भ्रूण हत्या पाप नही महापाप,कन्या दान का सौभाग्य खोलती है भाग्य का द्वार : मीनाक्षी देवी वैष्णव

दुर्ग (खबर वारियर) तृष्णा, अहंकार, और निरर्थक कामनाओं के वशीभूत मनुष्य अंधविश्वास में फंस जाता है, और जब उसका सार्थक परिणाम नही मिलता, तब समाज में, धर्म के प्रति आस्था का क्षरण होता है।शास्त्रों में निहित बातें जीवन को संवारने का कार्य करती है, समाज को पोषित करती है, बशर्ते उसका गलत व्याख्या न हो।
हमारा सनातन धर्म कहीं पर भी आडंबरवाद का पोषण नही करता है , निश्छल भाव से भगवान से कोई एक रिस्ता जोड़ लो, भाई का, बहन का पुत्र का, मित्र, सखा सखी का और जीवन भर उसका निर्वहन वैसे ही करो जैसे सांसारिक रुप में करते हैं। प्रभु सानिध्य का लाभ आप स्वं महसूस करने लगेंगे, जीवन में हर क्षण उत्सव होगा।

ग्राम चंगोरी के पावन धरा में आयोजित भागवत कथा यज्ञ सप्ताह में अलग अलग कथाओं को विस्तार देते हुए कुं मीनाक्षी देवी वैष्णव ने कहा , देवकी के आठवां संतान समझकर जिस योगमाया को, जो एक बालिका के रुप में थी, जैसे ही कंश ने उसे मारने का भाव अपने अंदर लाता है और उसका पाप का घड़ा भर जाता है और विनाश का द्वार खुल जाता है।
आज समाज में लड़कियों को गर्भ में मारने का जो निकृष्ट प्रयास होता है यह महापाप की श्रेणी में है।सागर मंथन से निकले रत्नों में एक रत्न कन्या है।
अज्ञान रुपी पुतना ज्ञान रुपी कृष्ण का सानिध्य पाकर जहर वमन करना भूल जाती है,वैसे ही कामेंन्द्रीयों के वशीभूत हमारे अंदर भी जो अंधकार भरा है उसे दूर करने ज्ञानेन्द्रि प्रकाश की जरूरत है।
निष्काम प्रेम का भाव हमें गोकुल के गलियों से सीखनी चाहिए जहां ब्रजवासी कृष्ण की अनुपस्थिति में भी चौबिसों घंटा कृष्ण का साथ होने का अनुभूति करते हैं।
कृष्ण रुखमणी विवाह के सजीव चित्रण से उत्साह से भरे भागवत भक्तों नें वैसे ही कन्या दान का रस्म किये जैसे सच में रुखमणी उसकी ही पुत्री हो ।

कन्या दान का महत्व बताते हुए कथा प्रवक्ता मिनाक्षी देवी वैष्णव ने उपस्थित श्रोताओं से आग्रह किया कि जीवन में कम से कम एक बार कन्या दान का पुण्य अवश्य प्राप्त करें ये जीवन का सौभाग्य है, चाहे पुत्री किसी भी की हो विवाह में हर किसी को यथा संभव सहयोग अवश्य करना चाहिए।
आज के कथा श्रवण का लाभ लेने प्रदेश कांग्रेस महासचिव जितेन्द्र साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शालिनी यादव विशेष रूप से उपस्थित रहे,आयोजक दिनेश देशमुख ने अतिथियों का स्वागत व आभार व्यक्त किया।




