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केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ 5 नवंबर को किसानों के राष्ट्रव्यापी चक्का जाम में शामिल होंगे छत्तीसगढ़ के किसान

न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी के अलावा प्रति एकड़ 20 क्वि.धान खरीदने, गेंहू चना आदि उपजों की सरकारी खरीदी करने का वायदा पूरा करने, न्याय योजना में सभी किसानों को शामिल करने की मांग होंगे चक्काजाम के मुद्दे

दुर्ग(खबर वारियर)छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के कार्यकारिणी की बैठक आई के वर्मा की अध्यक्षता में ग्राम बोरई में आयोजित की गई। बैठक में मातरोडीह के किसान द्वारा आत्महत्या करने की घटना पर दुख व्यक्त करते हुए इसके लिये सरकारी तंत्र की विफलता को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया गया।

राज्य सरकार द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना चाहिये कि बिना टेस्ट रिपोर्ट के कहीं भी खाद, बीज या दवाई आदि की बिक्री न हो आवश्यकता पड़ने पर इसे रोकने के लिये कड़े कानून बनाया जाना चाहिये, जांच की रिपोर्ट जल्दी मिले इसके लिये प्रदेश में सर्व सुविधा युक्त लेब स्थापित किया जाना चाहिये, राज्य सरकार की ओर से पीड़ित परिवार को दिये गये 4 लाख रूपये की सहायता राशि को नाकाफी बताते हुए कहा गया कि किसी प्रकृतिक आपदा के कारण किसान की आकस्मिक मृत्यु नहीं हुई है बल्कि तंत्र की नाकामी का शिकार होकर किसान ने आत्महत्या किया है, सरकार को ऐसे प्रकरणों में सम्मानजनक आर्थिक सहायता देने के लिये नीति बनानी चाहिये

संगठन की बैठक में हरियाणा के कुरूक्षेत्र में विभिन्न राज्यों के 2 दर्जन से अधिक किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की 8 अक्टूबर की बैठक में तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ 5 नवंबर को राष्ट्रव्यापी चक्काजाम करने संबंधी निर्णय का समर्थन करते हुए उस दिन राज्य में भी चक्काजाम करने का निर्णय लिया गया प्रदेश के अन्य किसान संगठनों को चक्काजाम में शामिल कराने का प्रयास किया जायेगा।

छत्तीसगढ़ में सी – 2 लागत मूल्य पर एमएसपी और इसकी कानूनी गारंटी के अलावा राज्य में प्रति एकड़ 20 क्वि. की दर से धान की सरकारी खरीदी 1 नवंबर से शुरू करने, चना गेहूं की सरकारी खरीदी शुरू करने का वायदा पूरे करने, किसान न्याय योजना में सभी किसानों को शामिल करने और आदान की 10 हजार रूपये की आदान राशि जून माह तक एकमुश्त भुगतान करने की मांग चक्काजाम के प्रमुख मुद्दे होंगे

बैठक में भाजपा के सांसदों द्वारा गांवों में चौपाल लगाकर तीन कृषि कानूनों के लाभ पर गलत बयानी करने पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा गया कि अपने उपज कहीं भी अपने दाम पर अपनी उपज बेचने की गारंटी किसानों को केंद्र के कानून से नही मिली है किसान ऐसा करने के लिये हमेशा से ही आजाद रहे हैं किंतु कहीं भी केंद्र के घोषित एमएसपी का दाम भी किसानों को कभी और कहीं नहीं मिला है वर्तमान तीन कृषि कानून भी किसानों के अपने निर्धारित दाम तो छोड़ दीजिये एमएसपी पर खरीदी होने की भी कानूनी गारंटी प्रदान नहीं करता है

बैठक में एड. राजकुमार गुप्त, झबेंद्र भूषण वैष्णव, पुरूषोत्तम वाघेला, उत्तम चंद्राकर, परमानंद यादव, बंशी देवांगन, मेघराज मढ़रिया, बद्रीप्रसाद पारकर, बाबूलाल साहू, प्रमोद पवांर, कल्याण सिंह ठाकुर, दीपक यादव, संतु पटेल, कांति देशमुख आदि शामिल थे ।

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