सिंधिया सहित 22 समर्थकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार संकट में

भोपाल/दिल्ली(khabarwarrior)जब देश भर में होली की खुमारी चढ़नी शुरू हो रही थी उसी वक्त मध्य प्रदेश में  सियासी संकट शुरू होकर हो अपने चरम पर पहुंच गया।मंगलवार को जब पूरा देश होली के रंग में रंगा था तो कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने उनके 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पहुंचे।

सिंधिया ने कांग्रेस से दिया इस्तीफा

बैठक करीब घंटे भर चली और मुलाकात के बाद सिंधिया ने अपने ट्विटर हैंडल के जरिए होली मिलन की फ़ोटो तो नहीं डाली लेकिन कांग्रेस से अपने इस्तीफा की घोषणा कर डाली।

उन्होंने जो त्याग-पत्र साझा किया है।कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजे त्याग-पत्र में सिंधिया ने कहा, ‘मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं,और जैसा कि आपको अच्छी तरह पता है कि पिछले एक साल से यह रास्ता तैयार किया जा रहा था।अपने राज्य और देश के लोगों की सेवा करना मेरा हमेशा से मकसद रहा है,मैं इस पार्टी में रहकर अब यह करने में अक्षम में हूं।

सिंधिया के सांथ 22 का इस्तीफा

सिंधिया के कांग्रेस को अलविदा कहने के बाद मध्य प्रदेश में मची सियासी उठापटक तेज हो गई है।मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश कांग्रेस सरकार से नाराज कांग्रेस के बागी हुए विधायकों का विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने का सिलसिला शुरू हो गया।

होली के दिन मंगलवार सुबह को कांग्रेस के सिंधिया खेमे के 19 विधायकों ने राजभवन को अपना त्याग-पत्र भेज दिया।भाजपा नेताओं ने विधानसभा अध्यक्ष को विधायकों के इस्तीफा वाली सूची भी सौंप दिया है।

सिंधिया खेमे के यह कांग्रेसी विधायक बेंगलुरु के एक रिसॉर्ट में ठहरे हुए हैं।दिन ढलते ढलते बढ़कर ये संख्य़ा बढ़कर 22 तक पहुंच गई।

कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक एंदल सिंह कंसाना और देवास जिले की हाटपिपल्या विधानसभा सीट से कांग्रेस के ही विधायक मनोज चौधरी ने भी विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया है।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ आदिवासी विधायक बिसाहूलाल  ने बकायदा मीडिया के सामने धान की सदस्यता लेने के सांथ विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इस सियासी भूचाल के बाद प्रदेश की कमलनाथ सरकार संकट में तो जरूर नजर आ रही है।

कांग्रेस ने सिंधिया को पार्टी से निकाला

लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीररंजन चौधरी ने कहा कि कांग्रेस ने  सिंधिया को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते कांग्रेस से बाहर निकाल दिया है।पार्टी ने माना की कमलनाथ सरकार संकट में है,लेकिन आने आने वाले दिनों में  अगर बहुमत साबित करने की नौबत आती है तो वे तैयार हैं और सफल भी होंगे।

बीएसपी-एसपी की अहम  होगी भूमिका

सियासी सरगर्मियों के बीच बीएसपी और समाजवादी पार्टी के एक-एक विधायक ने भोपाल में शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात सियासी माहौल को और हवा दी है। मुलाकात पर चौहान ने कहा कि यह रंगों के त्योहार होली के अवसर पर एक शिष्टाचार भेंट थी।

दोनों दलों ने मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ की कांग्रेस सरकार को समर्थन दिया हुआ है। इसलिए चौहान के साथ उनकी इस मुलाकात को बदलते राजनीतिक परिदृश्य से जोड़ा जाना लाजमी है।

मध्य प्रदेश में चल रहे राजनीतिक संकट के बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्यपाल लालजी टंडन को पत्र लिखकर कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से त्याग-पत्र देने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति आस्था जताने वाले अपने मंत्रिमंडल के 6 मंत्रियों को तत्काल हटाने की सिफारिश की है।

एमपी अब किसकी  होगी सरकार

पूरे घटनाक्रम के बाद सीएम हाउस में विधायक दाल की बैठक हुई,जिसमे सभी ने एकजुटता का परिचय देते हुए फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित करने की बात  भी कही।

उधर बीजेपी मुख्यालय भोपाल में भी आला नेताओं के सांथ,सांसदों,विधायकों की अहम बैठक की गई ,फिर सभी विधायकों को एक सांथ भोपाल से बाहर भेज दिया गया है।

इन सारी उठापटक के के बीच ये अंदाज लगाया जा रहा है कि,अब ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश के रास्ते  राज्य सभा मे इंट्री कर केंद्र में मंत्री बन जाएंगे और उनके समर्थक एमपी में बीजेपी सरकार में  उप मुख्यमंत्री और मंत्री बनकर बीजेपी की सरकार बनाने में मदद करेंगे।लेकिन पूरी पिक्चर अभी बांकी है।

 

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