प्रदेश में नक्सलवाद को लेकर बीजेपी – कांग्रेस में आरोपों और दावों का दौर, भाजपा ने उठाए सवाल तो कांग्रेस ने यूँ दिया जवाब

भाजपा के माओवादियों के साथ अंतरंग संबंध एक बार फिर हुए उजागर : आरपी. सिंह
रायपुर(खबर वारियर)प्रदेश में नक्सलवाद को लेकर बीजेपी और कांग्रेस फिर आमने सामने आ गये हैं और दोनों ओर से आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है।ताजा विवाद नक्सलियों के स्थापना दिवस के दौरान नक्सलियों की गतिविधियों को लेकर उठा हुआ है।
कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा है कि भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव द्वारा आज जारी किए गए बयान के दूसरे पैरा में बहुत स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अपने स्थापना दिवस समारोह के दौरान माओवादी प्रदेश में खासकर बस्तर में किसी बड़ी हिंसक वारदात को अंजाम देंगे। इतनी सुस्पष्ट और सटीक जानकारी ना तो खुफिया तंत्र के पास है और ना ही पुलिस को प्राप्त हुई है। माओवादी क्षेत्रों में तो केंद्र सरकार की एजेंसी आईबी भी लगातार सक्रिय रहती है और सूचना संकलित करती रहती है।
केंद्र सरकार की 50 से अधिक बटालियन और उनका गुप्त सूचनातंत्र भी बस्तर में कार्यरत है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा है कि जो गुप्त जानकारी ना केंद्र सरकार के सूचना तंत्र को मिली है ना राज्य सरकार के सूचना तंत्र को मिली है उसकी सटीक और स्पष्ट जानकारी भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव के पास होने से इस बात पर मुहर लग गई है कि भारतीय जनता पार्टी नेताओं के माओवादियों से गहरे अंतरंग संबंध हैं।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव का बयान कांग्रेस द्वारा भाजपा पर लगाए गए माओवादियों से सांठगांठ के आरोपों के सही होने का जीता जागता सबूत है। भाजपा प्रवक्ता का यह बयान भाजपा के माओवादियों से संबंधों के आरोपों के सही होने पर मुहर लगाता है।
यदि निकट भविष्य में घटित होने वाली किसी माओवादी घटना की अंदरूनी जानकारी संजय श्रीवास्तव के पास है तो निश्चित रूप से पूर्व में घटित जीरम की घटना की जानकारी भी संजय श्रीवास्तव के पास रही होगी।
कांग्रेस प्रवक्ता आर पी सिंह ने मांग की है कि एनआईए अब जीरम की घटना को लेकर संजय श्रीवास्तव से गहन पूछताछ करें और उनके पास जो भी जानकारी है उसको लेकर आगे बढ़े ताकि भाजपा की जीरम की घटना के मामले में संलिप्तता उजागर हो सके।
कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा है कि वे राजनीति में शुरुआत से ही बस्तर टाइगर शहीद महेंद्र कर्मा के साथ जुड़े रहे और जीरम के मामले में सच्चाई सामने आना उनके लिए राजनैतिक नहीं बल्कि भावना से जुड़ा हुआ प्रश्न है।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाके बस्तर संभाग में नक्सलियों की हिंसक और आक्रामक वारदातों को लेकर प्रदेश सरकार से किया सवाल
भाजपा ने पूछा :
दहशतगर्द और विध्वंसक नक्सलियों के सफाए के लिए प्रदेश सरकार कब आक्रामकता दिखाएगी?
अपने स्थापना दिवस समारोह के दौरान नक्सली प्रदेश, ख़ासकर बस्तर में किसी बड़ी हिंसक वारदात को अंजाम देंगे
ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रदेश सरकार ने नक्सलियों के लिए प्रदेश को खुला क्षेत्र मुहैया करा दिया है :
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाके बस्तर संभाग में नक्सलियों की हिंसक और आक्रामक वारदातों को लेकर प्रदेश सरकार से सवाल किया है कि लगातार नक्सलियों द्वारा बस्तर संभाग में जवानों व आदिवासियों को अगवा कर उन्हें मौत के घाट उतारकर दहशत फैलाने और विध्वंसक करतूतों को अंजाम देने के ख़िलाफ़ प्रदेश सरकार कब आक्रामकता दिखाएगी?
श्रीवास्तव ने कहा कि इन दिनों नक्सली अपना स्थापना दिवस समारोह मना रहे हैं और इस बात की पूरी आशंका है कि वे इस दौरान प्रदेश, ख़ासकर बस्तर में किसी बड़ी हिंसक वारदात को अंजाम देंगे।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार के आने के बाद से लगातार नक्सली हिंसक वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। बीजापुर में एक आम ग्रामीण की 15 नक्सलियों द्वारा की गई नृशंस हत्या के मामले का जिक्र करते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि पखवाड़ेभर में नक्सली लगातार इसी तरह आदिवासी युवकों, पुलिस व सीआरपीएफ के जवानों और अन्य शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों की हत्या कर चुके हैं, लेकिन प्रदेश सरकार के निकम्मेपन के चलते नक्सली हिंसा पर काबू नहीं पाया जा सक रहा है। नक्सलियों की मुख़ालफ़त के नाम पर सिवाय सियासी लफ़्फ़ाजियाँ करने इस सरकार ने कुछ और किया ही नहीं है।
श्रीवास्तव ने कहा कि लगभग दो साल के अपने कार्यकाल में प्रदेश सरकार नक्सलियों से निपटने के लिए कोई ठोस व क़ारगर रणनीति तक तैयार नहीं की है। इसी का नतीजा है कि नक्सली प्रदेश की कांग्रेस सरकार को ‘अपनी सरकार’ बताकर बेख़ौफ़ हिंसा कर रहे हैं। प्रदेश सरकार बताए कि उसके और नक्सलियों के इस रिश्ते को क्या नाम दिया जाए?
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्रीवास्तव ने कहा कि एक तरफ नक्सली हिंसा का तांडव मचाए बैठे हैं वहीं प्रदेश सरकार सुप्तावस्था से उबर ही नहीं पा रही है।
प्रदेश की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने जिस मुस्तैदी से छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के ख़िलाफ़ रणनीतिक सफलता अर्जित कर नक्सलियों के सफाए की पहल की थी, आज दो साल के कांग्रेस शासन ने उस पूरी रणनीतिक सफलता पर पानी फेरने का ही काम किया है।
श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रदेश सरकार ने नक्सलियों के लिए प्रदेश को खुला क्षेत्र मुहैया करा दिया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश सरकार को आज तक नक्सलियों के ख़िलाफ़ कोई उल्लेखनीय और बड़ी सफलता नहीं मिली है। यह प्रदेश सरकार आदिवासियों, आम आदमियों के जीवन का मोल समझे और नक्सली हिंसा के ख़िलाफ़ प्रभावी भूमिका का निर्वहन करे।



