राजधानी

धरना स्थल बदलने के पूर्व राजनैतिक दलों, कर्मचारी संगठनों व मीडिया से हो सार्थक संवाद – विजय झा

रायपुर ( खबर वारियर) छत्तीसगढ़ प्रदेष तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने बूढ़ातालाब धरना स्थल को बदलने के जिला एवं पुलिस प्रषासन के प्रयासों को अनुचित बताते हुए इस संबंध में कोई भी निर्णय लेने के पूर्व प्रदेष के राजनैतिक दलों के नेताओं, कर्मचारी संगठनों, तथा प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया के प्रतिनिधियों से भी संवाद करने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए।

समाचार पत्रों में स्थल चयन होने व तैयारी होने का समाचार मिलने से धरना स्थल बदलने के विरोध में स्वर उठने लगे है।

संघ के प्रदेष अध्यक्ष विजय कुमार झा, जिला षाखा अध्यक्ष इदरीष खाॅन ने बताया है कि छत्तीसगढ़ राज्य बनने व राज्य की राजधानी रायपुर बनने के पूर्व से लगभग 25-30 सालों में धरना स्थल 3-4 बार बदला जा चुका है। कालांतर में जयस्तंभ चैक में धरना दिया जाता था। इसके पश्चात शास्त्री चौक, नगर धड़ी चौक में धरना स्थल था। शहर की आबादी बढ़ने व वाहनों की संख्या में बेतहाशा वृद्वि होने के कारण धरना स्थल जयस्तंभ चौक,शास्त्री चौक, अंबेडकर चौक में वाहनों के दबाव व यातायात का दबाव बढ़ने के कारण मोतीबाग प्रेस क्लब के सामने धरना स्थल बनाया गया।

राज्य निर्माण के बाद स्वाभाविक रूप से लोकतंत्र में धरना,प्रदर्शन, रैली शासन प्रशासन का ध्यान आकृट करने तथा जनमानस में शासन की नीतियों के प्रस्तुतीकरण हेतु आवष्यक अंग है। इसी बुढ़ातालाब धरना स्थल का चयन किया गया जहां चारो दिशाओं में आवागमन की सुविधा, धरना स्थल मुख्य मार्ग के अंदर व सामने तालाब पानी की व्यवस्था को दृष्टिगत् रखते हुए, धरना रैली की स्थिति में अन्य दिशाओं के मार्गो से आवागमन की व्यवस्था हो जाने के कारण चयन किया गया। राजनैतिक दलों के नेतागण भी इसी धरना स्थल पर धरना प्रदर्षन कर ही सत्ता की उचाईयों कों प्राप्त किए है। ऐसी स्थिति में प्रदेश के राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों, कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधियों व प्रेस प्रिंट व इलेक्टानिक मीडिया के प्रतिनिधियों से चर्चा करने के बाद ही धरना स्थल बदलने व नवीन स्थल चयनीत करने के संबंध में निर्णय लिया जाना चाहिए।

जहां तक सराफा ऐशोसिएशन का यह आरोप की व्यवसाय प्रभावित होता है, इसलिए तर्क संगत प्रतीत नहीं होता है क्योंकि धरना स्थल पर कोई भी बड़े धरना परदर्शन होने पर अनेक ठेलों में फल, बैग, साड़ियां, जूते – चप्पल सहित अनेक रोजमर्रा व  जीवनोपयोगी वस्तुओं की बिक्री बड़ी मात्रा में करके छोटे व्यापारी अपना जीवन यापन करते है। धरना प्रदर्षन करने आए अन्य जिलों के प्रदर्शनकारी  हजारों रूपये एकत्र कर रायपुर आते है,और सभी राशि राजधानी में खर्च कर अपना खजाना खाली कर वापस लौटते है। ऐसी स्थिति में व्यापारियों को आर्थिक क्षति स्वीकारार्य नहीं है।आम नागरिकों को यातायात की परेशानी अवश्यम्भावी   होता है। उनके लिए चारों दिषाओं में पृथक पृथक मार्ग से आवागन संचालित हो जाता है।

धरना प्रदर्षन शहर के बाहर करने पर ‘‘जंगल में मोर नाचा किसने देखा‘‘ वाली कहावत् चरितार्थ होगी। बिना धरना प्रदर्षन के शासन प्रशासन पीड़ित, शोषित्, परेशान नागरिकों की समस्याओं को नहीं सुनती है। आधे आंदोलन तो केवल अफसरशाही के कारण होता है। यदि जिम्मेदार अधिकारी उचित समस्याओं का अपने स्तर पर नियमानुसार कार्यवाही कर निराकरण कर देें तो आधे धरना प्रदर्शन की आवष्यक्ता नहीं होगी।

संघ के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष अजय तिवारी, महामंत्री उमेश मुदलियार, संभागीय अध्यक्ष संजय शर्मा, विमल चंद्र कुण्डू रामचंद्र ताण्डी, सुरेन्द्र त्रिपाठी, रविराज पिल्ले, आलोक जाधव, प्रकाश ठाकुर, एम.पी.आंड़े, नरेश वाढ़ेर, संजय झड़बड़़े, स्वास्थ संयोजक संध के प्रांतीय अध्यक्ष टार्जन गुप्ता, संभागीय सचिव प्रवीण ढीढवंशी, दिनेश शर्मा आदि नेताओं ने मुख्यमंत्री भूपेश बधेल से इस संबंध में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

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