“हो युवा तो युवाओं वाली बात होना चाहिए”,”प्रश्न खड़ा कर सको ऐसा जज्बा होना चाहिए”

रायपुर(khabarwarrior)आप युवा हैं,आप अपनी ताकत को पहचानिये। दुनिया आप से है आप दुनिया से नहीं। इस आह्वान के सांथ लेखक राजेश बिस्सा का युवाओं के नाम एक खुला पत्र  उन्हीं के शब्दों में……

प्रिय युवाओं 

सादर वंदे

“हो युवा तो युवाओं वाली बात होना चाहिए”
“प्रश्न खड़ा कर सको ऐसा जज्बा होना चाहिए’

स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि “आज के युवा वर्ग को, जिसमें देश का भविष्य निहित है, उसे ऐसा प्रयास करना होगा ताकि उनके भीतर जगी हुई प्रेरणा तथा उत्साह ठीक पथ पर संचालित हो, अन्यथा शक्ति का ऐसा अपव्यय या दुरुपयोग हो सकता है कि जिससे मनुष्य की भलाई के स्थान पर बुराई ही होगी।

शहीद भगत सिंह ने कहा की “युवाओं में भूकंप सी भयंकरता भरी हुई होती है। इसलिये वह उन्नती के सर्वोच्च शिखर पर पहुंच सकता है तो वह अंधपात के गहरे खंदक में भी गिर सकता है।

ये दोनों महान हस्तियां हमेशा युवाओं की प्रेरणा श्रोत रही हैं। दोनों ने ही युवाओं में अपार शक्ति को माना है। दोनो का ही मानना है कि युवा चाहे तो संसार को रौशन कर सकता है लेकिन चिंता भी व्यक्त की है कि वह क्षण भर में राष्ट्र, समाज, परिवार को अंधकार में भी झोंक सकता है।

युवाओं को पत्र लिखने का मेरा यही उद्देश्य है कि आप अपनी ताकत को पहचानिये। दुनिया आप से है आप दुनिया से नहीं। आप चिंतन मनन कीजिए कि कहीं कोई आपकी इस शक्ति का दुरुपयोग तो नहीं कर रहा है।

कही आप अनजाने में ही स्वार्थी तत्वों के स्लीपर सेल तो नहीं बनते जा रहे हैं?

स्लीपर सेल वो होते हैं जो दूसरों को अपना आदर्श मान शुद्ध भावना के साथ अपनी दृष्टी में तो राष्ट्र, समाज व विश्व हित में काम कर रहे होते हैं लेकिन वास्तविकता के धरातल पर वो अनजाने में ही अहित कर रहे होते हैं।

आप युवा हैं आपकी भूमिका को यह देश समाज और परिवार एक वाहक के रूप में देखना चाहता है, एक नेतृत्वकर्ता के रूप में देखना चाहता है, ना कि एक कैरियर के रूप में, ना कि एक मालवाहक के रूप में अर्थात स्लीपर सेल के रुप में।

आज मैं देख रहा हूं एक बहुत बड़ा युवा वर्ग जिसमें अपार संभावनाएं हैं देश को आगे ले जाने की, घर परिवार को ताकत देने की वह अपने विचारों को खोता जा रहा है। स्वयं के फायदे के लिए दौड़ने वाले अवसरवादी तत्वों के विचारों को आगे बढ़ाने के लिए कैरियर के रूप में इस्तेमाल हो रहा है।

आप सोच रहे होंगे कि आखिर हम कैसे एक कैरियर के रूप में इस्तेमाल हो रहे हैं तो उस पर चिंतन मनन कीजिएगा आपको स्वयं लगने लगेगा कि आप स्वार्थी व अवसरवादी लोगों के चक्रव्यूह में बुरी तरीके से जकड़े हुए हैं। उन्होने आपके मन को सम्मोहित कर लिया है और आप उनके एजेंडे को तीव्र गति से बढ़ाने के लिए एक माध्यम अर्थात कैरियर (स्लीपर सेल) बने हुए हैं।

कुछ बातों पर गौर करेंगे तो स्वयं ही समझ जायेंगे की आप स्लीपर सेल बन चुके है। बस आपको यह विचार करना है कि –

पहला अगर सोशल मिडिया की पोस्ट कि विश्वसनीयता जांचें बिना उस पोस्ट को फैलाने के अभियान में लग गए गए हैं तो समझ जाइए कि आप व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी बन चुके हैं अर्थात आप स्वार्थी लोगों के चंगुल में फंसकर एक आदर्श कैरियर (स्लीपर सेल) बन चुके हैं।

दूसरा सोशल मिडिया की पोस्ट अगर दूसरे के प्रति नफरत का भाव पैदा कर रही है और हम उस पोस्ट को आगे बढ़ा रहे हैं तो समझ जाइए आप सम्मोहित हो चुके हैं तथा ड्राइवर की जगह कैरियर (स्लीपर सेल) की भूमिका में आ चुके हैं।

तीसरा अगर कोई पोस्ट अपने से छोटे के साथ तुलनात्मक अध्ययन कर रही हो और आप आत्ममुग्ध होकर उसे फॉरवर्ड पर फॉरवर्ड किए पड़े हैं तो समझ जाएं आप अवसरवादी लोगों के गिरोह के मालवाहक अर्थात स्लीपर सेल बन चुके हैं।

चौथा कोई पोस्ट जाति धर्म क्षेत्र के संदर्भ में नकारात्मकता का भाव या विशिष्टता का भाव पैदा कर रही है और उसे आप आगे बढ़ाने के अभियान में लगे हुए हैं तो समझ जाइए कि आप छद्म राष्ट्रवादियों के गिरोह के आदर्श कैरियर बन चुके हैं।

पांचवा ऐसी प्रशंसा वाली पोस्ट जिसकी सत्यता के बारे में आप अनिभिज्ञ हैं लेकिन आपको आत्म गौरव का एहसास करा रही है और उस गौरव गान को हम अपने लोगों के बीच में बांटने के लिए निकल पड़े हैं तो समझ जाइए आप स्वार्थ परक लोगों के चंगुल में फंस चुके हैं उनका कैरियर बन चुके हैं।

इतिहास गवाह है कि जब जब जब युवाओं का सौर्य जागृत हुआ है युवाओं की विचार शक्ति दृढ़ रही है तब तब क्रांति आई है, खुशहाली आई है, तरक्की आई है। और दूसरी ओर इतिहास इस बात का भी गवाह है जब जब युवा दूसरों के हाथों की कठपुतली बना है छद्म लोगों के विचारों का वाहक बना है तब तब उस राष्ट्र में अवनति और दुर्गति आई है।

युवा का काम है सत्ता के गलियारों पर बैठे लोगों से प्रश्न करना। उनकी नीतियों पर विचार करके सुझाव देना। उनकी गलत नीतियों और गलत कार्य पद्धतियों का पुरजोर विरोध करना।
युवाओं से मेरी यही इल्तजा है कि आप अपनी स्वतंत्र सोच को आगे बढ़ाईये। किसी की मुहिम का हिस्सा मत बन जाइये। नदी की धारा में तो कूड़ा कचरा ही बहा करता है आप चट्टान बनिये जो नदी की धार को अपने हिसाब से मोड़ने की ताकत रखता है।
जय हिंद …

राजेश बिस्सा
9753743000
(लेखक राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत स्वतंत्र विचारक हैं। युवाओं के बारे लगातार लिखते रहे हैं। यह विचार इनके निजी हैं)

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