डायन के सन्देह में महिला प्रताड़ना के सात हजार मामले, अट्ठारह सौ हत्याएं. शर्मनाक. डॉ. दिनेश मिश्र

साइंस फ़ॉर सोसायटी- व्याख्यान -झारखंड

रायपुर (खबर वारियर) छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ एवं अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ .दिनेश मिश्र ने साइंस फ़ॉर सोसायटी झारखंड के द्वारा आजादी के 75 वर्ष के अवसर पर आयोजित व्याख्यान में “डायन हत्या ,अंधविश्वास से मुक्त झारखंड का निर्माण, चुनौतियां और समाधान” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि  झारखंड में अभी भी डायन प्रताड़ना,जादू टोने के सन्देह में महिलाओं प्रताड़ना के अनेक मामले है , आर टी आई और अन्य माध्यमों से मुझे जानकारी मिली है कि झारखंड में 7हजार से अधिक मामले डायन के सन्देह में महिला प्रताड़ना के है जिनमें से 1800 सेअधिक महिलाओं की हत्या हुई है।

अंधविश्वास एवं सामाजिक कुरीति के कारण होने वाली यह घटनाएं सभ्य समाज के लिए अत्यंत शर्मनाक है। निर्दोष महिलाओं को इस अंधविश्वास और प्रताड़ना से बचाने के लिए समाज के हर व्यक्ति को आगे आना चाहिए।

डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा देश के 17 प्रदेशों
में अंधविश्वास,जादू टोने की मान्यता के कारण महिलाओ के साथ प्रताड़ना की घटनाएं घटती है, और उनके मानवाधिकार हनन के मामले सामने आते है,जो चिंतनीय है ।

झारखंड, बिहार, ओडिसा, असम, राजस्थान, हरियाणा छत्तीसगढ़ में ऐसी घटनाओं के समाचार अक्सर सुनाई पड़ते है ।
डॉ दिनेश मिश्र ने कहा महिला प्रताड़ना और उनके मानवाधिकार हनन के कारणों में एक प्रमुख कारण अंधविश्वास और डायन के संदेह में प्रताड़ना भी है समाचार माध्यमों और प्रत्यक्ष रूप से मिलती ऐसे मामलों की जानकारी कोई छिपी बात नहीं है पर यह महिलाओं के अधिकारों, को लेकर किये जाने वाले दावों और वास्तविकता स्थिति के संबंध भिन्नता बताती है ।महिला प्रताड़ना के अनेक मामलों में तो उन्हें मानव या इंसान ही नही समझा जाता और उन्हें मानव अधिकार देने के दावे झूठे साबित हो जाते है,प्रताड़ना इतनी अधिक की अनेक महिलाओं की मृत्यु घटनास्थल पर हो जाती है ।

डॉ दिनेश मिश्र ने कहा अशिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और ,वैज्ञानिक जागरूकता की कमी ,गैर जरूरी,परंपराओं को आंख मूंद कर पालन करने की आदत से न ही अंधविश्वास खत्म हो पाते हैं और न ही पीड़ितों को राहत मिल पाती है । देश के 17 प्रदेशों में डायन ,चुड़ैल ,जैसे अंधविश्वास के कारण होने वाली घटनाएं नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो में भी दर्ज होती रही हैं.पर न जाने क्यों वे शासन प्रशासन की योजनाओं की प्राथमिकता की सूची में नहीं आ पाती।

अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा झारखंड के 24 जिलों में सात हजार से अधिक मामले तथा 1800 से अधिक हत्या कर मामले पुलिस में हैं जिनमें से गढ़वा जिले के 795,पलामू जिले के299, हजारीबाग के 287,रांची जिले के112 मामले है. बाकी अन्य जिलों के भी सैकड़ों मामले हैं।

डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा गरीब परिवार ,विधवा, परित्यक्ता, बेसहारा, महिलाएं ऐसी प्रताड़ना की शिकार अधिक हुई हैं उनमें में 40 से 60वर्ष की महिलाओं की संख्या अधिक है , डायन प्रताड़ना के मामलों प्रताड़ना के तौर तरीके बड़े ही क्रूर है, हमने पाया है कि गला काटने, जिंदा जला कर मारने, चारों ओर से घेर कर पीटने से मौतें हुई हैं वही ईमली के से ,डंडे ,पत्थर ,हाथ पैर से मारने के भी मामले हैं।

अनेक मामलों में तो किसी बैगा के कहने पर उन्हें आग का घेरा पार करने, बीमार को ठीक करने, मृतक को पुनर्जीवित करने को कहा गया और असफल होने पर उनके साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया जिसमें सिर के बाल काटने, मुंह काला करने, दांत तोड़ने, जीभ काटने, आंख फोड़ने जैसी अमानुषिक अत्याचार किया कुछ मामलों में तो वे घटनास्थल पर रात भर पड़ी रही उनकी मृत्यु हो गयी ,तो कभी उन्हें अस्पताल भी ले जाने नही दिया गया।

मेरा अनेक स्थानों पर जाना हुआ उनसे मुलाकात होती है ,उनके परिजनों से बात होती है वे बताते है ऐसी घटनाओं के बाद उनका गाँव मे रहना भी दूभर हो जाता है लचकेरा की एक महिला तो सालों घर से बाहर नहीं निकली, उसे किसी भी इंसान से,किसी भी आवाज से डर लगता था, बहुत दिनों बाद नॉर्मल हो पाई।

डॉ. मिश्र ने कहा कि अंधविश्वास दो प्रकार के हैं एक तो वे जो सामाजिक परंपराओं से जुड़ते गए और दूसरे जो बीमारियों और उनके इलाज को लेकर हैं ,जादू टोना, भूत प्रेत,सूर्य ग्रहण,अमावस्या, नजर लगना, आँख फड़कना ,बिल्ली के रास्ता काटने, छीकने, दिशा शूल, ग्रहोंके सम्बंध में शुभ अशुभ ,जैसी मान्यताएं हावी रहीं,वहीं दूसरे प्रकार के अंधविश्वास बीमारियों और उनके कारणों व उनके उपचार के सम्बंध में हैं।

बीमारियों के कारण संक्रमण, कुपोषण और दुर्घटनाएं है.जिनमे से संक्रमण बैक्टीरिया, फंगस, वायरस से होता है.कुपोषण से बचने के लिए सन्तुलित ,पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है,तथा दुर्घटनाओं से बचाव के लिए सावधानी ,सतर्कता जरूरी है.पर अंधविश्वास एवं भ्रम के कारण आज भी अनेक लोग बीमारियों का कारण जादू टोना,नजर लगना, तन्त्र, मन्त्र मानते हैं ,और इसी लिए उसके उपचार के लिए बैगा, गुनिया, झाड़ फूँक के फेर में आ जाते हैं,और बैगा के बहकावे में आकर अंधविश्वास में पड़कर गलत कार्यों को अंजाम देते हैं.जिससे डायन प्रताड़ना, बलि,ठगी, जैसी घटनाएं होती हैं।

मिश्र ने कहा हमारी संस्कृति में महिलाओं की पूजा करने की बात कही गयी है वही दूसरी ओर ऐसी घटनाएं निर्दोष महिलाओं के जीवन के लिए ही खतरा बन जाती हैं. डायन के संदेह में प्रताड़ना के निर्मूलन , उनके सामान्य मानवाधिकारों के हनन की रोकथाम के लिए सामाजिक जागरूकता अभियान चलाने जनजागरण सभाएं करने ,युवाओं और छात्रों को सम्मिलित करने,स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने व सक्षम कानून बना महिलाओऔर सभी प्रताडितों के अधिकारों की रक्षा की जा सकती है ।

झारखंड में डायन प्रताड़ना निरोधक कानून भी है, जिसके पूरे ग्रामीण अंचल में प्रचार प्रसार करना ,ग्राम पंचायतों में पोस्टर लगवाना आवश्यक है.डायन के सन्देह में प्रताड़ित महिलाओं के उपचार, मुआवजे ,निवास पुनर्वास, रोजगार, की व्यवस्था करने की आवश्यकता है ,साथ ही ऐसे मामलों के लिए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बना कर महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने की जरूरत है ।

प्रदेश सरकार को डायन के संदेह में प्रताड़ित महिलाओ के अधिकारों और उनके जीवन की रक्षा के लिए ठोस पहल करने की आवश्यकता है ताकि। झारखंड में डायन के सन्देह में प्रताड़ना बंद हो ,हत्याए रुकें प्रताडितों को राहत और न्याय मिल सके .व्याख्यान के बाद प्रश्नोत्तर सत्र हुआ कार्यक्रम का संचालन साइंस फॉर सोसायटी झारखंड के महासचिव डी एन एस आनन्द ,आभार प्रदर्शन राजकुमार ने किया।