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भारतीय सेना के लिए इजराइल से आ रहा है दुनिया का सबसे खतरनाक ड्रोन

दिल्ली(खबर वारियर)- भारतीय सेना ने हाल ही में फ्रांस से राफेल नाम के शक्तिशाली फाइटर जेट्स वायुसेना को और भी ज़्यादा मजबूत बनाने के लिए मंगवाया था जिसके बाद अब इजरायल से चार हेरॉन टीपी मीडियम ऑल्‍टीट्यूट यूएवी लीज पर लिए हैं. मन जा रहा है की इन ड्रोन को सेना ने आपातकालीन खरीद प्रक्रिया कार्यक्रम के तहत लीज पर लिया गया है.

वही ड्रोन लीज पर लेने की जानकारी ऐसे समय में सामने आ रही है जब लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीनी सेना की तरफ से डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया को शुरू किया जा चुका है. रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीएसी) के तहत हेरॉन की लीज दूसरा सबसे अहम कॉन्‍ट्रैक्‍ट है. इससे पहले इंडियन नेवी के लिए इन्‍हीं नियमों के तहत अमेरिका से सी गार्डियन यूएवी खरीदे गए है।

जानकारी अनुसार तो 15 फरवरी को हेरॉन यूएवी की लीज पर जनवरी माह के मध्‍य में साइन किया गया था.बताया जा रहा है कि यह कॉन्‍ट्रैक्‍ट करीब 200 मिलियन डॉलर का है और तीन वर्ष तक के लिए है.जोकि जून 2020 में सरकार की तरफ से तीनों सेनाओं के मुखियाओं को ‘इमरजेंसी पावर्स’ से लैस किया गया था ताकि सेनाओं की जरूरतों को जल्‍द पूरा किया जा सके. एलएसी पर स्थितियों के बीच ही रक्षा मंत्रालय ने उस सामानों की लिस्‍ट तैयार कर ली है.

जिन्‍हें साल 2021 में सेनाओं के लिए खरीदा जाएगा. रक्षा मंत्रालय इस वर्ष सेना को सी-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट से लेकर तेजस MK 1-A तक से लैस करने की तैयारी कर चुका है. इजरायल के साथ हेरॉन ड्रोन के अपग्रेडेड वर्जन की खरीद अपने अंतिम चरण में है. साल 2021 की पहली तिमाही में इसके साइन होने की संभावना है.

इसके साथ ही चीन की तरफ से पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव के बीच भारत ने सितंबर माह में इजरायल के बने हेरॉन ड्रोन को अपग्रेड करने के लिए अनुरोध किया था. चीन की पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के साथ जारी टकराव के बाद अब भारत की सेनाओं का ध्‍यान उनके पास मौजूद ड्रोन पर गया.अब भारत के पास इस समय चीन के पास मौजूद ड्रोन टेक्‍नोलॉजी और सर्विलांस ड्रोन क्षमता का कोई मुकाबला नहीं है.

भारत ने पिछले वर्ष इजरायल से अनुरोध किया था कि वह हेरॉन मीडियम रेंज वाले ड्रोन को अपग्रेड कर दे.हेरॉन का प्रयोग इस समय सेनाएं कर रही हैं. इसकी सर्विलांस क्षमता को बढ़ाने के लिए भारत ने कम्‍यूनिकेशन लिंक्‍स को अपग्रेड करने के लिए कहा है.

वही वर्तमान समय में हेरॉन ड्रोन को सैटेलाइट से लिंक करना थोड़ा मुश्किल है. अपग्रेडेशन के दौरान हेरॉन को सैटेलाइट पैकेज के साथ फिट किया जाएगा. ताकि ड्रोन सैटेलाइट के साथ संपर्क कायम कर जानकारी को रियल टाइम बेसिस पर भेज सकेगा. इस अपग्रेड होने के बाद हेरॉन बिना किसी रूकावट या फिर संपर्क खोने के डर के बिना सर्विलांस को अंजाम दे सकेगा.

जानकारी के मुताबिक हेरॉन अपग्रेड प्रोग्राम को पिछले वर्ष रक्षा मंत्रालय की तरफ से अनुमति दी जा चुकी है. भारत की तरफ से रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) और प्राइवेट सेक्‍टर की तरफ से सेना के लिए ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्‍टम को तैयार किया जा रहा है. तीनों सेनाएं इस नतीजे पर पहुंचीं कि भारत को एक ऐसे ड्रोन को अपनाना चाहिए जो पूरी तरह से हथियारों से लैस हो. हेरॉन ड्रोन को इजरायल की एरोस्‍पेस इंडस्‍ट्रीज (आईएआई) ने तैयार किया है.

इस ड्रोन को उन हथियारों से फिट किया जा सकता है जो जमीन पर आसानी से टारगेट को तबाह कर सकते हैं. अगर इसे दिल्ली से लॉन्च किया जाये तो सिर्फ 30 मिनट के अंदर बॉर्डर पर दुश्मनों का पता लगा सकता है.

आपकी जानकारी के लिए बता दे इसके सेंसर्स इतने तेज हैं कि 30,000 फीट की ऊंचाई से भी यह दुश्मनों की जानकारी आसानी से मिल सकती है. इजरायल ने फरवरी 2015 में बंगलुरु के एरो-इंडिया शो में पहली बार हेरॉन टीपी ड्रोन का प्रदर्शन किया था. 11 सितंबर 2015 को रक्षा मंत्रालय ने 400 मिलियन डॉलर में 10 हेरॉन ड्रोन की खरीद को मंजूरी दी. साल 2016 में जब भारत एमटीसीआर का सदस्‍य बना तो इस ड्रोन की खरीद का रास्‍ता भी खुल गया.

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