छत्तीसगढ़

Kartik Purnima 2020: मुख्यमंत्री सहित हजारों श्रद्धालुओं ने महादेव घाट में लगाई पुण्य की डुबकी

रायपुर(खबर वारियर)- कार्तिक पूर्णिमा पर राजधानी के महादेव घाट में ब्रम्ह मुहूर्त से ही पुण्य की डुबकी लगाने का सिलसिला शुरू हो गया है। छत्तीसगढ़ी परंपरा में पुन्नी की डुबकी लगाने से पुण्य फल की मान्यता होने से सुबह सबेरे ही काफी लोग पहुंचे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी पुण्य की डुबकी लगाई। मुख्यमंत्री को डुबकी लगाते देखकर कई जनप्रतिनिधि भी उत्साह में आकर डुबकी लगाने लगे। उनके साथ दूधा धारी मठ के महंत रामसुंदर दास, महापौर एजाज ढेबर समेत अनेक जनप्रतिनिधियों ने भी डुबकी लगाई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक हटकेश्वर महादेव का दर्शन, आरती करके छत्तीसगढ़ की सुख, समृद्धि के लिए प्रार्थना की।

घाट के किनारे दूर दूर तक मुख्यमंत्री के पोस्टर लगे हुए थे। पश्चिम विधानसभा के विधायक विकास उपाध्याय के नेतृत्व में रविवार की रात से ही तैयारियां जोर शोर से की जा रही थी थी ताकि मुख्यमंत्री के स्नान में किसी तरह की बाधा न आए।

कोरोना के चलते नहीं लगा मेला

महादेवघाट पर हर साल भव्य मेला सजता था, ग्रामीण स्नान के बाद दर्शन, पूजन करके महादेव से मन्नत मांगते थे और मेले में दिनभर झूला झूलने, खेल तमाशा देखने की होड़ लगी रहती थी, लेकिन इस साल कोरोना महामारी के चलते प्रशासन ने मेले को अनुमति नहीं दी है। मेला ना लगने से लोग सिर्फ स्नान करके मंदिर में दर्शन लाभ ही ले रहे हैं।

हर हर महादेव, जय छत्तीसगढ़ मइया के जयकारे

मुख्यमंत्री ने डुबकी लगाने जैसे ही नदी में छलांग लगाई तो हर हर महादेव और छत्तीसगढ़ मइया के जयकारों से घाट परिसर गूंज उठा। उनके साथ विधायक विकास उपाध्याय ने भी डुबकी लगाई। इसके बाद दल बल के साथ मुख्यमंत्री ने मंदिर का दर्शन किया। हालांकि, कोरोना महा मारी को देखते हुए ज्यादा श्रद्धालुओं को प्रवेश नही दिया गया। मुख्यमंत्री के जाने के बाद भक्तों ने दो तीन गज की दूरी रखते हुए दर्शन किया।

दोपहर तक चलेगा स्नान का सिलसिला

महादेवघाट पर स्नान का सिलसिला दोपहर तक चलता रहेगा। प्रशासन के प्रतिबंध के चलते इस बार नदी में ज्यादा भीड़ एकत्रित नहीं होने दी जा रही है। लोग बारी बारी से ही स्नान कर सकेंगे।

नौकाओं की सैर

घाट के किनारे सजी नौकाओं में मुख्यमंत्री की फोटो लगाई गई है। मुख्यमंत्री के जाने के बाद लोगों ने नौका से नदी की सैर की। विधायक की ओर से फ्री में नौकायन की व्यवस्था की गई थी।

किया दीपदान

कई भक्तों ने सुबह नदी में दीपदान करने की परंपरा भी निभाई। सोमवती पूर्णिमा का संयोग होने से कार्तिक पूर्णिमा का महत्व बढ़ गया। इस मौके पर भोलेनाथ की विशेष पूजा हुई।

पूर्णिमा पर धरा था भगवान ने अर्द्ध नारीश्वर रूप

ऐतिहासिक हटकेश्वर महादेव के पुजारी पं.सुरेश गोस्वामी के अनुसार भगवान शंकर और भगवान विष्णु ने कार्तिक पूर्णिमा पर अर्ध्य-नारीश्वर का रूप धारण किया था। शक्ति को प्रसन्न करने के लिए पूर्णिमा की रात्रि में तुलसी की मंजरी, कमल पुष्प चढ़ाकर जागरण किया जाता है और उषा काल में पूजा की जाती है।

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