हिंदी एक भाषा ही नही एक विचार है..

जनमानस की क्रांति का साधन है “हिंदी”

अमित चन्द्रवंशी “सुपा”🖋️🖋️


हिंदी” हिन्द का धड़कन है यह सभी जानते है, वही अगर बात की जाये तो हिंदी का जन्म संस्कृत से हुआ है या यूं कहें हिंदी संस्कृत का एक रूप है, हिंदी हिंदू आर्य के शाब्दिक व्यवहार को प्रदर्शित करते थे जो जनमानस को आपस में जोड़कर रखती है, आज करोड़ो दिलों की मातृभाषा बन गई है, बचपन मे पहला शब्द हिंदी करोड़ो लोग सुनकर बड़े होते है । हिंदी एक न्याय प्रिय भाषा है वही मिठास से भरा हुआ पिटारा भी है।

आजादी की लड़ाई का जब जब जिक्र होगा, हिंदी कभी अछूता नही रहेगा, हिंदी का वैभव आज से नही या फिर आजादी की लड़ाई से नही आदिकाल से जनमानस की भाषा रही है। सभ्यता का उदय हुआ तब से भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहा है, एकाएक कोई भाषा समृद्ध नही होती है, उसे प्रकृति, लोककला, लोकसंस्कृति, लोक जीवन, रहनसहन, व भाषा शैली आदि से भाषा बनती है।

प्रकृति के मूलतत्व जीवन का हिस्सा होती है, हम प्रकृति से हँसना, बोलना, रोना, सोना, खाना, पीना व शान्ति आदि सीखते हैं। वहीं से भाषा या बोली का जन्म होता है, प्रकृति की चंचलता ही जीवन को अनमोल बनाती है, वैसे ही भाषा को काव्य, संस्कृति, रहनसहन, पहनावा, कला व खानपान आदि भाषा को रहस्यों की गुत्थी सुलझाती है। जीवन मे हम किस परिवेश में रहते है, देशकाल की सीमा, भूगोल, बोली व वेशभूषा बदल देती है साथ ही खानपान व संस्कृति।

भाषा एक दिन में नही बनती है यह सच है, लेकिन एक के बोलने से या पढ़ने से भाषा जरूर समृद्ध होती है, हिंदी ममतामयी भाषा है, बोलचाल की भाषा मे प्यार व अपनापन का छाप झलकता है। सदियों लग जाती है भाषा का गहरा छाप छोड़ने में, आजादी के समय ही हिंदी भाषा ने मानव के चेतना को समृद्ध किया, परचे में कहानी, कविता, नाटक व एकांकी आदि लिखकर हिंदुस्तान की जनता को देश के प्रति जागरूक किये व स्वंतत्रता की लड़ाई में साथ देने लाखों लोग साथ खड़े हुए, भाषा का कमाल ही है जो भारत की जनमानस को एक कर पाई, साहित्य ने आजादी में एक बड़ी भूमिका निभाई है।

दुनिया में सात भाषा में वेब एड्रेस बनता है उसमें से एक हिंदी है, किताबी दुनिया से खत्म होकर हिंदी जुबान पर आ गई है साथ ही डिजिटल दुनिया में भी। हिंदी का दबदबा आज भी कायम है,पहले से अधिक लोग बोलने लगे है, क्योकि हिंदी भाषा संस्कृति व संस्कार की भाषा है, जो विकास का भुवन लिखते नजर आती है, राष्ट्र को एक बनाती है, गूगल ने भी हिंदी की महत्व को समझा व लिखने में आसान भी कर दिया।

1953 से 14सितंबर को हिंदी दिवस भारत मे मनाया जाता है, हिंदी केवल भाषा नही है अपितु जनमानस की अस्मिता, गौरव व स्वभिमान की भाषा है। हिंदी भारत की सीमा में कैद नही हुई विदेशों में भी आज पढ़ाई होने लगी है लोग बोलने लगे है। भारत भूमि को हिंदी बहुत सुंदर व समृद्ध बनाती है, विभिन्न बोली व भाषाओं वाले देश में एकता का परिचायक है।

(लेखक महाविद्यालय का छात्र हैं तथा समसामयिक विषयों पर लगातार लेखन का कार्य भी करते हैं)