हजारों अतिथी शिक्षकों की सेवाएं समाप्ति का निर्णय निंदनीय, हुआ अन्याय – विजय झा

पद रिक्त रहने के बाद भी सेवा समाप्ति बेरोजगारी बढ़ाने वाला निर्णयं
रायपुर(khabar warrior)- छत्तीसगढ़ सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विभाग में एक वर्ष पूर्व व्यापम के माध्यम से चयनीत व्याख्याताओं की नियमित नियुक्ति प्रारंभ करते हुए कोरोना काल में सेवा देने वाले अतिथी शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लेकर प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री भूपेश बधेल, एवं शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम को बदनाम करने की साजिश किया जा रहा है। सेवा समाप्ति के निर्णय का छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संध ने निदां की है।
संध के प्रांतीय अध्यक्ष विजय कुमार झा, जिला शाखा अध्यक्ष इदरीश खाॅन ने कहा है कि प्रदेश में कोरोना काल के पूर्व व्यापम के द्वारा व्याख्याताओं की प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित कर चयनीत किया गया था। चयनीत सूची अनुसार दो-तीन बार व्याख्याताओं के कौसिलिंग, दस्तावेजों की जाॅच उपरांत नियुक्ति आदेश जारी किया गया है। नियमित नियुक्ति के कारण विद्यालयों में कार्यरत् संकट मोचन रूपी अतिथी शिक्षकों के लगभग 1000 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय शिक्षा विभाग ने लिया है।
ऐसे छत्तीसगढ़ के सपूत पुनः बेरोजगारी के कगार पर आ जावेगें। इसके बाद शिक्षक व सहायक शिक्षकों की नियुक्तियां भी होने की संभावना है।
जब शिक्षा विभाग में शिक्षकों के पद रिक्त है तो सरकार के चुनावी धोषणा पत्र का पालन करते हुए इन अतिथी शिक्षकों को भी नियमित करना चाहिए। इन अतिथी शिक्षकों को ‘यूज एण्ड थ्रो‘ किए जाने से प्रदेश में बेरोजगारी और बढ़ेगी। जबकि मुख्यमंत्री भूपेश बधेल ने अपने बजट भाषण में 1 मार्च को बेरोजगारी दूर करने के अपने संकल्प को दोहराया है।
ज्ञातव्य है कि राजधानी में उक्त अतिथी शिक्षकों को लंबा व निर्णायक आंदोलन कर लाठी खाई थीं जिसमें महिला शिक्षक भी शामिल थीं। संध ने देश व प्रदेश के परंपरा का स्मरण शिक्षा मंत्री को कराते हुए ध्यान दिलाया है कि ‘‘अतिथी देवो भव‘‘ को छत्तीसगढ़ की मांटी में साकार किया जाना चाहिए। संध के कार्यकारी अध्यक्ष अजय तिवारी, महामंत्री उमेश मुदलियार, प्रांतीय कोषाध्यक्ष रविराज पिल्ले, संभागीय अध्यक्ष संजय शर्मा, प्रांतीय उपाध्यक्ष विश्वनाथ ध्रुव, प्रांतीय सचिव अमर मुदलियार, नरेश वाढ़ेर, प्रांतीय संयोजक पीएचई. विमल चंद्र कुण्डू, सुरेन्द्र त्रिपाठी, रामचंद ताण्डी, जवाहर यादव, सी.एल.दुबे, आलोक जाधव, बजरंग मिश्रा, टार्जन गुप्ता, आदि नेताओं ने तत्काल अतिथी शिक्षकों की सेवा समाप्ति संबंधी आदेश को वापस लेने की मांग मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री से की है।



