राजधानी

महंगाई भत्ता एवं गृह भाड़ा भत्ता की मांग को लेकर मंत्रालय में हुआ जंगी प्रदर्शन,मुख्य सचिव ने मांगों को पूर्ण करने का दिलाया भरोसा

रायपुर (खबर वारियर) छत्तीसगढ़ मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष महेन्द्र सिंह राजपूत के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमण्डल जिसमें उपाध्यक्ष हीराचंद बघेल, सचिव कांति सूर्यवंशी, संयुक्त सचिव मनोज साहू, कोषाध्यक्ष पवन कुमार साहू, सदस्यद्वय उमेश सिंह एवं विष्णु मोंगराज सहित पूर्व अध्यक्ष कीर्तिवर्धन उपाध्याय, संरक्षकद्वय तीरथराम साहू एवं तीरथलाल सेन, इन्द्र देवदास ने मुख्य सचिव अमिताभ जैन को ज्ञापन सौंपकर 31 प्रतिशत महंगाई भत्ता एवं सातवें वेतनमान के अनुसार गृह भाड़ा भत्ता दिये जाने की मांग की।

प्रतिनिधिमण्डल ने मांगों के संबंध में मंत्रालय के क्रमशः संयुक्त सचिव, उपसचिव, अवर सचिव, अनुभाग अधिकारी एवं अन्य सभी संवर्ग के कर्मचारियों द्वारा दोपहर भोजनावकाश के समय मंत्रालय के डी-गेट के बाहर किये गये प्रदर्शन की जानकारी मुख्य सचिव को दी।

संघ की  मांग पर मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने संघ को दिलाया भरोसा,

मंत्रालय के डी-गेट में आयोजित आमसभा एवं जंगी प्रदर्शन में संघ के अध्यक्ष महेन्द्र सिंह राजपूत ने सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने वर्ष 2021 को छत्तीसगढ़ राज्य के कर्मचारियों के हितों में महत्वपूर्ण निर्णय लिये जाने का वर्ष कहा था किन्तु, एक साल बीत जाने के बाद भी अभी तक केन्द्र के समान 31 प्रतिशत महंगाई भत्ता एवं सातवें वेतनमान के अनुसार गृह भाड़ा एवं अन्य भत्ते सरकार द्वारा नहीं दिये जाने से मंत्रालय सहित प्रदेश के समस्त कर्मचारी नाराज हैं।

मंत्रालय में किये गये जंगी प्रदर्शन की आमसभा को संबोधित करते हुए उपाध्यक्ष हीराचंद बघेल, सचिव कांति सूर्यवंशी, संयुक्त सचिव मनोज साहू, पूर्व अध्यक्ष कीर्तिवर्धन उपाध्याय, संरक्षकद्वय तीरथराम साहू एवं तीरथ लाल सेन ने मंत्रालय के कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि संघ के द्वारा कर्मचारी हित में महंगाई भत्ता एवं गृह भाड़ा भत्ता की मांग को पूरा कराने के लिए हर प्रकार का भरसक प्रयास किया जा रहा है।

इस संदर्भ में प्रदेश के विभिन्न कर्मचारी संगठनों के साथ-साथ मंत्रालयीन कर्मचारी संघ एवं मंत्रालय के कर्मचारियों ने भी आज यह संकल्प लिया कि यदि यह मांगे पूरी नहीं होती हैं तो आगामी 11 मार्च को बूढ़ा तालाब के धरनास्थल में मंत्रालयीन कर्मचारी भी सम्मिलित होंगे। इसके बाद भी अगर शासन ने मांगे पूर्ण नहीं की तो मंत्रालय सहित प्रदेश के सभी कार्यालयों के कामकाज ठप्प करने को मजबूर होंगे।

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