए जिले शामिल न करने का दांव चल रहे हैं। चर्चा है सक्ती जिले के दायरे में आने वाले कुछ गांव के लोग जांजगीर जिले से अलग नहीं होना चाहते, तो जांजगीर जिले के कुछ सक्ती जिले में शामिल होना चाहते हैं। मोहला जिला मुख्यालय बनने से छुरिया के लोग दूरी बढ़ने की बात कर रहे हैं और राजनांदगांव को नजदीक बता रहे हैं। अब देखते हैं सरकार क्या हल निकालती है ?

वैसे भूपेश सरकार ने चार नए जिले सक्ती, मनेंद्रगढ़, सारंगढ़ और मोहला के लिए बजट आबंटन कर दिया है। इसके साथ ही नए जिलों के गठन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। किस जिले में कौन सा ब्लाक और गांव जाएंगे, वह भी तय हो जाएगा।

(-लेखक, पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)